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अफगानिस्तान में आतंकी हमला:राजधानी काबुल में गर्ल्स स्कूल के बाहर तीन धमाकों से 25 की मौत, मरने वालों में ज्यादातर स्टूडेंट

काबुल6 महीने पहले
ब्लास्ट के वक्त छात्राएं स्कूल से घर के लिए निकल रहीं थीं।

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के पश्चिमी इलाके में शनिवार शाम को एक के बाद एक तीन बम धमाके हुए। लड़कियों के एक स्कूल के पास हुए इन ब्लास्ट से कम से कम 25 जानें गई हैं। अफगान सरकार के प्रवक्ता के मुताबिक, मरने वालों में ज्यादातर लड़कियां हैं। अभी तक किसी आतंकी संगठन ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है।

घटना के वक्त स्कूल की छुट्‌टी हुई थी। इसके बाद लड़कियां स्कूल से बाहर निकल रही थीं। स्कूल के एक टीचर ने दावा किया कि पहले एक कार में धमाका हुआ। फिर दो और धमाके हुए। यह भी बताया जा रहा है कि यह रॉकेट से किया गया हमला है।

स्कूल के एक टीचर के मुताबिक, सबसे पहले एक कार में धमाका हुआ। फिर दो और धमाके हुए।
स्कूल के एक टीचर के मुताबिक, सबसे पहले एक कार में धमाका हुआ। फिर दो और धमाके हुए।

गुस्साई भीड़ ने मेडिकल स्टाफ को पीटा
इंटीरियर मिनिस्ट्री के प्रवक्ता तारिक एरियन ने कहा कि दाश्त-ए-बरची के शिया बहुसंख्यक इलाके में सैयद अल-शाहदा स्कूल के पास यह विस्फोट हुआ। इसके बाद थोड़ी ही देर में मौके पर कई एंबुलेंस पहुंच गईं।

वहीं, स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता गुलाम दस्तगीर नाजरी ने कहा कि गुस्साई भीड़ ने एंबुलेंस पर हमला किया और मेडिकल स्टाफ को भी पीटा। इसके बाद उन्होंने लोगों को सहयोग करने और एंबुलेंस को जाने देने की अपील की। एरियन और नाजरी दोनों ने कहा कि कम से कम 50 लोग घायल हो गए। इससे मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है।

अमेरिकी फौज की वापसी से हालात बिगड़ने का डर
20 साल लंबे और महंगे युद्ध के बाद अमेरिका की फौज अफगानिस्तान से अपने वतन लौट रही हैं। अल कायदा के 9/11 हमले के बाद साल 2001 में अमेरिका ने अफगानिस्तान में सेना उतारी थी। इस युद्ध में अमेरिका ने 2400 सैनिकों को खो दिया। अब देश की सुरक्षा अफगान बलों के पास है। ऐसे में देश में फिर हालात बिगड़ने का डर सताने लगा है। लोग फिर तालिबान के राज वाले दिनों के लौटने की आशंका से सहमे हुए हैं।

तालिबान अब भी सक्रिय
अफगानिस्तान में अभी अफगानी तालिबान और पाकिस्तानी तालिबान सक्रिय हैं। इसके साथ ही सीरिया का ISIS, हक्कानी ग्रुप भी पाकिस्तान संरक्षित तालिबान जैसे आंतकी संगठन को मदद करता है। हालांकि, तालिबान अब कमजोर हो गया है। अफगान की 60 फीसदी जमीन पर उसका प्रभाव है। उसके आतंकी अक्सर अफगान सेना पर हमले करते रहते हैं।