स्पेन / 137 साल से निर्माणाधीन ला सग्रादा चर्च 2026 में पूरा होगा, यह समय ताज महल और गीजा के पिरामिड से ज्यादा



ला सग्रादा फैमिलिया ला सग्रादा फैमिलिया
La Sagrada Familia welcomes roughly 4 million visitors each year
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ला सग्रादा फैमिलियाला सग्रादा फैमिलिया
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  • सग्रादा बार्सिलोना का सबसे ऊंचा चर्च, इसे देखने के लिए हर साल 40 लाख पर्यटक आते हैं 
  • बनने के बाद यह दुनिया का सबसे ऊंचा चर्च कहलाएगा

Dainik Bhaskar

Jul 19, 2019, 01:19 PM IST

बार्सिलोना. स्पेन का ला सग्रादा फैमिलिया चर्च पिछले 137 साल से निर्माणाधीन है। इसे बनाने का काम 1882 से शुरू हुआ था। ऐसा कहा जा रहा है कि यह 2026 में बनकर तैयार हो जाएगा। फिर भी इसे देखने के लिए हर साल 40 लाख पर्यटक आते हैं।

 

स्पेन का सबसे प्रसिद्ध स्थल होने के साथ ही यह बार्सिलोना का सबसे बड़ा निर्माणाधीन रोमन कैथोलिक चर्च है। इसे स्पेनिश आर्किटेक्ट एंटोनी गौदी के तैयार किए प्रोजेक्ट मैप के अनुसार पूरा हो रहा है। बनने के बाद यह दुनिया का सबसे ऊंचा चर्च कहलाएगा। स्पेन के मीडिया के मुताबिक, इसकी लंबाई करीब 295 फीट, चौड़ाई 196 फीट है, वहीं ऊंचाई 564 फीट तक हो सकती है।

 

चर्च के ऊपरी भाग में काम जारी

इसके निर्माण में लगने वाला समय ताज महल (20 साल) और गीजा के पिरामिड (30 साल) के बनने में लगे समय से ज्यादा है। नवम्बर 2010 में पोप बेनेडिक्ट सोहवें ने इसे गिरजाघर के रूप में घोषित किया था। फिर इसे लोगों के खुलवा दिया था। फिलहाल इसके ग्रेनाइट और स्टील से बने 400 पैनल तैयार हो गए हैं। इसके ऊपरी भाग में अभी भी काम जारी है। 

 

सग्रादा फैमिलिया बनाने का आइडिया लोजानो का था

 

  • पहली बार जब सग्रादा को बनाने का विचार आया तब गौदी पहले आर्किटेक्ट नहीं थे। प्रोजक्ट के पहले आर्किटेक्ट फ्रांसिस्को डी पाउला डेल विलार वाई लोजानो थे।
  • सग्रादा को नियो-गॉथिक स्टाइल (गोलाई वाले लंबे गुंबदों) में बनाने का मूल विचार उन्हीं का था। हालांकि, सग्रादा ने फंड देने वाले व्यक्ति से विचार नहीं मिलने के बाद काम छोड़ दिया था।  

 

इसलिए समय सीमा 2026 तय की गई
लोजानो के बाद 1983 से गौदी की देखरेख में सग्रादा का घंटा घर टॉवर) बना। हालांकि, 1926 में एक दुर्घटना में गौदी की मौत हो गई। 1936 से लेकर 1950 तक इसके काम की गति मंद रही, लेकिन गौदी ने अपने जीवन के आखिरी दिनों में सग्रादा के लिए ऐसी योजना बनाई थी, जो बाद के वास्तुकारों के लिए मददगार साबित हुई। पहले इस प्रोजेक्ट को 2010 में पूरा होना था, लेकिन बाद 2026 की समय सीमा तय की गई। कारण, 2026 में गौदी की 100वीं डेथ एनिवर्सरी होगी। प्रबंधन चाहता है कि सग्रादा के साथ दुनिया को मास्टरपीस देने वाले गौदी को भी लोग याद करें।

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