• Hindi News
  • International
  • Attention! Children Have Up To 15 Times More Microplastic Than Adults, Don't Let Them Chew Dolls And Teethers

स्टडी में खुलासा:सावधान! बच्चों में वयस्कों से 15 गुना तक अधिक माइक्रोप्लास्टिक, उन्हें डॉल्स और टीथर्स चबाने न दें

लंदन4 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
बच्चों को टीथर्स या फिर प्लास्टिक की डॉल्स न चबाने दें, क्योंकि ये शरीर से निकलते नहीं हैं। - Dainik Bhaskar
बच्चों को टीथर्स या फिर प्लास्टिक की डॉल्स न चबाने दें, क्योंकि ये शरीर से निकलते नहीं हैं।

छोटे बच्चों के दांत निकल रहे हैं, इनको चबाने के लिए टीथर्स या फिर प्लास्टिक की डॉल्स दे दो। जी हां, घरों में बातें अक्सर सुनाई देती हैं। सावधान! ऐसा करना बहुत खतरनाक साबित हो सकता है। एक शोध में सामने आया है कि बच्चों के शरीर में वयस्कों से 15 गुना अधिक माइक्रोप्लास्टिक पाए जाते हैं। माइक्रोप्लास्टिक वो छोटे प्लास्टिक कण होते हैं, जिनकी मोटाई पांच एमएम से कम होती है। ये कण घरेलू सिन्थेटिक कारपेट और यहां तक कि सिन्थेटिक कपड़ों से भी निकलते हैं। कुछ कण तो इतने छोटे हैं कि वे दिखाई भी नहीं देते हैं।

बच्चों के शरीर में ये ज्यादा पाए जाते हैं क्योंकि बच्चों में अक्सर चीजों को मुंह में डालने की आदत होती है। साथ ही अभिभावक भी बच्चों को प्लास्टिक की चीजें खेलने के लिए देते हैं। और ताे और प्लास्टिक की निप्पल भी चूसने के लिए थमा देते हैं। घरेलू माइक्रो प्लास्टिक पॉलिथीन टेराफ्लेट (पीईटी) और पॉलिकार्बोनेट (पीसी) होता है। अमेरिका में हर 10 में से 6 बच्चों में माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा अधिक पाई गई है।

कैसे मिले माइक्रोप्लास्टिक से मुक्ति
ड्यूक यूनिवर्सिटी के शोध के अनुसार माइक्रोप्लास्टिक के अंश मछलियों में भी पाए गए हैं। ये मछलियों पर बुरा असर डालते हैं। माइक्रोप्लास्टिक का उत्पादन कम करने जाने से ही इससे निजात मिल सकती है। सिंथेटिक फाइबर के इस्तेमाल और इसके खरीद में भी कमी लाई जानी चाहिए।

माइक्रोप्लास्टिक से स्वास्थ्य पर कैसे बढ़ता है खतरा?
वैज्ञानिकों मानते कि माइक्रोप्लास्टिक शरीर से निकल जाते हैं। लेकिन अब शोध में सामने आया है कि ये शरीर से निकलते नहीं हैं। इससे शरीर में जलन और पाचन तंत्र भी गड़बड़ाता है। लैब में जानवरों पर किए प्रयोगों से पता चला कि कुछ मामलों में काेशिकाओं में संक्रमण के कारण मृत्यु भी हो जाती है।