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  • Bank Transfers Principal Instead Of Interest, Refund Of Rs 3700 Crore Stalled; Court Said Bank Does Not Have The Right To Recover

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क्लर्क की गलती से अरबों का नुकसान:बैंक ने ब्याज की जगह ट्रांसफर कर दिया मूलधन, 3700 करोड़ की वापसी अटकी; कोर्ट ने कहा- बैंक को वसूली का हक नहीं

9 दिन पहलेलेखक: एंड्रयू रॉस सॉर्किन, जैसॉन कैराएन
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न्यूयॉर्क की कोर्ट ने फैसला दिया है कि बैंक पैसा वापस नहीं ले सकता। - Dainik Bhaskar
न्यूयॉर्क की कोर्ट ने फैसला दिया है कि बैंक पैसा वापस नहीं ले सकता।
  • अमेरिका के सिटी बैंक का मामला, क्लर्क ने गलती से 6,660 करोड़ रुपए ट्रांसफर कर दिए थे

क्लर्क की गलती से अमेरिका की वैश्विक बैंकिंग फर्म सिटी बैंक को अरबों रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। पिछले साल क्लर्क ने गलती से कुछ खातों में रुपए ट्रांसफर कर दिए थे। बैंक ने काफी प्रयास किए, पैसे वापस नहीं आए तो उसने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

न्यूयॉर्क की फेडरल कोर्ट ने इसे बैंकिंग इतिहास की सबसे बड़ी चूक में से एक बताते हुए फैसला दिया है कि बैंक वह पैसा वापस नहीं ले सकता। घटना अगस्त 2020 की है। कॉस्मेटिक कंपनी रेवलॉन ने कुछ वित्तीय कंपनियों से 2016 में 7 साल के लिए टर्म लोन लिया था। कंपनी की लोन एजेंट सिटी बैंक है। बैंक को लोन के ब्याज के रूप में 59 करोड़ रुपए (8 मिलियन डॉलर) वित्तीय कंपनियों को देने थे।

चूकवश ब्याज की जगह मूलधन की राशि 6,660 करोड़ रुपए (900 मिलियन डॉलर) ट्रांसफर हो गई। बैंक ने गलती मानी, तो कुछ कर्जदाताओं ने 2,960 करोड़ रुपए (400 मिलियन डॉलर) लौटा दिए, लेकिन 10 कंपनियों ने 3,700 करोड़ रुपए (500 मिलियन डॉलर) नहीं लौटाए। बुधवार को फेडरल जज जेसी एम फरमैन ने फैसला दिया, ‘कंपनियां यह रकम रख सकती हैं।’

कोर्ट ने इस केस को अपवाद बताते हुए कहा कि यदि व्यक्ति या कंपनी कोई राशि पाने का अधिकार रखती है तो गलती से भेजे जाने के बावजूद वे वह राशि रख सकती हैं। दरअसल कर्जदाता कंपनियों ने तर्क दिया था कि उन्हें तो लगा था कि सिटी बैंक प्रीपेमेंट कर रहा है। कोर्ट ने यह भी कहा कि कर्जदाता यह कभी नहीं सोचेगा कि पैसा बैंक की गलती से आया है।

यह लेनदेन गलती से हुआ तो बैंक ने तुरंत कदम क्यों नहीं उठाया। एक दिन बाद नोटिस जारी किए। बैंक कर्मचारियों के मोबाइल की चर्चा को आधार बनाकर जज ने कहा कि इससे लगता है कि चूक इरादतन थी। गलती की जानकारी पर कर्मचारी एक-दूसरे का मजाक बनाते रहे, लेकिन बैंक ने कदम नहीं उठाया।

सिक्स आई सिस्टम से निगरानी, भारतीय टेक कंपनी के कर्मचारी भी जुड़े

बैंक में ऑनलाइन ट्रांसफर तीन स्टेप में होता था। इसे सिक्स आई सिस्टम कहा जाता है। पहले स्टेप में एक कर्मचारी राशि फ्लेक्सक्यूब प्रोग्राम में डालता था। बैंक के अधिकतर प्रोग्राम भारतीय टेक फर्म विप्रो ने बनाए हैं। दूसरी स्टेप में विप्रो का कर्मचारी चेक करता था। तीसरी स्टेप में बैंक कर्मचारी अप्रूव करता था। इस मामले में अप्रूवर विनी फ्राटा नामक महिला थी।

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