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क्या बाइडेन ने झूठ बोला:टॉप जनरल ने कहा- राष्ट्रपति को अफगानिस्तान में ढाई हजार सैनिक रखने की सलाह दी थी, उन्होंने नहीं मानी

वॉशिंगटन2 महीने पहले
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रिपब्लिकन नेताओं ने राष्ट्रप� - Dainik Bhaskar
रिपब्लिकन नेताओं ने राष्ट्रप�

अफगानिस्तान से सैन्य वापसी अभियान के बाद अमेरिकी संसद ने शीर्ष सैन्य अधिकारियों से सवाल पूछे। उन्होंने संसद को बताया कि बाइडेन को अफगानिस्तान में 2,500 सैनिक बनाए रखने की सलाह दी गई थी। हालांकि, बाइडेन ने जनरल मार्क मिले और जनरल फ्रैंक मैकेंजी की बात नहीं मानी और बाद में इसे माना भी नहीं। अब सवाल उठ रहा है कि क्या बाइडेन ने संसद से झूठ बोला।

संसद की सैन्य समिति ने मंगलवार को डिफेंस सेक्रेटरी लॉयड ऑस्टिन के साथ दोनों जनरलों से सवाल पूछे। इन्होंने रिपब्लिकन सीनेटर्स को बताया कि बाइडेन हमारी सलाह से सहमत थे, लेकिन उन्होंने इसे नजरअंदाज किया।

व्हाइट हाउस ने कहा- राष्ट्रपति सलाह मानने के लिए बाध्य नहीं
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता जेन साकी ने कहा- बाइडेन ज्वॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ और सेना की सलाह का सम्मान करते हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं कि वह हमेशा इससे सहमत ही हों। अगर अगस्त के बाद भी हमारे सैनिक वहां बने रहते तो अमेरिका और तालिबान के बीच जंग छिड़ जाती।

बाइडेन पर लगा झूठ बोलने का आरोप
विपक्षी रिपब्लिकन नेताओं ने राष्ट्रपति पर जनरलों की सलाह न मानने का आरोप लगाया है। पिछले महीने एक इंटरव्यू में बाइडेन ने कहा था- मुझे तालिबान को रोकने के लिए अमेरिकी सैनिकों को वहां रखने की कोई सलाह नहीं मिली थी। जबकि जनरल मिले और जनरल मैकेंजी ने बताया कि अफगानिस्तान में सैनिकों को रोकने की जरूरत थी।

रिपब्लिकन सीनेटर्स ने यह भी पूछा कि बाइडेन ने सभी अमेरिकी नागरिकों को निकाले जाने तक सेना को रखने का वादा क्यों किया था। हालांकि, सैन्य वापसी के हफ्तों बाद भी अफगानिस्तान में अमेरिकी नागरिक मौजूद थे। उन्होंने कहा कि बिडेन को इस तरह के आश्वासन नहीं देना चाहिए था। वह बस इतना कह सकते थे कि उन्होंने अधिकारियों की सलाह पर विचार किया, लेकिन सेना वापसी के अपने फैसले पर कायम रहे।

तालिबान के अल-कायदा से संबंध होने की जताई थी आशंका
जनरल मैकेंजी ने अमेरिकी मध्य कमान के प्रमुख के तौर पर अफगानिस्तान से सेना वापसी का नेतृत्व किया था। एक सवाल तालिबान और अलकायदा के रिश्तों को लेकर भी किया गया। इसके जवाब में जनरल मार्क ने कहा- तालिबान से यह उम्मीद करना बेमानी होगा कि वो अलकायदा से रिश्ते नहीं रखेगा। तालिबान ने अलकायदा से अपने रिश्ते नहीं तोड़े हैं।

दोनों जनरलों ने कहा- अल-कायदा की अफगानिस्तान में मौजूदगी सीधे तौर पर बाइडेन के इस संगठन का सफाया कर देने वाले बयान के खिलाफ है। जनरल मिले ने कहा - उन्होंने 2020 के अंत में एक अनुमान लगाया था कि, अफगानिस्तान से सेना की वापसी वहां की सरकार के गिरने का कारण बन सकती है। अफगानिस्तान में तालिबान के इतनी जल्द कब्जा करने से अमेरिका हैरान था।

हालात का फायदा उठा रहा अलकायदा
सितंबर के शुरू में अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन और CIA चीफ सीनेट कमेटी के सामने पेश हुए थे। इस दौरान दोनों ने इस कमेटी को बताया था कि अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद अलकायदा फिर एकजुट होने और संशाधन जुटाने की कोशिश कर रहा है। ऑस्टिन के मुताबिक, तालिबान से दोहा में हुआ एग्रीमेंट अफगान सैनिकों की हार का सबसे बड़ा कारण था।

ऑस्टिन के मुताबिक, दोहा समझौते की वजह से अफगानिस्तान के सैनिकों का हौसला पस्त हो गया और इसका फायदा सीधे तौर पर तालिबान ने उठाया।

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