चीन पर फिर शक, कोरोना उसने ही फैलाया:महामारी से पहले ही खरीद ली थीं दोगुना टेस्ट किट, ऑस्ट्रेलिया-अमेरिका की जॉइंट फर्म का खुलासा

वुहान2 महीने पहले

कोरोना की उत्पत्ति पर लगातार हो रहे खुलासों ने चीन को कटघरे में खड़ा किया है। चीन पहले ही कोरोना की उत्पत्ति के समय को लेकर बयान बदलता आया है और अब एक नए खुलासे ने चीन की भूमिका को पहले से ज्यादा संदिग्ध बना दिया है।

ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका की जॉइंट साइबर सिक्योरिटी फर्म ने कोरोना के चीनी कनेक्शन को लेकर रिसर्च के आधार पर एक दावा किया है। दावे के मुताबिक चीन ने कोरोना का पहला केस आने की जो तारीख बताई, उससे एक महीने पहले वहां के एक प्रांत में कोरोना टेस्टिंग उपकरणों की बड़ी तादाद में खरीदी की गई।

सिक्योरिटी फर्म इंटरनेट-2.0 के मुताबिक चीन के हूबेई प्रांत में 2019 में PCR (पॉलीमर चेन रिएक्शन) टेस्ट किट की डिमांड अचानक बढ़ गई। 2019 में हुबेई प्रांत में RT-PCR टेस्ट पर 67.4 मिलियन युआन (10.5 मिलियन डॉलर) खर्च किए गए, जो 2018 में हुई टेस्टिंग से दोगुने थे। इसे हम RT-PCR टेस्ट के नाम से भी जानते हैं।

वुहान में ही मिला था पहला केस
RT-PCR टेस्ट को कोरोना संक्रमण की जांच के लिए सबसे सटीक जांच माना जाता है। इसमें वैज्ञानिक DNA सैंपल की स्क्रीनिंग कर इंफेक्शन का पता लगाते हैं। सबसे ज्यादा टेस्ट किट हूबेई के वुहान शहर में खरीदी गईं। चीन ने इस शहर में ही पहला कोरोना केस मिलने का दावा किया था।

कोरोना को चीन ने पहले निमोनिया बताया
31 दिसंबर 2019 को चीन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को बताया था कि उन्हें वुहान शहर में निमोनिया का एक अजीब केस मिला है। 7 जनवरी 2020 को चीन ने आधिकारिक तौर पर कोरोना का नया वैरिएंट सार्स-कोविड-2 या कोविड-19 मिलने की घोषणा की।

लैब एक्सीडेंट की वजह से कोरोना फैलने की आशंका
कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है कि लैब के किसी कर्मचारी की लापरवाही की वजह से घातक रोग जनक वायरस लैब से बाहर निकला और यही इस महामारी की वजह बना। वुहान की ये लैब हुनान सीफूड मार्केट से भी ज्यादा दूर नहीं है जहां सबसे पहले कोरोना का कहर देखा गया।
अब तक किसी जंगली जानवर में इस संक्रमण का नहीं मिलना और चीन सरकार द्वारा लैब से वायरस लीक होने की आशंका की जांच करने से इनकार करना लैब से संक्रमण फैलने की थ्योरी को बल देते हैं।

WHO की जो टीम चीन गई थी, उसे क्या मिला था?
इसी साल जनवरी में WHO की टीम चीन के वुहान शहर गई थी। अप्रैल में इस टीम ने अपनी रिपोर्ट दी, लेकिन इस रिपोर्ट में कुछ भी नया नहीं था। न ही कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर कोई निश्चित निष्कर्ष था। जो बातें पिछले दो साल से होती रही हैं, उन्हीं बातों को रिपोर्ट में कहा गया। रिपोर्ट में कहा गया कि ये पता नहीं कि चीन में लोग इस वायरस से कैसे संक्रमित हुए। ऐसा लगता है कि ये वायरस जानवरों से इंसानों में आया। इसके साथ ही इस बात की संभावना नहीं के बराबर है कि इसे लैब में बनाया गया। WHO पर चीन के दबाव में रिपोर्ट बनाने के भी आरोप लगे थे।

जानवर से इंसानों में कोरोना फैलने वाली थ्योरी
कई वैज्ञानिक मानते हैं कि किसी लैब की जगह वायरस के नेचुरल उत्पत्ति की आशंका ज्यादा है। कोरोना वायरस पर काम कर रहे स्क्रिप्स रिसर्च के वैज्ञानिक क्रिस्टन जी एंडरसेन कहते हैं कि इबोला और दूसरे रोग जनक वायरस जानवरों से ही इंसानों में फैले, इन्हीं वायरस के जिनोम सीक्वेंस से ही कोरोना के फैलने के आसार सबसे ज्यादा हैं।

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