एशियाई बुजुर्ग डांसिंग क्लास जा रहे:युवा थे तो अपने शौक बच्चों पर कुर्बान किए...अब जी रहे

वॉशिंगटन4 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

सिर पर सफेद बाल, चेहरे पर झुर्रियां और थोड़ी झुकी हुई काया। अमेरिका के हर छोटे-बड़े शहर के बॉलरूम डांसिंग क्लासेस में रिटायर हो चुके एशियाई मूल के अमेरिकी जोड़े नाचते नजर आ रहे हैं। उन्हें यूं साथ में नाचते देख उनके बच्चे भी हैरत में हैं। जिंदगी भर एक नए देश में बसने की जद्दोजहद और बच्चों को काबिल बनाने की भागदौड़ में ये लोग अपनी जिंदगी की खुशियों को कुर्बान करते रहे।

अमेरिकी मूल के उनके साथी जब पार्टियां और घूमना-फिरना करते थे, ये एशियाई अपने परिवार का भविष्य संवारने पर केंद्रित रहे। लेकिन अब जब बच्चे अपने पैरों पर खड़े हो गए हैं और ये रिटायर, तो जिंदगी को नाच-गाकर जीने का आनंद ले रहे हैं। अमेरिका के बॉलरूम डांसिंग क्लासेस इनके आपस में मिलने-जुलने के सेंटर बन गए हैं। इसकी वजह से इनका अकेलापन दूर हो रहा है।

परिवर्तन से बच्चे हैरत में हैं
अमेरिकी-एशियाई इन बुजुर्गों के बच्चे इस परिवर्तन से चर्कित हैं और खुश भी। ऐसे ही एक युवा कहते हैं- मेरे पिता ने फोन पर बताया कि मां और उन्होंने डांस क्लास जॉइन किया है तो मैं दंग रह गया। मैंने उन्हें शायद ही कभी डांस करते हुए देखा। मेरे पिता बहुत उत्साहित थे। उन्होंने कहा- मैं जल्दी थक जाता हूं, लेकिन तुम्हारी मां नहीं। मैं और बेहतर करने की कोशिश करूंगा।

ऑरेंज काउंटी में रह रहे मेरे मां-पिता ही नहीं, टेक्सास में रहने वाले मेरे चाचा-चाची भी बॉलरूम डांसिंग क्लास जाते हैं। हमारे माता-पिता की पीढ़ी भी बदल रही है। उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। वे ज्यादा सहज हुए हैं और अब ये नहीं सोचते कि लोग क्या सोचेंगे। हमें अच्छा लगता है कि वे खुशी से अपनी जिंदगी जी रहे हैं।

जब भी हम उनसे पूछते कि उन्होंने अपने लिए कुछ क्यों नहीं किया। तो वे कहते हमें आगे बढ़ते देखना ही उनके लिए सब कुछ है। अब हम लोगों के भी बच्चे हैं, तो हम माता-पिता के रूप में समझ सकते हैं कि उन्होंने बच्चों के लिए कितनी बड़ा त्याग किया।

मॉनेटरी पार्क वारदात में मारे गए सभी एशियन-अमेरिकन
मॉनेटरी पार्क के बॉलरूम डांसिंग क्लास में बुधवार को हुई गोलीबारी में 11 लोगों की मौत हो गई। ये सभी एशियन-अमेरिकन थे, जिनकी उम्र 56 से 76 साल के बीच है। ये यहां लूनर न्यू ईयर मनाने इकट्‌ठा हुए थे। इस वारदात से एशियाई-अमेरिकी बुजुर्गों की सुरक्षा पर सवाल खड़ा हो गया है।