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भास्कर खास:कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के कॉलेज की प्रेसिडेंट छात्राओं को सही समय पर मां बनने की अहमियत बता रहीं, इसके लिए खास सबक तैयार किए

लंदन8 दिन पहले
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खुद 45 की उम्र में IVF के जरिए मां बनी डोरोथी चाहती हैं कि लड़कियां ये गलती न दोहराएं। - Dainik Bhaskar
खुद 45 की उम्र में IVF के जरिए मां बनी डोरोथी चाहती हैं कि लड़कियां ये गलती न दोहराएं।

कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के मूर एडवर्ड्स महिला कॉलेज की नई प्रेसिडेंट डोरोथी बायर्न का कहना है कि लड़कियों को शुरू से सिखाया जाता है कि उन्हें स्कूल में अच्छा प्रदर्शन करना है। बड़ी डिग्रियां लेनी हैं। पर यह कोई नहीं कहता कि समय पर परिवार और बच्चे भी जरूरी हैं।

चैनल4 न्यूज में प्रमुख रह चुकी बार्यन ने छात्राओं के लिए फर्टिलिटी लेसन तैयार किए हैं, वो चाहती हैं कि लड़कियां मां बनने का फैसला सही वक्त पर लें। खुद 45 की उम्र में मातृत्व हासिल करने के अपने अनुभव के जरिए वो देरी से मातृत्व के नुकसान बताती हैं। ब्रिटेन में जन्मदर घटती जा रही है, इसलिए वो लड़कियों को जागरूक कर रही हैं। पढ़िए उनकी इस पहल के बारे में...

30 की उम्र तक मां बनने का फैसला ले लें तो बेहतर: बायर्न
​​​​​​​मैंने जब अपनी बेटी को जन्म दिया तब मैं 45 साल की हो चुकी थी। सिंगल वुमन होते हुए आईवीएफ के जरिए बच्चे को जन्म देना कितना संघर्षपूर्ण हो सकता है, यह मुझ जैसी महिला ही समझ सकती है। आज मैं उम्र के उतार पर हूं। पर मेरी बेटी अभी 24 साल की ही हुई है। मैं यह सब इसलिए बता रही हूं कि देरी से मां बनने का फैसला लेना महिला के लिए और उनके बच्चों के लिए भी कितना परेशानी भरा हो सकता है।

दरअसल लड़कियों को शुरू से यही बात सिखाई जाती है कि उन्हें अच्छा दिखना है, बेहतर पढ़ना है। मुझसे भी परिवार की यही अपेक्षा थी। फिर टीवी करियर के लिए मैंने अपने पारिवारिक जीवन पर ध्यान ही नहीं दिया। पता ही नहीं चला कि मां बनने की उम्र निकली जा रही है। यह सोचने में ही नहीं आया कि कब परिवार शुरू करना है। एक सफल करियर के लिए कम उम्र में गर्भवती होने का जोखिम नहीं उठाना चाहती थी। बहुत सी महिलाएं ऐसा ही सोचती हैं।

पर डॉक्टर्स और शोध कहते हैं कि 35 साल के बाद महिलाओं की प्रजनन क्षमता घटने लगती है। 40 की उम्र में एग बनने बहुत कम हो जाते हैं। दवाइयों के जरिए इस स्थिति को सुधार भी लिया जाए तो उनकी गुणवत्ता कम रहती है। इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखते हुए मैंने छात्राओं के लिए खास लेसन डिजाइन किए हैं। ताकि वो इसकी अहमियत समझ सकें। इसके जरिए मैं उन्हें 35 की उम्र के बाद मां बनने के खतरों और परेशानियों के बारे में बताती हूं।

मैंने कई विशेषज्ञों से इस समस्या को समझा गहराई से है। इस आधार पर कहती हूं कि लड़कियों को 25 की उम्र से ही इस बारे में सोचना शुरू कर देना चाहिए। 35 की उम्र तक मां बनने की संभावना घटकर 15% और 40 तक तो सिर्फ एक या दो फीसदी ही रह जाती है। देरी से मां बनने में बच्चों के साथ तालमेल में भी समस्या आती है। मां बनना किसी भी महिला की जिंदगी का अहम हिस्सा है। मैं चाहती हूं कि जिम्मेदारियों और अपेक्षाओं के फेर में इसे टालने या भूलने जैसी गलतियां न करें।’ - डोरोथी बार्यन