प्रदर्शनकारियों ने व्यावसायिक गतिविधियां और रास्ते राेके:पाक मछुआरों की रोजी-रोटी निगल रहा चीन, 6 दिन से ग्वादर शहर जाम

7 दिन पहलेलेखक: इस्लामाबाद से भास्कर के लिए नासिर अब्बास  
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जमात ए इस्लामी के एक अन्य नेता अमीरुल अजीम ने कहा कि संगठन 28 नवंबर को इस्लामाबाद में धरना देगा। - Dainik Bhaskar
जमात ए इस्लामी के एक अन्य नेता अमीरुल अजीम ने कहा कि संगठन 28 नवंबर को इस्लामाबाद में धरना देगा।

पाकिस्तान के बलूचिस्तान स्थित तटीय शहर ग्वादर में हजारों प्रदर्शनकारी सोमवार को छठे दिन भी मुख्य व्यावसायिक मार्गों को ब्लॉक किए हुए हैं। विरोध में शामिल ज्यादातर स्थानीय मुछआरे हैं, जो क्षेत्र में चीनी दखल के शिकार हैं। उनका कहना है कि चीन के बड़े-बड़े जहाज तटों से सारी मछलियां निकाल लेते हैं। इससे उनकी आमदनी प्रभावित हुई है।

ग्वादर में चीनी प्रोजेक्ट के चलते जगह-जगह चेकपोस्ट बने हैं। यहां स्थानीय लोगों को रोकर पहचान पत्र मांगा जाता है। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे जमात-ए-इस्लामी महासचिव मौलाना हिदायत उर रहमान बलोच ने दैनिक भास्कर को कहा कि ये आंदोलन सत्ता के अन्याय के खिलाफ खड़ा है। हमने सरकार के आश्वासन पर काफी लंबा इंतजार किया, लेकिन किसी ने हमारी मांगे नहीं सुनी। हम मांगें पूरी होने तक नहीं हटेंगे।

'स्थानीय लोगों को अपनी ही जमीन पर आने-जाने में परेशानी'
उन्होंने कहा कि वे कहते हैं कि अत्याधिक चेकपोस्ट की वजह से स्थानीय लोगों को अपनी ही जमीन पर आने जाने में परेशानी उठानी पड़ रही है। हम तलाशी के नाम पर अपनी मां और बहनों के साथ होने वाले अपमान को बर्दाश्त नहीं कर सकते। हम अपने विदेशी मेहमानों (चीनी श्रमिकों) के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल का सम्मान करते हैं, लेकिन हम उन नियमों के खिलाफ हैं जो हमारे युवाओं को खेल के मैदानों में भी जाने की अनुमति नहीं देते। हमारे जलक्षेत्र में चीनी ट्रॉलरों ने स्थानीय मछुआरों की रीढ़ को तोड़ दिया है।’

समुद्र में ‘चीनी ट्रॉलर’ की मौजूदगी समुद्री जीवन के नरसंहार के समान है। ग्वादर की 90% आबादी मछली के बिजनेस पर जिंदा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि चीनी ट्रालर न केवल मछली पकड़ते हैं, बल्कि मछली की प्रजनन प्रजातियों को भी मिटा दे रहे हैं। जमात ए इस्लामी के एक अन्य नेता अमीरुल अजीम ने कहा कि संगठन 28 नवंबर को इस्लामाबाद में धरना देगा।

'मांगों की अनदेखी हुई तो नतीजे भुगतने के लिए तैयार रहें'
अगर सरकार प्रदर्शनकारियों की मांगों की अनदेखी करती है को वो इसके नतीजे भुगतने के लिए तैयार रहे। ग्वादर बंदरगाह को चीनी प्रोजेक्ट सीपीईसी के ताज के तौर पर पेश किया जाता रहा है। लेकिन चीनी श्रमिकों की मौजूदगी की वजह से पूरा इलाका छावनी में तब्दील हो गया है। यह अरब सागर पर बलूचिस्तान में पाकिस्तान के दक्षिणी ग्वादर बंदरगाह को चीन के पश्चिमी शिनजियांग क्षेत्र से जोड़ेगा।

इसमें चीन और मध्य पूर्व के बीच संपर्क में सुधार के लिए सड़क, रेल और तेल पाइपलाइन लिंक बनाने की योजना है। हालांकि यह प्रोजेक्ट यह काफी धीमी गति से बढ़ रहा है। सरकार का दावा है कि यह प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद यहां रोजगार पैदा होंगे। इससे इलाके के 2.65 लाख आबादी के जीवन स्तर में सुधार होगा।

हम कफन बांध कर आए हैं, मांगें नहीं मानी गईं तो जान दे देंगे
मछुआरा अधिकार आंदोलन के नेता केडी काजू ने कहा कि मछली पकड़ना हमारा पुश्तैनी कारोबार है। चीन निवेश के नाम पर हमारा धंधा खत्म कर रहा है। हम कफन बांधकर आए हैं। सरकार ने हमारी मांगों को पूरा नहीं किया तो हम जान दे देंगे।

कबाइली नेता समेत 6 की गोली मार कर हत्या
बलूचिस्तान में अज्ञात बंदूकधारियों ने अलग-अलग वारदातों में कबाइली नेता समेत 6 लोगों की गाेली मार कर हत्या कर दी। वली खान बाइपास में बंदूकधारियों ने फायरिंग कर कार सवार कबाइली नेता व उनके 2 सहयोगियों की हत्या कर दी। हरनाई जिले में 3 श्रमिकों की फायरिंग कर हत्या कर दी। उल्लेखनीय है कि बलूचिस्तान में आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ऐसी वारदातों में लिप्त रहा है।

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