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अमेरिकी संसद वापसी के फैसले की जांच करेगी:अफगािनस्तान से अराजक वापसी पर बाइडेन की जवाबदेही तय होगी, कई फैसले उन्होंने देर से लिया

वाॅशिंगटन2 महीने पहलेलेखक: ब्रायन बैनेट/डब्लू जे हेनिगन
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राष्ट्रपति के सहयोगी और डेमोक्रेटिक पार्टी अगस्त की घातक घटनाओं के बाइडेन के राजनीतिक भविष्य पर प्रभाव का भी मूल्यांकन करेंगे। - Dainik Bhaskar
राष्ट्रपति के सहयोगी और डेमोक्रेटिक पार्टी अगस्त की घातक घटनाओं के बाइडेन के राजनीतिक भविष्य पर प्रभाव का भी मूल्यांकन करेंगे।

अमेरिका की संसद अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के विवादित फैसले की जांच करेगी। इसमें राष्ट्रपति जो बाइडेन की जवाबदेही तय की जाएगी। खबरों के मुताबिक डेमोक्रेटिक पार्टी और रिपब्लिकन पार्टी अराजक वापसी की जांच के लिए तैयारियां कर रही हैं। राष्ट्रपति के सहयोगी और डेमोक्रेटिक पार्टी अगस्त की घातक घटनाओं के बाइडेन के राजनीतिक भविष्य पर प्रभाव का भी मूल्यांकन करेंगे।

बाइडेन पर अफगानिस्तान का प्रमुख बगराम हवाई अड्डा जल्द खाली करने का आरोप है। यह भी कि अमेरिकी नागरिकों और सहयोगियों को बाहर निकालने और सुरक्षा के लिए अधिक सैनिकों की तैनाती का फैसला उन्होंने देर से किया। जानकारों के मुताबिक बाइडेन सरकार के अधिकारी भी अब स्वीकार करते हैं कि बगराम से सेना की गुप्त वापसी ने तालिबान के हौसले बुलंद किए और अफगान सेना का मनोबल तोड़ दिया।

ऐसा माना जा रहा है कि पिछले छह माह में कई फैसलों के बाद हड़बड़ी में वापसी की स्थिति पैदा हुई है। पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प ने फरवरी 2020 में एक मई 2021 को अमेरिकी सैनिकों की वापसी और हजारों तालिबानी कैदियों की रिहाई का समझौता तालिबान से किया था। बाइडेन ने अप्रैल में अमेरिकी सेना की वापसी के लिए 31 अगस्त की समय सीमा तय की थी।

सेना वापसी पर सलाहकारों में मतभेद थे
बाइडेन सरकार के दो उच्च अधिकारियों के अनुसार राष्ट्रपति के उच्च सलाहकारों में सेना की वापसी पर मतभेद थे। एक महत्वपूर्ण बैठक में चर्चा हुई कि क्या ट्रम्प के समझौते पर कायम रहा जाए। तालिबान से एक मई की तारीख बढ़ाने के लिए कहा जाए या फौजों को अनिश्चितकाल तक तैनात रहने दिया जाए। बैठक में रक्षा मंत्री लायड आस्टिन, तीनों सेनाओं के संयुक्त-प्रमुख माइक मिली और बाइडेन के उच्च राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मौजूद थे।

अफगानिस्तान में तीन बार तैनात रह चुके मिली ने कहा कि देश में अराजकता रोकने के लिए सेना की मौजूदा उपस्थिति बनाए रखना जरूरी है। बावजूद अप्रैल के मध्य में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की निर्णायक बैठक में बाइडेन ने सेना को निकालने का अधिकृत फैसला कर लिया।

कड़े फैसले ले सकते हैं बाइडेन

अब बाइडेन सरकार कुछ कड़े फैसले कर सकती है। बाइडेन को इस्लामिक स्टेट खुरासान (आईएसआईएस-के) के आतंकियों की तलाश करना होगी। अफगानिस्तान में 100 से 200 के बीच अमेरिकियों और सहयोगी देशों के हजारों लोगों को बाहर निकालने के लिए अमेरिका को तालिबान पर निर्भर रहना पड़ेगा।

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