ह्मूमन हार्ट सेल से बनाई मछली:तीन महीने जिंदा रही; स्टेम सेल टेक्नोलॉजी से बनाईं कार्डिक मसल्स, इनकी कमान मानव के हाथों में रहेगी

न्यूयॉर्क5 महीने पहले
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वैज्ञानिकों ने मशीन और मानव कोशिकाओं के सामंजस्य, यानी बायो हाईब्रिड रोबोट का रास्ता साफ कर लिया है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रो. किट पार्कर और उनकी टीम ने ह्मूमन हार्ट सेल से रोबोटिक मछली बनाने के सफल प्रयोग को अंजाम दिया है। पेपर, प्लास्टिक, जिलेटिन और हार्ट सेल की दो स्ट्रिप से मछली की आकृति बनाई गई। एक स्ट्रिप की मसल्स सिकुड़ने से दूसरी स्ट्रिप फैलती थी। इससे मछली आसानी से तरल में तैर पाती थी।

प्रो. पार्कर के अनुसार मछली का तैरना काफी लयबद्ध तरीके से होता था। तरल में पोषक तत्व डाले गए। वैज्ञानिकों का कहना था कि उन्हें मछलियों के ज्यादा दिन तक जिंदा रहने के बारे में ज्यादा भरोसा नहीं था। उन्होंने इन्क्युबेटर को बंद कर दिया। जब तीन माह के बाद उन्होंने इन्क्युबेटर को खोला तो पाया कि ये मछलियां आराम से तैर रही थीं।

वैज्ञानिकों के अनुसार ये मछलियां और भी दिन तक जिंदा रह सकती थीं। MIT की इंजीनियर रितु रमन का कहना है कि वैज्ञानिकों का ये प्रयोग बायो हाईब्रिड रोबोट का रास्ता साफ करेगा। उन्होंने कहा कि बायो रोबोट भविष्य है। हमें इससे घबराने की जरूरत नहीं है। इनकी कमान मानव के हाथों में रहेगी।

प्रयोग से पता चला कि कृत्रिम तरीके से बनाए जा सकते हैं ह्यूमन हार्ट टिश्यू
प्रो. पार्कर के अनुसार इस प्रयोग से पता चला कि कृत्रिम हार्ट टिश्यू को बनाया जा सकता है। जन्म के बाद मानव शिशु के दिल में जितनी संख्या में मांसपेशियां होती हैं वो जिंदगी भर उतनी ही रहती हैं। कोई बीमारी या हार्ट अटैक के बाद शरीर दिल की कमजोर या नष्ट मासंपेशियों को दुरुस्त नहीं कर सकता है। प्रयोग के दौरान मछली का तैरना दरअसल, दिल की कोशिकाओं का संकुचन और फैलाव था। वैज्ञानिकों ने पाया कि स्टेम सेल टेक्नोलॉजी कृत्रिम हार्ट टिश्यू को बनाने में कारगर साबित हुई है।