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नए ट्रेंड के समर्थन में तर्क:कोरोनाकाल में हफ्ते में एक दिन नहा रहे अमेरिकी, ब्रिटेन में भी 17% लोग ऐसा कर रहे, कह रहे- अब आगे भी यही रुटीन रहेगा

एक महीने पहलेलेखक: मारिया क्रेमर
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रॉबिन हार्पर इस रूटीन को बदलना नहीं चाहतीं। - Dainik Bhaskar
रॉबिन हार्पर इस रूटीन को बदलना नहीं चाहतीं।
  • रोज साबुन से नहाने से प्रदूषण बढ़ रहा, पानी की भी बर्बादी

अमेरिका के मार्था वाइनयार्ड की रहने वाली रॉबिन हार्पर ने महामारी के दौर में हफ्ते में सिर्फ एक दिन नहाना शुरू कर लिया है। 43 साल की हार्पर एक प्रीस्कूल में एडमिनिस्ट्रेटिव असिस्टेंट हैं। वह बताती हैं कि कोरोना ने हमें घरों में कैद कर दिया। इसलिए यह फैसला लिया। वैसे भी इस ट्रेंड को पर्यावरण के लिए अच्छा और व्यावहारिक माना गया, इसलिए यह जिंदगी में शामिल हो गया।

हार्पर कहती हैं कि गलत मत समझिए, लेकिन अब मैं फिर स्कूल जाने लगी हूं और मुझे लगता है कि यह एक चीज है, जिसे मैं छोड़ सकती हूं। वे कहती हैं कि मैं एक स्कूल में हूं, और अगर शरीर से गंध आती तो बच्चे साफ बोल देते। इसलिए मैं यह रुटीन आगे भी बनाए रखना चाहती हूं।

रॉबिन ऐसा करने वाली अकेली नहीं हैं, अमेरिका और ब्रिटेन में महामारी के बाद यह ट्रेंड शुरू हो गया है। महामारी ने खाने-पीने यहां तक कि कपड़े पहनने की आदतों पर भी असर डाला है। बच्चों में यह दिखने लगा है, बड़ी संख्या में पैरेंट्स शिकायत कर रहे हैं कि उनके बच्चे नहाने से बच रहे हैं। ब्रिटेन में यूगव के सर्वे के आधार पर बताया गया है कि 17% लोगों ने माना कि उन्होंने रोज नहाना बंद कर दिया है।

बड़ी संख्या पर सोशल मीडिया पर भी लोगों ने इस बात को स्वीकार किया। लंदन की पर्यावरणविद् डोनाचैड मैक्कार्थी के मुताबिक रोज न नहाना एकदम नई घटना है। हफ्ते में एक दिन नहाने वाली मैक्कार्थी कहती हैं कि हम रोजाना पानी नहीं बहाते, जरूरी सफाई तो सिंक से भी हो सकती है। 1992 में वे अमेजन के जंगलों में गई थीं। तब उन्हें अहसास हुआ कि जरूरत से ज्यादा विकास और हमारी आदतों ने प्रकृति को कितना नुकसान पहुंचाया। वे कहती हैं रोज साबुन से नहाकर भी तो हम प्रदूषण बढ़ा रहे हैं।

इसके फायदे गिनाने वाला भी एक तबका है। 42 साल की कैली मीलोच के मुताबिक कम नहाना यानी अच्छी त्वचा, स्वच्छ पृथ्वी। ऐशविले की कैली कहती हैं कि मुझे सिर्फ बेटी को स्कूल लेने जाना होता है, जब किसी से मिलना नहीं तो रोज नहाने की जरूरत ही क्या है।

आठ मिनट शॉवर लेने में 64 लीटर पानी खर्च हो जाता है: वाटर फंड
एस्टन में पर्यावरण विज्ञान की प्रोफेसर एंड्रिया आर्मस्ट्रांग लोगों को कम नहाने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। वे कहती हैं कि कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए बड़ी संख्या में लोगों को ऐसा करना होगा। उन्होंने कहा कि वाटर रिसर्च फंड के अनुसार 8 मिनट के शॉवर में करीब 64 लीटर पानी खर्च होता है। ईपीए कहता है कि 5 मिनट पानी बहना, 60 वॉट के बल्ब के 14 घंटे तक जलने के बराबर है। बड़ी संख्या में डॉक्टर और हेल्थ एक्सपर्ट कह चुके हैं कि रोज नहाना गैरजरूरी है। इसलिए इस बारे में सोचना चाहिए।

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