जर्मनी / लोगों को घर मिल सके, इसलिए बर्लिन में 5 साल के लिए किराया बढ़ाने पर प्रतिबंध लगाया



प्रतीकात्मक फोटो। प्रतीकात्मक फोटो।
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प्रतीकात्मक फोटो।प्रतीकात्मक फोटो।

  • बर्लिन में फिलहाल दो बेडरूम वाले अपार्टमेंट का किराया करीब सवा लाख रुपए महीना
  • कानून जनवरी 2020 से प्रभावी होना था, लेकिन इसे 18 जून लागू किया गया 

Dainik Bhaskar

Jun 20, 2019, 08:06 AM IST

बर्लिन. लोगों को रहने के लिए सस्ता घर मिल सके, इसके लिए बर्लिन में 5 साल तक किराया बढ़ाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। नया कानून जनवरी 2020 से प्रभावी होना था, लेकिन एहतियात के तौर पर इसे 18 जून से ही लागू कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि नया कानून तत्काल लागू नहीं किया गया तो मकान मालिकों में किराया बढ़ाने की होड़ शुरू हो जाएगी। पहले से ही परेशान लोगों को और ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। 
 

प्राइवेट प्रॉपर्टीज से जुड़ी कंपनियों के शेयर गिरे

  1. नए कानून के लागू होते ही प्राइवेट प्रॉपर्टी से जुड़ी कंपनियों के शेयर औंधे मुंह गिर गए हैं। ग्रेंड सिटी प्रॉपर्टीज का शेयर 0.8% नीचे आ गया, जबकि डच वोहेन का शेयर 1.25% तक लुढ़क गया। डच वोहेन के प्रमुख मिखेल जेन ने उन निवेशकों से बात के दौरान उन आशंकाओं को खारिज किया, जिसमें आशंका जताई जा रही थी कि उनकी संपत्तियां जब्त हो सकती हैं।

  2. चांसलर एंजेला मर्केल को लोगों ने चेतावनी दी थी

    आंदोलन कर रहे लोगों की मांग है कि सरकार उन 2.5 लाख प्रॉपर्टीज को अपने कब्जे में ले, जिनका संचालन कॉरपोरेट कंपनियां कर रही हैं। जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल पिछले हफ्ते उन कार्यकर्ताओं से मिली थीं, जो किराया बढ़ाने का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना था कि बर्लिन में बहुत कम लोगों के पास अपने मकान हैं।

  3. मीटिंग के दौरान जर्मन टेनेंट एसोसिएशन के प्रमुख फ्रेंजजार्ज रिप्स ने मर्केल को चेतावनी दी थी कि लोगों का विश्वास सरकार से उठता जा रहा है। उन्हें किराए पर अंकुश लगाने के लिए कोई ठोस कदम उठाना होगा। लोगों को यकीन दिलाया गया था कि मकानों के किराए पर अंकुश लगाने के लिए कोई कानून बनाने पर सरकार विचार करेगी।

  4. 2008 के बाद किराए तेजी से बढ़े

    1990 में पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी के एक होने के बाद यहां विद्यार्थियों को सस्ती दरों पर मकान उपलब्ध थे, लेकिन 2008 के बाद से स्थिति बेकाबू हो गई। तब से लेकर 2019 तक किराए दोगुने से ज्यादा हो चुके हैं। यूरोप से भारी तादाद में लोग जर्मनी में आ रहे हैं। इसी वजह से मकान मालिक किराया बढ़ाने से गुरेज नहीं कर रहे। 

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