ताइवान के इलाके में चीन ने फिर की घुसपैठ:एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन में घुसा चीनी एयरक्राफ्ट, पलटवार में ताइवान ने तैनात की मिसाइल

ताइपे6 महीने पहले

रूस-यूक्रेन जंग के चलते परेशान दुनिया के लिए ताइवान से चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। जानकारी के मुताबिक, चीन के एक मिलिट्री एयरक्राफ्ट ने 16 मार्च को ताइवान की हवाई सीमा का उल्लंघन करते हुए उसके एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन में घुसपैठ की। जवाब में ताइवान ने पहले रेडियो पर चेतावनी जारी की और फिर अपनी एयर डिफेंस मिसाइल तैनात कर दी। एक महीने में ताइवान के अंदर यह चीन की 12वीं घुसपैठ है। आगे बढ़ने से पहले आप पोल में हिस्सा लेकर अपनी राय दे सकते हैं...

ताइवान के मीडिया ने नेशनल डिफेंस मिनिस्ट्री के हवाले से बताया कि बुधवार को चीन का J-16 फाइटर जेट ताइवान के एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन ( ADIZ) के साउथ-वेस्ट इलाके में घुस गया था। इस महीने अब तक 38 चीनी सैन्य विमानों को ताइवान के आइडेंटिफिकेशन जोन में ट्रैक किया गया है, जिसमें 26 फाइटर जेट, 9 स्पॉटर विमान और तीन हेलीकॉप्टर शामिल हैं।

क्या होता है एयर डिफेंस जोन?
एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन किसी देश के नियंत्रण वाला वो इलाका होता है जो उसके हवाई क्षेत्र से भी आगे तक फैला रहता है। इस जोन में आने वाले विमानों के लिए एयर ट्राफिक कंट्रोलर्स से अपनी पहचान साझा करना जरूरी होता है। ग्राफिक्स से समझिए दोनों देशों की सैन्य ताकत...

जिनपिंग ताइवान पर कब्जे की बात कह चुके हैं
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पिछले साल अक्टूबर में घोषणा की थी कि ताइवान के साथ देश के मिलने का सपना जल्द पूरा होगा। इसके बाद से ही चीन अक्सर ताइवान को डराने के लिए अपने फाइटर जेट उसकी सीमा में उड़ाता रहता है।

इसलिए चीन करता है घुसपैठ
चीनी विमान आम तौर पर ताइवान के दक्षिण-पश्चिम के हवाई क्षेत्र में घुसपैठ करते हैं। 1949 में गृहयुद्ध के दौरान ताइवान और चीन अलग हो गए थे, लेकिन चीन इस द्वीप पर अपना दावा करता रहा है। नतीजतन बीजिंग ताइवान सरकार की हर कार्रवाई का विरोध करता है। ताइवान को अलग-थलग करने और डराने के लिए राजनयिक और सैन्य ताकत का इस्तेमाल करता रहता है।

2016 में ताइवान के नागरिकों द्वारा साई इंग वेन को राष्ट्रपति चुने जाने के बाद से यह तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है। साई के विचार चीन के पक्ष में थे और उन्होंने इस दावे का समर्थन किया था कि दोनों एक ही चीनी राष्ट्र का हिस्सा हैं। बाद में उनके ख्याल बदल गए। इससे चीन नाराज हो गया। बीजिंग ने ताइवान सरकार के साथ हर तरह का संपर्क तोड़ लिया था।