• Hindi News
  • International
  • Bhaskar Interview Governor Manoj Sinha Said After Kashmir, Now Preparing For Shooting Films In Jammu

भास्कर इंटरव्यू:गवर्नर मनोज सिन्हा बोले- कश्मीर के बाद अब जम्मू में फिल्मों की शूटिंग की तैयारी

दुबई4 महीने पहलेलेखक: शानीर सिद्धीकी
  • कॉपी लिंक
फोटो- जम्मू-कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा। - Dainik Bhaskar
फोटो- जम्मू-कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा।

जम्मू-कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा हाल में यूएई की आधिकारिक यात्रा पर आए। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में निवेश के लिए कई बड़ी कंपनियों के साथ बातचीत की। पेश हैं दुबई एक्सपो में इंडिया पवैलियन में सिन्हा से बातचीत के मुख्य अंश...

दो साल में आम कश्मीरी के नजरिए से क्या बदलाव आए?
रोजगार और विकास हो रहा है। भ्रष्टाचार काबू में है। सरकारी योजनाओं का भुगतान ऑनलाइन हो रहा है। 11 हजार सरकारी नौकरियों को भरा गया है। अच्छी सड़कें और कनेक्टिविटी ने लोगों को नए अवसर दिए हैं। विमान ईंधन पर वैट को घटाने से आज 50 से अधिक फ्लाइट श्रीनगर एयरपोर्ट से उड़ान भर रही हैं। 14 लाख से अधिक टूरिस्ट केवल इस सीजन में आए हैं। होटल और फ्लाइट पूरी तरह भरे रहे, यह राज्य में नोर्मलसी का स्पष्ट संकेत है। अब अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट कनेक्ट करने पर जोर दिया जाएगा।

जम्मू-कश्मीर में कब तक चुनाव की संभावना है?
देखिए चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जो यह तय करेगी। लेकिन 15 अगस्त को पीएम मोदी ने घोषणा की थी कि परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने चुनाव कराए जाएंगे। गृह मंत्री भी संसद में यही बात दोहरा चुके हैं।

जम्मू-कश्मीर में फिल्म शूटिंग का दौर कब लौटेगा?
नई फिल्म पॉलिसी 5 अगस्त 2021 को लॉन्च की जा चुकी है। अब सिंगल विंडो परमिशन मिलेगी। अब तो कई फिल्मों की शूटिंग भी शुरू हो चुकी है। नई पॉलिसी में जम्मू रीजन को भी शूटिंग लिस्ट में रखा गया है।

जम्मू-कश्मीर में निवेश में कितनी तेजी आई और कैसे?
हमने प्राइवेट लैंड पर भी इंडस्ट्री की मंजूरी दी है। 30 दिन में मंजूरी का प्रावधान है। जीएसटी में 300 फीसदी इंसेंटिव दिया है। बिजली सबसे सस्ती है। ईज ऑफ डूइंग के सारे पैरामीटर्स ऑनलाइन हैं। आजादी से पिछले 7 माह पहले तक 15000 करोड़ का निवेश आया था, पिछले 7 माह में ये 45000 करोड़ पार कर चुका है।

यूएई के साथ जम्मू-कश्मीर का निवेश का क्या रोडमैप है?
यहां की कई कंपनियां जैसे लुल ग्रुप, एम्मार और डीपी वर्ल्ड जम्मू-कश्मीर में निवेश कर रही हैं। बागवानी से जुड़ी समस्याएं कम होंगी। फल-ड्राई फ्रूट स्टोरेज से वितरण तक आसान होगा। किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार मिलेगा।
अफगान सेब के मुकाबले कश्मीरी की बिक्री कैसे बढ़े?
इस समस्या पर हम लोग काम कर रहे हैं और इस हल जल्द ही निकला जाएगा, ताकि किसानों को किसी भी प्रकार का नुकसान न हो। कश्मीरी सेब की क्वालिटी जैसा विश्व में कहीं भी नहीं है और किसानों की हितों की रक्षा की जाएगी।

खबरें और भी हैं...