हिंद महासागर / भारतीय जल क्षेत्र से खदेड़े जाने पर चीन ने कहा- परीक्षण करने नहीं, पानी का उतार-चढ़ाव मापने आए थे

भारत के विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि चीनी जहाज में भारतीय समुद्र में कोई प्रयोग नहीं किए। -फाइल फोटो भारत के विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि चीनी जहाज में भारतीय समुद्र में कोई प्रयोग नहीं किए। -फाइल फोटो
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भारत के विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि चीनी जहाज में भारतीय समुद्र में कोई प्रयोग नहीं किए। -फाइल फोटोभारत के विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि चीनी जहाज में भारतीय समुद्र में कोई प्रयोग नहीं किए। -फाइल फोटो

  • चीन का जहाज अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के अंदर रिसर्च के लिए आया था: नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह
  • ‘भारतीय नौसेना ने शिप का पीछा कर भारतीय समुद्री सीमा से बाहर खदेड़ा’
  • ‘रिसर्च शिप का मकसद हिंद महासागर में पैदा होने वाली ध्वनि तरंगों की जांच करना था’

Dainik Bhaskar

Dec 07, 2019, 03:44 PM IST

बीजिंग. चीन ने शुक्रवार को कहा कि रिसर्च शिप भारत के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन- ईईजेड) अंडमान निकोबार के पास से सितंबर में गुजरा था, लेकिन वहां कोई परीक्षण नहीं किया। हमारा मकसद सिर्फ पानी का उतार-चढ़ाव मापना था। नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने मंगलवार को कहा था कि चीनी नौसैनिक जहाज को अंडमान समुद्र में विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र से खदेड़ा गया था। उन्होंने कहा था कि इस तरह की गतिविधियों से सख्ती से निपटा जाएगा।

दिल्ली में सैन्य सूत्रों ने कहा कि चीनी रिसर्च शिप शी यान-1 सितंबर में भारतीय जल क्षेत्र में नौसेना की अनुमति के बिना ही प्रवेश कर गया था। जासूसी में शामिल होने का संदेह होने के बाद उसे पीछे हटने के लिए मजबूर किया गया।

भारतीय जल क्षेत्र में कोई प्रयोग नहीं किया: चीन

चीन के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि यह साबित हो चुका है कि रिसर्च शिप ‘एक्सपेरिमेंट-1’ का मकसद हिंद महासागर के खुले क्षेत्र में पैदा होने वाली ध्वनि तरंगों की जांच और पानी के उतार-चढ़ाव को मापना था। इसने पूरी प्रक्रिया के दौरान भारतीय क्षेत्र में कोई प्रयोग नहीं किए, केवल क्षेत्र से रवाना हुआ। ये तथ्य ऑपरेशनल प्लान्स, लॉगबुक्स और जीपीएस ट्रैक से साबित होते हैं। 

2008 के बाद से हिंद महासागर क्षेत्र में चीनी की मौजूदगी बढ़ी

2008 के बाद से हिंद महासागर क्षेत्र में चीनी नौसेना की बराबर रूप से उपस्थिति दर्ज की गई है। क्षेत्र में चीन की बढ़ती उपस्थिति को लेकर भारत बेहद चिंतित है। भारत मुख्य रूप से श्रीलंका, मालदीव, इंडोनेशिया, थाईलैंड, वियतनाम, म्यांमार और सिंगापुर समेत कई देशों के साथ समुद्री सहयोग का विस्तार करने की कोशिश कर रहा है। इसका उद्देश्य मुख्य रूप से चीनी मुखरता को जांचना है।

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