जिनपिंग की तानाशाही से चाइनीज अवाम त्रस्त:10 साल में 7 लाख से ज्यादा ने मांगी विदेशी शरण, कानून के नाम पर दमन हो रहा

बीजिंगएक महीने पहले
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चीन ने बीते तीन दशकों में जो आर्थिक तरक्की हासिल की उसे देखकर पूरी दुनिया हैरान रह गई। शी जिनपिंग के राष्ट्रपति बनने के बाद चीन ने खुद को सामरिक तौर पर भी काफी मजबूत किया। हालांकि, इसी दौरान सरकारी दमन का जो दुष्चक्र चलाकर लाखों लोगों का उत्पीड़न भी किया गया।

जिनपिंग की इसी तानाशाही से बचने के लिए बीते 10 साल में 7 लाख से ज्यादा चीनी लोगों ने विदेशों से शरण मांगी है। चीन छोड़ने वालों के लिए अमेरिका सबसे पसंदीदा जगह है, इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्राजील, दक्षिण कोरिया और UK जाने वालों की भी अच्छी खासी तादाद है।

10 साल में 1 लाख 70 हजार को मिली विदेशी शरण
हांगकांग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, 2012 से अब तक लगभग 7.30 लाख लोगों ने विदेशी शरण मांगी है, जिसमें से 170,000 के आवेदन स्वीकार किए गए हैं। अमेरिका ने सबसे ज्यादा 88,722 आवेदन स्वीकार किए हैं। सेफगार्ड डिफेंडर्स NGO के लिए काम करने वाले रिसर्चर जिंग-जी चेन ने कहा- डेटा से पचा चलता है कि कैसे जीरो कोविड पॉलिसी और लॉकडाउन की आड़ में लोगों का दमन किया गया।

चीन छोड़ने वालों की ख्वाहिश अमेरिका में बसने की होती है। यह वजह से कि सबसे अमेरिकी नागरिकता के लिए आवेदन किए जाते हैं।
चीन छोड़ने वालों की ख्वाहिश अमेरिका में बसने की होती है। यह वजह से कि सबसे अमेरिकी नागरिकता के लिए आवेदन किए जाते हैं।

जी चेन का कहना है कि चीन में कुछ सालों से लॉकडाउन है, इसके बाद भी हर साल देश छोड़ने की ख्वाहिश रखने वालों की तादाद बढ़ रही है। लोग फॉरेन एजुकेशन, इन्वेस्टमेंट वीजा और रेजिडेंट कार्ड के जरिए देश छोड़ने की जुगत बैठा रहे हैं।

लोगों को जबरन चीन वापस लाया जा रहा
एक और जहां सरकारी दमन से बचने के लिए लोग देश छोड़ने का ऑप्शन चुन रहे हैं, वहीं कुछ को उनकी मर्जी के खिलाफ डिपोर्ट भी किया जा रहा है। चीन की सरकारी एजेंसियां 'स्काईनेट मॉनिटरिंग प्रोग्राम' के तहत देश छोड़ने वालों ट्रैक पर परेशान करती है। इसके अलावा लोगों को जबरन देश वापस भी लाया जाता है।

चीन के शिनजियांग प्रांत में उइगर मुसलमानों को बिना कारण के कैद में डालकर प्रताड़ित किया जाता है। इसके खिलाफ लगातार आंदोलन भी होते रहते हैं।
चीन के शिनजियांग प्रांत में उइगर मुसलमानों को बिना कारण के कैद में डालकर प्रताड़ित किया जाता है। इसके खिलाफ लगातार आंदोलन भी होते रहते हैं।

चीन अक्सर न्यायिक प्रक्रियाओं को दरकिनार कर राजनीतिक शरणार्थियों और मुसलमानों वापस भेजने के लिए अपनी राजनीतिक ताकत का इस्तेमाल करता है। सेफगार्ड डिफेंडर्स की 2021 की रिपोर्ट के मुताबिक, उइगर मुस्लिमों, पत्रकारों, राजनीतिक विरोधियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को विदेशी नेटवर्क से टारगेट किया जाता है।

1989 में चीन की राजधानी बीजिंग के थियानमेन स्क्वायर पर आंदोलन कर रहे हजारों लोगों को गोलियों से भून दिया गया था।
1989 में चीन की राजधानी बीजिंग के थियानमेन स्क्वायर पर आंदोलन कर रहे हजारों लोगों को गोलियों से भून दिया गया था।

विरोधियों के खिलाफ जिनपिंग की 'फॉक्सहंट' पॉलिसी
शी जिनपिंग ने जब से चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) महासचिव का पद संभाला है, वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले विरोधियों के लिए 'फॉक्सहंट' पॉलिसी लेकर आए हैं। 2014 में जब स्काईनेट प्रोग्राम शुरू किया गया था, तब लेकर 2021 तक 10,000 लोगों को वापस लाया गया है। इनमें से सिर्फ 1% ही कानूनी प्रक्रिया से वापस आए हैं, जबकि 60% को उनकी मर्जी के खिलाफ वापस लाया गया।