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अटलांटिक यूनिवर्सिटी की जांच में खुलासा:अमेरिका में जन्मा दुनिया का पहला बच्चा, जिसके खून में कोरोना एंटीबॉडी; मां को प्रसव से पहले लगा था कोरोना का टीका

न्यूयॉर्क3 महीने पहले
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बच्चे की मां को प्रसव से तीन सप्ताह पहले कोरोना के टीके की पहली खुराक दी गई थी। इसके बाद दूसरी खुराक भी दी गई। तब तक उनकी संतान (बेटी) का जन्म हो चुका था। (सिम्बॉलिक फोटो) - Dainik Bhaskar
बच्चे की मां को प्रसव से तीन सप्ताह पहले कोरोना के टीके की पहली खुराक दी गई थी। इसके बाद दूसरी खुराक भी दी गई। तब तक उनकी संतान (बेटी) का जन्म हो चुका था। (सिम्बॉलिक फोटो)

दुनिया में पहली बार आधिकारिक रूप से ऐसे बच्चे के जन्म की पुष्टि हुई है, जिसके खून में कोरोना से लड़ने वाले एंटीबॉडीज पाए गए हैं। एंटीबॉडीज यानी ऐसे प्रोटींस जो शरीर को किसी विषाणु से लड़ने के लिए प्रतिरोधक क्षमता देते हैं।

यह मामला अमेरिका के फ्लोरिडा में सामने आया है। फ्लोरिडा अटलांटिक यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने इस बच्चे की गर्भनाल के खून की जांच की थी। यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों- पॉल गिलबर्ट और चैड रुडनिक ने इस बाबत अध्ययन रिपोर्ट तैयार की है। बताया जाता है कि बच्चे की मां को प्रसव से तीन सप्ताह पहले कोरोना के टीके की पहली खुराक दी गई थी।

इसके बाद उन्हें निर्धारित 28 दिन बाद दूसरी खुराक भी दी गई। तब तक उनकी संतान (बेटी) का जन्म हो चुका था और वे उसे लगातार स्तनपान करा रही थीं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि ये एंटीबॉडीज बच्ची को कोरोना से सुरक्षित रखने में कितने असरदार होंगे।

अल्ट्रासाउंड तरंगें कोरोना के लिए जानलेवा
अमेरिका में ही हुए एक अन्य अध्ययन में पाया गया है कि 25 से 100 मेगाहर्ट्ज की अल्ट्रासाउंड तरंगें कोरोना विषाणु के लिए जानलेवा हो सकती हैं। वे सेकेंड के छोटे से हिस्से के भीतर ही इस विषाणु और उसकी कोशिकाओं को नष्ट कर सकती हैं। यह अध्ययन एमआईटी के विशेषज्ञों ने किया है। अध्ययन रिपोर्ट जर्नल ऑफ मैकेनिक्स एंड फिजिक्स ऑफ सॉलिड में प्रकाशित हुआ है।

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