क्वॉड से ड्रैगन क्यों परेशान:चारों देशों से सीमा विवाद, भारत-जापान और ऑस्ट्रेलिया पर दबाव बनाने की कोशिश

टोक्योएक महीने पहले

मंगलवार को जापान की राजधानी टोक्यो में क्वॉड देशों के राष्ट्राध्यक्षों की बैठक हुई। क्वॉड में भारत के अलावा अमेरिका, जापान और ऑस्‍ट्रेलिया शामिल हैं। मीटिंग में कोरोना महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध के अलावा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन का दबदबा खत्म करने पर भी चर्चा हुई। सबसे ज्यादा फोकस तो चीन की दादागीरी खत्म करने पर ही रहा।

क्वॉड से चीन बहुत ज्यादा परेशान रहता है। ग्रुप में शामिल सभी देशों से किसी न किसी मुद्दे को लेकर चीन से दुश्मनी है। जब क्वॉड बनाया गया था, तभी चीन ने कहा था कि क्वॉड सीधे तौर पर चीन को निशाना बनाने के लिए बनाया गया है। हालांकि, अमेरिका ने इस पर कहा था कि क्वॉड के निशाने पर कोई देश नहीं है।

क्वॉड की स्थापना कैसे हुई?
जापान ने 2007 में क्वॉड बनाने की पहल की थी। चीन और रूस ने इसका विरोध किया था। 10 साल तक यह आइडिया रुका रहा। 2017 में इसे फिर एक्टिव किया गया। इस ग्रुप का मकसद समुद्र के रास्तों को किसी भी प्रभाव, या कहें चीन के दबाव से मुक्त कराना है। चीन हिंद-प्रशांत के तमाम ट्रेड रूट्स पर कब्जा करने के बाद वहां से निकलने वाले जहाजों से फीस वसूलना चाहता है।

क्वॉड के देशों से चीन की क्या दुश्मनी है और चीन इस ग्रुप का लगातार विरोध क्यों करता आया है? आइए समझते हैं…

भारत-चीन
भारत-चीन के बीच लद्दाख को लेकर विवाद जारी है। मई 2020 में लद्दाख में बातचीत करने गई हमारी मिलिट्री यूनिट पर चीनी सैनिकों ने धोखे से हमला कर दिया था। इसमें भारत यूनिट के कमांडिंग ऑफिसर समेत 20 सैनिक शहीद हो गए थे। गलवान वैली में 3 घंटे तक झड़प चली थी। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस झड़प में 40 से ज्यादा चीनी सैनिक भी मारे गए थे।

वैसे, लद्दाख ही नहीं बल्कि अरुणाचल प्रदेश में भी सीमा को लेकर भारत-चीन का विवाद चल रहा है। चीन भारत के हजारों किलोमीटर हिस्से पर दावा करता है, जिसके बाद से भारत-चीन के बीच टकराव जारी है। समय-समय पर इन दोनों देशों की सीमा पर टकराव की खबरें आती रहती हैं।

चीन ने गलवान में हुई झड़प में 40 के बजाय अपने 4 सैनिकों को ही शहीद माना था।
चीन ने गलवान में हुई झड़प में 40 के बजाय अपने 4 सैनिकों को ही शहीद माना था।

ऑस्ट्रेलिया और चीन
चीन और ऑस्ट्रेलिया के बीच कई मुद्दों को लेकर विवाद चलते आया है। ये 3 प्रमुख ऐसे विवाद हैं, जिनसे दोनों देशों के बीच टकराव की स्थिति बनी रहती है:-

  • अमेरिका से लेकर ऑस्ट्रेलिया और जापान से लेकर अफ्रीका के समुद्री इलाकों तक ड्रैगन की गतिविधियों से कई देश परेशान हैं। इस बीच ऑस्ट्रेलिया ने दावा किया था कि चीन उनके देश की जासूसी कर रहा है और ऑस्ट्रेलिया के पश्चिमी तट पर नजर रख रहा है।
  • नवंबर में भी इन दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था। तब ऑस्ट्रेलिया ने परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियों के अधिग्रहण के लिए संयुक्त राज्य और यूनाइटेड किंगडम के साथ एक समझौते की घोषणा की थी।
  • चीन ने हाल ही सोलोमन द्वीप के साथ एक सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस द्वीप में चीन ने पूरी प्लानिंग के तहत मिलिट्री बेस बनाया है। इसी समझौते का ऑस्ट्रेलिया विरोध कर रहा है।

जापान-चीन
चीन और जापान की दुश्मनी बहुत पुरानी है। वर्ल्ड वॉर-2 के समय यह ज्यादा बढ़ी। मौजूदा समय में भी दोनों देशों के बीच तनाव है। तनाव एक आईलैंड को लेकर है। यह है प्रशांत महासागर में जापान के दक्षिण में स्थित सेनकाकु आईलैंड। जापान इसे सेनकाकू तो चीन इसे दियाआयू नाम देता है। अभी ये आईलैंड जापान के पास है, लेकिन चीन इस पर अपना हक जताता है।

सेनकाकू आईलैंड के पास चीन के दो जहाज जापान की समुद्री सीमा में घुस गए थे।
सेनकाकू आईलैंड के पास चीन के दो जहाज जापान की समुद्री सीमा में घुस गए थे।

अमेरिका और चीन
ताइवान की सीमा में चीन लगातार घुसपैठ की कोशिश कर रहा है। इसी को लेकर अमेरिका-चीन के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडेन ने हाल ही में एक बैठक में कहा था कि अगर चीन की ओर से ताइवान पर हमला किया जाता है तो अमेरिका मिलिट्री एक्शन लेगा। उन्होंने कहा था कि ताइवान की सीमा पर घुसपैठ करके चीन खतरा मोल ले रहा है। इस पर, चीन ने पलटवार करते हुए कहा- हम अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए तैयार हैं।

वैसे चीन और अमेरिका का ट्रेड, टेक्नोलॉजी चोरी और साउथ चाइना सी समेत तमाम मुद्दों पर विवाद है। डोनाल्ड ट्रम्प तो चीन को अमेरिका का सबसे बड़ा दुश्मन बताते थे। अब बाइडेन ने एशिया में भारत को साथ लेकर चीन का मुकाबला करने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं।