दहशत में जिनपिंग सरकार:अमेरिकी फाइटर जेट्स ने शंघाई से महज 76 किमी दूर उड़ान भरी, 19 साल बाद चीन के लिए बड़ा खतरा; Q&A में समझें पूरा मामला

बीजिंगएक वर्ष पहले
अमेरिका ने पिछले दिनों दक्षिण चीन सागर में अपना बेहद खतरनाक फाइटर जेट बी1-बी भेजा था। चीन ने इसे उकसाने वाला कदम बताया था। (फाइल)
  • चीन के थिंक टैंक का दावा है कि अमेरिका के एंटी सबमरीन जेट फाइटर्स ने शंघाई के करीब उड़ान भरी
  • 2001 में यूएस नेवी का इंटेलिजेंस एयरक्राफ्ट हैनियान प्रांत में चीन के एयक्राफ्ट से टकरा गया था, चीनी पायलट मारा गया था

अमेरिका और चीन के बीच कई मुद्दों पर विवाद बढ़ रहे हैं। लेकिन, अमेरिका के एक कदम से चीन दहशत में आ गया है। चीन के सरकार समर्थित एक थिंक टैंक ने दावा किया है कि रविवार को एक अमेरिकी फाइटर जेट ने शंघाई के करीब उड़ान भरी। यह फाइटर जेट चीन की इस कमर्शियल सिटी से महज 76.5 किलोमीटर दूर था। चीन के विदेश या रक्षा मंत्रालय ने अब तक आधिकारिक तौर पर प्रतिक्रिया नहीं दी। आखिर अमेरिका ने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया? अमेरिका की स्ट्रैटेजी क्या है? इन सवालों के जवाब यहां तलाशने की कोशिश करते हैं?

Q. रविवार को क्या हुआ?

A. बीजिंग के स्ट्रैटेजिक सिचुएशन प्रोबिंग इनिशिएटिव (एससीएसपीआई) थिंक टैंक का दावा है कि रविवार दोपहर अमेरिका के पी-8ए (पोसाइडन) और ईपी-3ई एयरक्राफ्ट्स ने साउथ चाइना सी से चीन के झेजियांग और फुजियान तक उड़ान भरी। कुछ देर बाद पी-8ए वापस लौटा और फिर यह शंघाई से 76.5 किलोमीटर दूर तक उड़ान भरता रहा।

Q. दावे में कितना दम माना जाए? क्योंकि, चीन ने इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी?

A. दावा कतई खारिज नहीं किया जा सकता। दो वजह हैं। पहली- यह थिंक टैंक कम्युनिस्ट पार्टी की फंडिंग से चलता है। दूसरी- इसके डायरेेक्टर हू बो पीएलए (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी यानी चीन की सेना) में बड़े पदों पर रह चुके हैं। मिलिट्री स्ट्रैटेजिक अफेयर्स पर फौज और सरकार को सलाह देते हैं।

Q. किस तरह के थे अमेरिका फाइटर जेट्स?

A. पी-8ए और ईपी-3ई दोनों ही घातक हैं। इनकी टक्कर के एयरक्राफ्ट चीन के पास नहीं है। पी-8ए के दो मॉडल हैं। एक सिर्फ सर्विलांंस के काम आता है। दूसरा बेहद घातक है। यह न केवल सर्विलांस करता है बल्कि रात या दिन किसी भी वक्त अपनी सोनार पावर से समुद्र में दुश्मन की सबमरीन को खोज निकालने के बाद उन्हें चंद सेकंड में तबाह कर कता है। अब इसमें छोटी न्युक्लियर मिसाइलें भी लगाई जा सकती हैं। दोनों का इस्तेमाल सिर्फ अमेरिकी नेवी करती है।

Q. अमेरिकी नेवी ने कितनी तैयारी से ऑपरेशन किया?

A. इसे दो बातों से समझा जा सकता है। पहली- साउथ चाइना सी में जब इन एयरक्राफ्ट्स ने उड़ान भरी तो नीचे अमेरिकी वॉरशिप चल रहे थे। यानी अगर चीन कोई हरकत करता तो ऊपर से एयरक्राफ्ट और नीचे वॉरशिप उसका काम-तमाम कर देते। दूसरी- जब चीन ने कोई जवाब नहीं दिया तो इन विमानों ने चीन के बड़े शहरों (जैसे शंघाई) तक सर्विलांस किया।

Q. अमेरिका की नजर कहां थी?

A. फुजियान प्रांत से ताइवान स्ट्रैट के दक्षिणी हिस्से तक। अमेरिका अब चीन को अपने नेवी ऑपरेशन्स के जरिए यह बताना चाहता है कि वो ताइवान की हर कीमत पर मदद करेगा।

Q. कितने साल बाद चीन के इतने करीब आए अमेरिकी फाइटर जेट्स?
A. करीब तीन साल बाद। 2017 में अमेरिकी फाइटर जेट्स ने फुजियान प्रांत में चीनी मिलिट्री स्टैबिलिशमेंट्स की तरफ रुख किया था। लेकिन, तब ये इस प्रांत से करीब 106 किलोमीटर दूर थे।

Q. कितना गंभीर माना जाए यह मामला?
A. साउथ चाइना सी में दोनों देशों की नेवी कई बार आमने-सामने आती रही हैं। लेकिन, कभी बड़ा टकराव नहीं हुआ। ‘द वीक’ के मुताबिक, इस बार मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि 12 दिन (रविवार तक) से लगातार यूएस नेवी के एयरक्राफ्ट्स इस क्षेत्र में सर्विलांस सॉर्टी (सामूहिक निगरानी) कर रहे हैं।

Q. क्या ताइवान में मौजूद है अमेरिकी फौज?
A. थिंक टैंक का कहना है कि अमेरिकी नेवी ताइवान के एयर स्पेस की निगरानी कर रही है। शायद यही वजह है कि चीन अब बिल्कुल शांत है। वह विरोध वाले बयान जारी करने के सिवाए कुछ नहीं कर पा रहा है। ईपी-3ई और ई-8सी गुआंगडोंग तक उड़ान भर रहे हैं।

Q. तो क्या जल्दी ही कोई बड़ा टकराव हो सकता है?
A. थिंक टैंक के डाइरेक्टर हू बो इसे खारिज करते हैं। वे कहते हैं- तनाव बढ़ रहा है। लेकिन, कुछ बड़ा होगा? इसकी आशंका फिलहाल कम है। हां, छोटे टकराव बढ़ सकते हैं।

Q. इसके पहले कब इतना तनाव हुआ था?
A. हू बो के मुताबिक- 2001 में यूएस नेवी के इंटेलिजेंस एयरक्राफ्ट और एक चीनी इंटरसेप्टर का हवा में टकराव हुआ था। घटना हैनियान प्रांत के करीब हुई थी। चीनी एयरक्राफ्ट नष्ट हो गया था। पायलट मारा गया था।

Q. साउथ चाइना सी में अमेरिका कितना ताकतवर?
A. चार महीने पहले तक चीन का पलड़ा भारी था। अब अमेरिका ने यहां यूएसएस निमित्ज और यूएसएस रोनाल्ड रीगन तैनात कर दिए हैं। इन पर 120 से ज्यादा फाइटर जेट्ल मौजूद। दोनों एटमी ताकत से लैस हैं। 3 हजार से ज्यादा सैनिक और नेवी सील कमांडो। चीन के पास करीब 56 एयरक्राफ्ट ही हैं। जो उसके वॉरशिप पर मौजूद हैं। इनके पास भी अमेरिकी नेवी जैसी क्षमता नहीं है।

Q. क्या साउथ चाइना सी में घिर गया है चीन?
A. करीब 13 लाख वर्ग किलोमीटर समुद्री क्षेत्र पर चीन दावा करता है। ब्रुनेई, मलेशिया, फिलीपींस, ताइवान और वियतनाम जैसे छोटे देशों को धमकाता है। अब इन देशों को अमेरिकी नेवी की ताकत मिल गई है। ऑस्ट्रेलिया ने भी अपना वॉरशिप भेज दिया है। हाल के दिनों में यहां चीन की नेवी ने हमलावर रुख नहीं दिखाया।

Q. क्या चीन हालात का सही अंदाजा नहीं लगा पाया?
A. चीन के सरकारी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ के मुताबिक, रविवार को हुई घटना पर चीन की नजर थी। चीन समझ गया था कि अमेरिका उसकी सबमरीन्स लोकेशन तलाश रहा है। इस इलाके में जहां भी चीनी नेवी तैनात है, अमेरिका उसके ठिकानों की जानकारी हासिल कर रहा है।

Q. ऑस्ट्रेलिया और जापान की क्या भूमिका है?
A. इनके लिए भी चीन खतरा है। फिलीपींस की समुद्री सीमा में जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ अमेरिका ज्वॉइंट मिलिट्री ड्रिल कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया का एक वॉरशिप नान्शा आईलैंड में मौजूद है। जापान यहां इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस में चीन से ज्यादा मजबूत है।

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