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पड़ोसियों की मदद के लिए भारत तैयार:पाकिस्तान को देसी वैक्सीन देने में ऐतराज नहीं, चीनी वैक्सीन ने काम नहीं किया तो वहां भी टीका भेजेगा भारत

नई दिल्लीएक महीने पहले
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नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी के तहत भारत अपने पड़ोसी और करीबी देशों को कोरोना वैक्सीन की सप्लाई कर रहा है। अब तक बांग्लादेश, मालदीव, भूटान और नेपाल को कोवीशील्ड वैक्सीन की पहली खेप भेजी जा चुकी है। अब तक दुनिया के 92 देशों ने कोरोना की वैक्सीन के लिए भारत से कॉन्टैक्ट किया है।

सरकार के सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का साफ मैसेज है कि वैक्सीन का इस्तेमाल मानवता के लिए किया जाना चाहिए। ऐसे में अगर पाकिस्तान भी वैक्सीन मांगता है तो भारत को कोई दिक्कत नहीं होगी। अगर चीन में बनी वैक्सीन काम नहीं करती है, तो भारत उसे भी देसी वैक्सीन सप्लाई करने में नहीं हिचकिचाएगा।

पाकिस्तान में कोवीशील्ड को मंजूरी
पाकिस्तान की इमरान सरकार ने कुछ दिन पहले ही कोवीशील्ड वैक्सीन के इमरजेंसी यूज के लिए मंजूरी दी है। यहां चीन की कंपनी साइनोफार्म की वैक्सीन को भी मंजूरी मिल चुकी है। इसके 10 लाख डोज का ऑर्डर दिया गया है। पढ़िए पूरी खबर

भारत ने बांग्लादेश को वैक्सीन के 20 लाख डोज दिए
भारत ने पड़ोसी देश बांग्लादेश को मदद के तौर पर कोरोना वैक्सीन के 20 लाख डोज भेजे हैं। इंडियन हाई कमिश्नर विक्रम दोरईस्वामी ने गुरुवार को इन्हें बांग्लादेश के फॉरेन मिनिस्टर डॉ. एके अब्दुल मोमिन को सौंपा। मोमिन ने कहा कि भारत ने बहुत अहम वक्त पर ये टीके दिए हैं, क्योंकि देश में संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है। अब तक बांग्लादेश में 5,29,687 मामले मिल चुके हैं।

मोमिन ने कहा कि 1971 में हुए मुक्ति संग्राम के वक्त से भारत बांग्लादेश के साथ खड़ा है। आज जब दुनिया में महामारी फैल रही है, तब भी भारत वैक्सीन का तोहफा लेकर आया है। उन्होंने इस पहल को बांग्लादेश और भारत के बीच सच्ची दोस्ती का सबूत करार दिया। बांग्लादेश भारत से वैक्सीन पाने वाला चौथा देश है।

तीन और पड़ोसियों को मदद

  • नेपाल - 10 लाख डोज
  • भूटान - 1,50,000 डोज
  • मालदीव - 1,00,000 डोज

भारत ने कहा- देश की जरूरतों पर भी पूरा ध्यान
भारत में 16 जनवरी से बड़े पैमाने पर वैक्सीनेशन किया जा रहा है। इसके तहत हेल्थवर्कर्स को दो वैक्सीन कोवीशील्ड और कोवैक्सिन लगाई जा रही हैं। दूसरे देशों को वैक्सीन की सप्लाई पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह तय किया जाएगा कि वैक्सीन बना रही कंपनियों के पास विदेश में सप्लाई करने के दौरान घरेलू जरूरतें पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टॉक हो।

भारतीय वैक्सीन के साइड इफेक्ट के केस कम, इसलिए डिमांड ज्यादा

ज्यादातर देश भारतीय वैक्सीन की डिमांड कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, इसकी वजह यह है कि भारत में बनी वैक्सीन लगाने के बाद साइड इफेक्ट के बहुत ही कम मामले सामने आए हैं। इसी सिलसिले में डोमिनिकन रिपब्लिक के प्रधानमंत्री रूजवेल्ट स्केरिट ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिखा। उन्होंने कहा कि हमें कोवीशील्ड वैक्सीन की तुरंत जरूरत है। देश के लोगों को सुरक्षित रखने के लिए मेरी गुजारिश है कि आप हमारी मदद करें। डोमिनिकन रिपब्लिक की आबादी लगभग 72 हजार है। रूजवेल्ट ने 70 हजार वैक्सीन की मांग की है।

इन देशों ने सीरम इंस्टीट्यूट से करार किया

  • कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में शामिल ब्राजील ने भी वैक्सीन लेने के लिए स्पेशल विमान पुणे भेजा है। इसमें वैक्सीन के 20 लाख डोज भेजे जाएंगे। इन्हें ब्राजील सरकार के फोक्रूज बायोमेडिकल इंस्टीट्यूट ने खरीदा है।
  • साओ पाउलो के हेल्थ मिनिस्टर एडुआर्डो पजुएलो ने कहा कि सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में बनी एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन लेने के लिए सभी तैयारियां कर ली गई हैं।
  • ब्राजील की नेशनल हेल्थ सर्विलांस एजेंसी एनविसा ने कोवीशील्ड को इमरजेंसी अप्रूवल के लिए रविवार को मीटिंग बुलाई है। ब्राजील में चीन की वैक्सीन को मंजूरी मिल चुकी है।
  • बोलीविया सरकार कोवीशील्ड वैक्सीन के 50 लाख डोज की सप्लाई के लिए सीरम इंस्टीट्यूट के साथ एग्रीमेंट कर चुकी है। यह देश रूस की स्पूतनिक V वैक्सीन के भी इतने ही डोज खरीदने के लिए समझौते कर चुका है।

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