अमेरिका को जवाब:चीन ने कहा- वुहान लैब चीन-फ्रांसीसी कोऑपरेशन प्रोजेक्ट है; पोम्पियो एक झूठ को छुपाने के लिए कई झूठ बोल रहे

बीजिंग2 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
वुहान का इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
वुहान का इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी। (फाइल फोटो)
  • चीन की विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा- अमेरिका का दुश्मन कोरोनावायरस है चीन नहीं
  • उन्होंने कहा- डब्ल्यूएचओ वायरस की उत्पत्ति की जांच कर रहा है और हम सहयोग के लिए हमेशा तैयार हैं

चीन ने गुरुवार को कहा कि वुहान का बायो लैब एक चीनी-फ्रांसीसी कोऑपरेशन प्रोजेक्ट है। इसके स्टाफ की ट्रेनिंग भी फ्रांस में हुई है। डब्ल्यूएचओ वायरस की उत्पत्ति की जांच कर रहा है और हम सहयोग के लिए तैयार हैं। चीन की विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने गुरुवार को कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो का वुहान की लैब पर लगाया गया आरोप पूरी तरह से झूठा है।

लैब के स्टाफ की ट्रेनिंग फ्रांस में हुई
चुनयिंग ने कहा कि हो सकता है कि वे यह नहीं जानते होंगे कि पी4 वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (डब्ल्यूआईवी) चीन-फ्रांस का प्रोजेक्ट है। इसके डिजाइन निर्माण और प्रबंधन में अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन किया गया है। लैब के पहले बैच की ट्रेनिंग फ्रांस के लैब में ही हुई थी। इसके इक्विपमेंट की हर साल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त थर्ड पार्टी से जांच कराई जाती है।

पोम्पियो सबूत दिखाएं: चुनयिंग

हाल के दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और विदेश मंत्री दावा करते रहे हैं कि वायरस वुहान के लैब से आया है। वुहान में ही दिसंबर में कोरोना का पहला मामला सामने आया था। चुनयिंग ने एक बार फिर पोम्पियो से कहा कि वे सबूत दिखाएं। उन्हें यह साबित करना होगा कि कोरोनोवायरस वुहान के लैब से उत्पन्न हुआ है। उनकी बातें विरोधाभासी हैं। वे एक झूठ को छुपाने के लिए कई झूठ बोल रहे हैं।

अमेरिका को मिलकर काम करना चाहिए
ट्रम्प ने बुधवार को दावा किया था कि कोरोनावायरस, पर्ल हार्बर हमला और 1 सितंबर 2001 को हुए आतंकी हमले से भी बुरा है। इस पर चुनयिंग ने कहा कि ऐसे समय में दुश्मन कोरोनावायरस है चीन नहीं। अमेरिका को वायरस के खिलाफ चीन के साथ मिलकर काम करना चाहिए। क्योंकि, केवल ठोस प्रयासों के साथ ही हम वायरस के खिलाफ इस युद्ध को जीत सकते हैं।

उन्होंने कहा कि हम देख रहे हैं कि कुछ अमेरिकी अधिकारी आरोप ही लगा रहे हैं। चीन ने दो महीने में वायरस पर जीत हासिल कर ली, लेकिन अमेरिका इतना विकसित देश होने के बावजूद अभी तक सफल नहीं हुआ है।

हमने कभी डब्ल्यूएचओ की जांच का विरोध नहीं किया

चुनयिंग ने डब्ल्यूएचओ द्वारा कोरोनावायरस की उत्पत्ति की जांच के लिए सहमति जताई है। उन्होंने बताया कि हमने कभी डब्ल्यूएचओ का विरोध नहीं किया है। हम संगठन के काम का समर्थन कर रहे हैं। यह खुले और पारदर्शी तरीके से इसकी उत्पत्ति की जांच कर रहा है।

कुछ देश भी इसका राजनीतिकरण कर रहे’

उन्होंने कहा कि हम अमेरिका और इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रहे कुछ अन्य देशों का विरोध करते हैं। अगर भविष्य में फिर कभी ऐसी महामारी आई तो चीन अच्छे परिणाम के लिए जो भी होगा करेगा। उन्होंने दोहराया कि कोरोनो की उत्पत्ति का मुद्दा एक वैज्ञानिक मामला है। इसका मूल्यांकन वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों द्वारा किया जाना चाहिए।

ट्रम्प ने डब्ल्यूएचओ पर भी आरोप लगाए

चीन पर हमला करने के अलावा ट्रम्प डब्ल्यूएचओ की भी आलोचना करते रहे हैं। उन्होंने डब्ल्यूएचओ पर चीन की कमियां छुपाने और उसका पक्ष लेने का आरोप लगाया। इसके साथ ही उन्होंने संगठन को दिए जाने वाले फंडिंग पर भी रोक लगा दी।