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वैक्सीनेशन प्रोग्राम:न्यूयॉर्क में वैक्सीन लगवाने वालों में एशियाई ज्यादा, डोज लेने में दूसरा बड़ा आंकड़ा श्वेत वयस्कों का

एक महीने पहलेलेखक: अमांडा रोसा
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एशियन अमेरिकन समुदाय के लोग सबसे ज्यादा वैक्सीन लगवाने के लिए आ रहे हैं। - Dainik Bhaskar
एशियन अमेरिकन समुदाय के लोग सबसे ज्यादा वैक्सीन लगवाने के लिए आ रहे हैं।

अमेरिका में इन दिनों चल रहे वैक्सीनेशन प्रोग्राम में एशियाई नागरिक बढ़-चढ़कर शामिल हो रहे हैं। वियतनाम की रहने वाली 77 साल की फुंग गुयेन पहले हिंसा और फिर वायरस के प्रकोप से डरी हुई थीं, लेकिन जब उन्होंने वैक्सीन के बारे में सुना तो डोज लेने के लिए तैयार हो गईं। हालांकि उन्हें अंग्रेजी समझने और बोलने में दिक्कत होती है और उन्हें एक आंख से कम भी दिखता है, फिर भी उन्होंने एक स्वयंसेवी संस्था मेकॉन्ग की मदद से वैक्सीन डोज का अप्वाइंटमेंट लिया। संस्था की मिशेल बौंकोसोन ने उनकी मदद की। हालांकि इसमें एक महीने का वक्त लगा।

न्यूयॉर्क शहर में, खासकर कुछ अप्रवासी और अल्पसंख्यक इलाकों में वैक्सीनेशन के प्रयास कम हो गए हैं। इसके बावजूद भी एशियन अमेरिकन समुदाय के लोग सबसे ज्यादा वैक्सीन लगवाने के लिए आ रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, करीब 60 से 80 फीसदी वयस्क एशियाई जनसंख्या, जो करीब 6.80 लाख लोग होते हैं, ने पहला डोज ले लिया है। दूसरा बड़ा आंकड़ा श्वेत वयस्कों का है, जिनमें 49 फीसदी ने टीके की पहली डोज ली है।

चाइनीज अमेरिकन प्लानिंग काउंसिल के चीफ पॉलिसी ऑफिसर कार्लेन कोवेन कहते हैं-’ये आंकडे देख मैं चकित था, क्योंकि इससे पहले ये कभी नहीं हुआ।’ हालांकि कोवेन के मुताबिक, अभी भी कई ऐसे एशियाई बुजुर्ग हैं, जिन्हें वैक्सीन नहीं लगी है क्योंकि वे हिंसा के डर के चलते घर से बाहर नहीं निकलना चाहते। लेकिन हम कोशिश कर रहे हैं। कोवेन के मुताबिक, एशियाई मूल के लोगों के साथ हुई हिंसक घटनाओं ने आंकड़े कम किए हैं।

वैक्सीन के बदले 100 डॉलर चाहते हैं अमेरिकी

एक सर्वे के मुताबिक, अमेरिकी चाहते हैं कि उन्हें वैक्सीन लगवाने के बदले इंसेंटिव मिले। वैक्सीन का एक भी डोज नहीं लिए करीब 7249 लोगों में 34% ने कहा कि अगर उन्हें 100 डॉलर (7500 रुपए) इंसेंटिव मिले, तो वे वैक्सीन जरूर लगवाएंगे। जबकि 31% 50 डॉलर में खुश हैं। वहीं 28% ऐसे हैं जो 25 डॉलर से खुश हैं। दूसरी ओर, 62% श्वेत और 53% रिपब्लिकन ऐसे हैं जो मास्क नहीं पहनना चाहते, वहीं 35% इसे अभी भी जरूरी मानते हैं।

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