भास्कर इंडेप्थ:मास्क से सांस लेने वाली हवा में कार्बन डाइऑक्साइड नहीं बढ़ती, अमेरिकन एक्सपर्ट्स की स्टडी

4 महीने पहले
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कोरोना में कई जानकारियों आ रही हैं। कुछ तो बगैर तथ्य और कही-सुनी बातों के आधार पर होती हैं। यह भी अफवाह है कि लंबे समय तक मास्क लगाने से सांस लेने वाली हवा में कार्बन डाइऑक्साइड, यानी CO2 का स्तर बढ़ जाता है। मास्क पहनने को लेकर अमेरिकी विशेषज्ञों ने ऐसी गलतफहमियों से जुड़े सवालों को दूर किया...

संक्रमण के खिलाफ मास्क कैसे काम आता है?
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि कोरोना से बचाव के लिए मास्क सबसे पहला हथियार है। मास्क किसी भी संक्रमित के संपर्क में आने पर हवा की बूंदों, यानी ड्रॉपलेट्स को रोककर संक्रमण से बचाता है। यही वजह है कि दुनियाभर में सार्वजनिक स्थानों पर मास्क लगाना अनिवार्य किया जा चुका है।

कोरोना से बचाव के लिए सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनना जरूरी किया जा चुका है।
कोरोना से बचाव के लिए सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनना जरूरी किया जा चुका है।

CO2 और मास्क के बारे में विशेषज्ञ क्या कहते है?
CDC का कहना है कि मास्क पहनने से आप जिस हवा में सांस लेते हैं, उसमें कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर नहीं बढ़ता है। कपड़े का मास्क और सर्जिकल मास्क चेहरे पर एयरटाइट फिट प्रदान नहीं करते हैं। जब आप सांस छोड़ते हैं या बात करते हैं तो CO2 मास्क के माध्यम से हवा में निकल जाती है। CO2 के अणु इतने छोटे होते हैं कि आसानी से मास्क सामग्री से गुजर सकते हैं। वहीं, सांस से निकलने वाली बूंदें जो वायरस ले जाती हैं, वे CO2 की तुलना में बहुत बड़ी होती हैं, इसलिए मास्क से पार नहीं हो पातीं।

मास्क कपड़े का हो या विशेषज्ञ द्वारा सुझाया गया?
हर तरह का मास्क इंफेक्शन रोकने की क्षमता रखता है, यहां तक कि कपड़े का भी। बेहतर होगा कि लोग एन-95 जैसे मास्क पहनें। विशेषज्ञ कह रहे हैं कि कपड़े का मास्क कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन को रोकने में उतना कारगर नहीं है। ऐसे में N-95 मास्क बेहतर है। यह 95% सूक्ष्मकणों को रोकता है। यह पॉलीप्रोपाइलीन फाइबर से बने होते हैं जो हवा से कोरोनावायरस को अंदर आने से रोकते हैं। ये मास्क चीन के KN-95 जैसे मास्क जितने प्रभावी हैं।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि N-95 मास्क संक्रमण से बचाव में सबसे ज्यादा असरदार है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि N-95 मास्क संक्रमण से बचाव में सबसे ज्यादा असरदार है।

N-95, KN-95 व KF-94 में क्या फर्क है?
N-95 की वायरस को रोकने की क्षमता चीन में बने केएन-95 जितनी है। वहीं दक्षिण कोरिया के KF-94 मास्क भी अच्छे हैं। कोरियाई सरकार के मुताबिक मास्क को सही ढंग से पहनें तो यह वायरस 94% तक सुरक्षा देते हैं।

ऐसे मास्क लंबे वक्त तक पहनने में परेशानी करते हैं?
ये सही है कि लंबे वक्त तक अगर एन-95 मास्क पहनते हैं, तो असहज हो सकते हैं। साथ ही यह साधारण सर्जिकल या कपड़े के मास्क की तुलना में महंगे भी होते हैं। इससे परेशानी है तो लोअर ग्रेड के फिट मास्क लगा सकते हैं।

ये मास्क सिंगल यूज ही क्यों होता है?
N-95 मास्क एक बार इस्तेमाल के बाद भूरे कागज में लपेटकर सूखने रखें। कुछ दिन बाद इनके कीटाणु मर जाएंगे, तब इनका दोबारा इस्तेमाल कर सकते हैं।

एक्सपर्ट्स:

डॉ. रोशेल वैलेंस्की, सीडीसी के डायरेक्टर
प्रो. लिंसे मार, वर्जीनिया टेक इन्वायरमेंटल इंजीनियर