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  • Hong Kong Elections 2019 [Updates]: Pro democracy Candidates Won A Total Of 390 Out Of 452 Seats, Puts Pressure On Hong Kong Leader

चीन को बड़ा झटका, शहरी चुनाव में लोकतंत्र समर्थक उम्मीदवारों की 452 में 390 सीटों पर जीत

9 महीने पहले
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हॉन्गकॉन्ग शहरी चुनाव में जीत के बाद जश्न मनाते प्रदर्शनकारी।
  • हॉन्गकॉन्ग में पिछले 6 महीने से जारी विरोध प्रदर्शन के बीच जिला परिषद के चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से हुए
  • लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों ने मतदान में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया, 2015 के मुकाबले 24% ज्यादा वोटिंग हुई

बीजिंग. हॉन्गकॉन्ग में लोकतंत्र की मांग को लेकर पिछले 6 महीनों से जारी प्रदर्शन के बाद यह पहला हफ्ता है, जब शहर में कोई हिंसा नहीं हुई। लोकतंत्र समर्थकों ने इस हफ्ते जिला परिषद चुनाव पर ध्यान दिया। 452 सीटों के लिए हुए मतदान का नतीजा सोमवार को घोषित हुआ। इसमें लोकतंत्र समर्थक पार्टियों को 390 सीटों पर जीत मिली। वहीं, चीनी शासन को चुनाव में बड़ा झटका मिला। बीजिंग समर्थित पार्टियां सिर्फ 50 सीटों पर ही सिमट गईं। रविवार को हुए मतदान में 2015 के 14.7 लाख वोटर्स के मुकाबले इस साल 29.4 लाख लोग वोटिंग में शामिल हुए। वोटिंग का आंकड़ा 2015 के 47% के मुकाबले 71% पहुंच गया।

हॉन्गकॉन्ग के लिए नतीजे क्यों अहम?
हॉन्गकॉन्ग के जिला परिषद का चुनाव जीतने वाले काउंसलर्स (नेताओं) का राजनीति में ज्यादा दखल नहीं होता। उन पर स्थानीय मुद्दे सुलझाने की जिम्मेदारी होती है। हालांकि, इन चुनावों में जनता ने ज्यादा दिलचस्पी दिखाई। दरअसल, हॉन्गकॉन्ग में लोकतंत्र की मांग को लेकर जो प्रदर्शन हुए, उन्हें रोकने के लिए शहर की चीन समर्थित सरकार ने पुलिस बल का काफी प्रयोग किया। इसके बाद हॉन्गकॉन्ग में 6 महीने से हालत बिगड़े हैं।


जिला परिषद चुनाव पहला मौका है, जब लोगों को हॉन्गकॉन्ग की सर्वोच्च नेता (चीफ एग्जीक्यूटिव) कैरी लैम के पक्ष या विपक्ष में वोट करने का मौका मिला है। चुने गए काउंसलर्स में से 117 को उस 1200 सदस्यीय कमेटी में जगह मिलेगी, जो अगले आम चुनाव में हॉन्गकॉन्ग का सर्वोच्च नेता चुनेंगे। यानी लोकतंत्र समर्थक उम्मीदवारों के जीतने से अगली सरकार चुनने वाले अधिकारियों के बीच उनका दखल बढ़ेगा।

22 साल पहले यूके ने चीन को सौंपा था
1997 में ब्रिटेन-चीन समझौते के तहत हॉन्गकॉन्ग चीन को सौंपा गया था। इसके बाद से वहां अब तक की सबसे बड़ी राजनीतिक अस्थिरता देखी गई है। छात्र, लोकतंत्र समर्थक, धार्मिक संगठन और व्यापार प्रतिनिधि सभी लोकतंत्र की मांग को लेकर खुल कर प्रदर्शन कर रहे हैं। पहले प्रदर्शनकारी उस विधेयक का विरोध कर रहे हैं, जिसमें प्रावधान था कि अगर कोई व्यक्ति चीन में अपराध या प्रदर्शन करता है तो उसके खिलाफ हॉन्गकॉन्ग में नहीं, बल्कि चीन में मुकदमा चलाया जाएगा। विरोध प्रदर्शनों के बाद हॉन्गकॉन्ग सरकार ने विधेयक वापस ले लिया। हालांकि, इसके बावजूद प्रदर्शन नहीं थमे और लोगों ने पूर्ण लोकतंत्र की मांग को लेकर विरोध को नया मोड़ दे दिया।



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