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18 साल जेल में बिताने के बाद रिहा हुआ आरोपी, सुप्रीम कोर्ट ने सबूतों के अभाव में बरी किया

एक वर्ष पहले
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पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट।- फाइल फोटो
  • एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में ईश निंदा के आरोप में भीड़ ने अब तक 65 लोगों की हत्या की
  • पिछले साल ईशनिंदा कानून के तहत मौत की सजा पाने वाली आसिया बीवी को लंबा समय जेल में गुजारना पड़ा

इस्लामाबाद. ईशनिंदा कानून के तहत मौत की सजा पाने वाले आरोपी को 18 साल बाद पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने बरी कर दिया। वजिह-उल-हसन के खिलाफ 1999 में ईशनिंदा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। हसन तब से ही कोट लखपत जेल में बंद थे। 
 
पाक मीडिया के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सज्जाद अली शाह की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष आशंका को छोड़कर, तथ्यों के आधार पर यह साबित करने में विफल रहा है कि पत्र में लिखावट आरोपी की है। इस मामले में कोई प्रत्यक्ष गवाह भी नहीं है।  
 

पत्र की भाषा को ईशनिंदा करार दिया गया था
हसन के खिलाफ एक वकील को लिखे गए पत्र की भाषा को ईश-निंदा करार दिया गया था। 2001 में एक हैंडराइटिंग विशेषज्ञ ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि पत्र की लिखावट आरोपी की लिखावट से मेल खाती है। लाहौर सेशन कोर्ट ने हासन को दोषी करार दिया। उसे मौत की सजा सुनाई। लाहौर हाईकोर्ट ने भी इस आदेश को बरकरार रखा। पाकिस्तान पीनल कोड के अनुसार ईशनिंदा के लिए मृत्युदंड का प्रावधान है।
 

पाकिस्तान में ईशनिंदा संवेदनशील मुद्दा
पाकिस्तान में ईशनिंदा को एक संवेदनशील मुद्दा माना जाता है। थिंक टैंक सेंटर फॉर रिसर्च एंड सिक्युरिटी स्टडीज के अनुसार, साल 1990 से अभी तक पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोप में भीड़ ने 65 लोगों की हत्या की है। पिछले साल ईशनिंदा के कानून के तहत मौत की सजा पाने वाली देश की पहली महिला आसिया बीवी को भी सुप्रीम कोर्ट से दोषमुक्त होने से पहले, लंबा वक्त जेल में गुजारना पड़ा था।
 

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