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टाइम से विशेष अनुबंध के तहत:बच्चों को खुशी अच्छे कॉलेज में एडमिशन दिलवाने या नौकरी से ही नहीं मिलती; विशेषज्ञ बोले- जो है उसमें खुश रहने की कला भी सिखाएं

3 महीने पहलेलेखक: विलियम स्टिक्सरूड, नेड जॉनसन
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एक्सपर्ट्स केवल सफल करियर को खुशी नहीं मानते हैं, खुशी की और भी वजहें हैं। - Dainik Bhaskar
एक्सपर्ट्स केवल सफल करियर को खुशी नहीं मानते हैं, खुशी की और भी वजहें हैं।
  • विशेषज्ञों ने बताए जिंदगी में सच्ची खुशी हासिल करने के चार तरीके

माता-पिता से पूछें कि बच्चों के लिए क्या सोचते हैं, तो जवाब होता है-उनकी खुशी। बच्चों से पूछें कि माता-पिता उनके के लिए क्या सोचते हैं-तो वे बताते हैं, अच्छे कॉलेज में एडमिशन। ज्यादातर माता-पिता मानते हैं कि अच्छे कॉलेज में प्रवेश से बच्चों की अच्छी नौकरी-करियर का रास्ता खुल जाता है, जो उनके जिंदगी को खुशी से भर देगा। पर एक्सपर्ट्स केवल सफल करियर को खुशी नहीं मानते हैं। खुशी की और भी वजहें हैं, बच्चों को सच्ची खुशी के बारे में कैसे बता सकते हैं, एक्सपर्ट्स से समझिए...

1. बच्चों से रिश्तों के महत्व पर बात करें
अक्सर माता पिता बच्चों से करियर और सफलता के शीर्ष पर पहुंचने की बातें करते हैं। काउंसिलिंग एक्सपर्ट कैथलीन ओकॉनर कहती हैं कि बच्चों से उन रिश्तों पर बात करें, जिन्होंने आपको खुशी दी। बताएं कि आपने उन रिश्तों के लिए क्या कुछ किया। बच्चों से पूछें कि वे सबसे ज्यादा करीबी किसके साथ महसूस करते हैं? क्या वे इन रिश्तों में समय और ऊर्जा लगाना चाहेंगे।

2. खतरनाक अवधारणाएं तोड़ें
बच्चे अक्सर अपने माता-पिता की बातें सुनकर खुशी का पैमाना बनाते हैं। इन चीजों को वे अपने साथियों, शिक्षकों और माहौल से जोड़कर देखते हैं। इससे सिर्फ प्रतिस्पर्धा और वस्तुवाद को बढ़ावा मिलता है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि उनकी इन खतरनाक अवधारणाओं को तोड़ें, बच्चों को सच बताएं कि खुशी इन भौतिक चीजों से नहीं मिलती है।

3. जिंदगी को अर्थपूर्ण बनाना सिखाएं
90 के दशक से सकारात्मकता के मनोविज्ञान पर काम कर रहे मार्टिन सैलिगमेन जिंदगी के ‘उद्देश्य’ और ‘अर्थ’ को खुशी का आधार मानते हैं। कहते हैं बच्चों को बताएं कि सिर्फ पैसे कमाने से खुशी नहीं मिलती। खुश रहने के और भी तरीके हैं। जैसे कुछ बच्चों को पर्यावरण की देखभाल में खुशी मिलती है। कुछ को धर्मस्थल जाकर, कुछ को समुदाय या बुजुर्गों की मदद करके।

4.किशोरावस्था सहने का समय नहीं
शोध बताते हैं कि ‘चीजों’ से ज्यादा ‘समय’ को महत्व देना, ‘पाने’ से ज्यादा कुछ ‘देने’ और जो है उसमें संतुष्ट रहते हैं तो खुशी मिलती है। अगर बच्चा अच्छे स्कूल या कॉलेज में प्रवेश न मिलने से निराश हो, तो माता-पिता असहज नहीं होते हैं। असल में वे सोचते हैं कि भविष्य की खुशी के लिए ऐसा होना सामान्य है। पर किशोरावस्था को सिर्फ सहने का समय नहीं बनने देना चाहिए।