रिटायर होने जा रहे PAK आर्मी चीफ का पैगाम:जनरल बाजवा बोले- सियासत से दूरी जरूरी, इससे फौज को इज्जत मिलेगी

इस्लामाबाद2 महीने पहले

पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा मंगलवार को रिटायर होने जा रहे हैं। कल एक प्रोग्राम के दौरान बाजवा नए आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर को चार्ज सौंप देंगे।

पद छोड़ने से पहले बाजवा ने फौज को एक अहम पैगाम दिया। कहा- मुल्क के 70 साल के इतिहास में पहली बार हमने सियासत से दूरी बनाने का फैसला किया है। मेरा मानना है कि इससे फौज को इज्जत मिलेगी और उसका सम्मान बढ़ेगा। यह जरूर है कि कुछ लोग इससे काफी नाराज हैं। बाजवा का इशारा पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) की तरफ है।

जनरल बाजवा का यह काफी पुराना फोटो है। इसमें बाजवा पत्नी आयशा और दो बेटों के साथ नजर आ रहे हैं।
जनरल बाजवा का यह काफी पुराना फोटो है। इसमें बाजवा पत्नी आयशा और दो बेटों के साथ नजर आ रहे हैं।

हमें अपनी गलतियों का अहसास
जनरल बाजवा ने रिटायरमेंट के ठीक पहले UAE के अखबार ‘गल्फ न्यूज’ को एक इंटरव्यू दिया। फौज और पाकिस्तान के मौजूदा हालात से जुड़े अहम सवालों के जवाब दिए। कहा- मुझे ये मानने में कोई गुरेज नहीं कि पाकिस्तान के तमाम फैसलों में फौज का अहम रोल रहा है। इतिहास गवाह है कि फौज का सियासत में दखल रहा। शायद यही वजह है कि हमें एक इदारे (विभाग) के तौर पर कई बार कड़ी आलोचना का भी शिकार होना पड़ा।

बाजवा ने आगे कहा- अब हमने फैसला कर लिया है कि फौज हर हाल में सियासत से दूर रहेगी। इससे लोकतंत्र मजबूत होगा और इससे भी बड़ी बात यह होगी कि सेना को मुल्क में इज्जत मिलेगी और इसमें इजाफा होगा। हर फौजी भी तो यही चाहता है।

बाजवा और पत्नी आयशा की प्रॉपर्टी को लेकर काफी सवाल उठ रहे हैं। महज 6 साल में आयशा 0 से 250 करोड़ रुपए की मालकिन हो गईं। ये सरकारी आंकड़ा है।
बाजवा और पत्नी आयशा की प्रॉपर्टी को लेकर काफी सवाल उठ रहे हैं। महज 6 साल में आयशा 0 से 250 करोड़ रुपए की मालकिन हो गईं। ये सरकारी आंकड़ा है।

कुछ लोगों को दिक्कत होगी

  • 2018 में इमरान खान को फौज ही सत्ता में लाई थी और फौज की वजह से ही उन्हें अप्रैल में कुर्सी छोड़नी पड़ी। जनरल बाजवा ने इस इंटरव्यू में खान का नाम तो नहीं लिया, लेकिन इशारों में साफ कर दिया कि वो किन लोगों के बारे में मैसेज दे रहे हैं।
  • बाजवा ने कहा- एक इंस्टीट्यूशन के तौर पर हमने सियासत से अलग रहने का जो फैसला किया है, उससे कुछ लोगों को परेशानी हो रही है। ये हम भी जानते हैं, लेकिन मुल्क में जम्हूरियत (लोकतंत्र) को मजबूत करने के लिए यह कदम उठाना बेहद जरूरी था। कुछ लोगों को यह पसंद नहीं आ रहा है, लेकिन इससे परेशान होने की जरूरत नहीं है। आखिर हमें फौज से असल काम लेना है। उसे मुल्क की हिफाजत करनी है।
  • बाजवा ने कहा- कुछ लोग हमारे फैसले का विरोध कर रहे हैं, लेकिन इससे फर्क नहीं पड़ता। मुझे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर गलत कहा जा रहा है। ये चीजें कुछ दिन में थम जाएंगी और इसका फायदा हमारी सेना होगा। राजनीतिक स्थिरता आएगी। अवाम और फौज के रिश्ते मजबूत होंगे।
पाकिस्तान में कई दूसरे जनरलों की तरह बाजवा के दोनों बेटे भी अमेरिका में सैटल हैं। कहा जाता है कि दोनों के पास दोहरी नागरिकता है।
पाकिस्तान में कई दूसरे जनरलों की तरह बाजवा के दोनों बेटे भी अमेरिका में सैटल हैं। कहा जाता है कि दोनों के पास दोहरी नागरिकता है।

भारत का जिक्र नहीं
दो साल पहले जनरल बाजवा ने एक सरकारी कार्यक्रम में तब के प्रधानमंत्री इमरान खान को सुझाव दिया था कि वो भारत से रिश्ते सुधारें और उससे कारोबार शुरू करें, क्योंकि इससे पाकिस्तान को बहुत फायदा होगा। इस इंटरव्यू में बाजवा ने भारत का नाम तो नहीं लिया, लेकिन चीन के साथ ईरान और अफगानिस्तान पर राय दी। कहा- इन मुल्कों से पाकिस्तान को रिश्ते सुधारना होंगे।

बाजवा ने कहा- साउथ एशिया में दो पावर सेंटर बन गए हैं। एक चीन है। अफगानिस्तान और ईरान बॉर्डर पर भी हमें दिक्कतें हैं। इनसे निपटना होगा। गल्फ कंट्रीज ने हर मुश्किल वक्त में पाकिस्तान की मदद की है और इसमें मिलिट्री का भी बड़ा हिस्सा रहा है।

फेयरवेल स्पीच में भी यही कहा था
बाजवा ने बुधवार को फेयरवेल स्पीच दी थी। इस भाषण में साफगोई दिखाते हुए माना था कि मुल्क की सियासत में फौज 70 साल से दखलंदाजी करती रही है, लेकिन अब नहीं करेगी।
61 साल के बाजवा ने सियासतदानों और खासतौर पर इमरान खान को बिना नाम लिए नसीहत दी था। कहा था- ये बहुत जरूरी है कि फौज के बारे में बोलते वक्त सलीके से शब्दों का चुनाव किया जाए। बाजवा के मुताबिक- हालिया महीनों में जिस तरह की जुबान का इस्तेमाल फौज के लिए किया गया है, वो बहुत गलत और दुख देने वाला है।

अक्टूबर 2018 में बाजवा के बेटे की शादी हुई थी। तब बहू मनहूर साबिर के पास पर्सनल एसेट्स नहीं थे। 1 हफ्ते बाद ही नवंबर में उनकी घोषित संपत्ति 120 करोड़ रुपए हो गई।
अक्टूबर 2018 में बाजवा के बेटे की शादी हुई थी। तब बहू मनहूर साबिर के पास पर्सनल एसेट्स नहीं थे। 1 हफ्ते बाद ही नवंबर में उनकी घोषित संपत्ति 120 करोड़ रुपए हो गई।

इमरान ही टारगेट पर

  • अप्रैल में सत्ता खोने वाले इमरान और उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने फौज और इसके चीफ जनरल बाजवा को हर पब्लिक प्लेटफॉर्म से एक तरह से गालियां ही दीं। खान फौज के समर्थन से ही सत्ता में आए थे और जब हर मोर्चे पर नाकाम रहे तो फौज ने समर्थन देना बंद कर दिया। खान की सरकार गिर गई। इसके बाद से ही इमरान जनरल बाजवा के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
  • खान ने बाजवा को न्यूट्रूल, गद्दार, देशद्रोही और जानवर तक कह दिया। हालांकि, कभी सीधे तौर पर नाम कभी नहीं लिया। बाजवा ने इसका जिक्र किया। कहा- नई सरकार को इम्पोर्टेड और सिलेक्टेड कहा जा रहा है। हमें क्या-क्या नहीं कहा गया। ये बंद होना चाहिए।
  • बाजवा ने कहा- बतौर आर्मी चीफ मैं आज आखिरी बार देश से बात कर रहा हूं। फौज का 70 साल तक सियासत में दखल रहा। पिछले साल फरवरी में हमने तय किया कि अब हम सियासी मामलों से दूर रहेंगे। मेरे जाने के बाद भी यह सिलसिला जारी रहेगा।