कोविड पर तकरार:अमेरिका ने कहा- कोरोनावायरस की शुरुआत पर नई जांच जरूरी, ताइवान को ऑब्जर्वर बनाएं; चीन का जवाब- झूठ फैला रहा अमेरिका

वॉशिंगटन/बीजिंग6 महीने पहले
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जनवरी में  WHO की एक टीम वुहान लैब की जांच करने गई थी। इस टीम को चीन ने अहम डाटा और कुछ जगहों पर जाने की मंजूरी नहीं दी थी। - Dainik Bhaskar
जनवरी में WHO की एक टीम वुहान लैब की जांच करने गई थी। इस टीम को चीन ने अहम डाटा और कुछ जगहों पर जाने की मंजूरी नहीं दी थी।

कोरोनावायरस की शुरुआत आखिर कहां से हुई? चीन पारदर्शी जांच से परहेज क्यों करता है? यह सवाल एक बार फिर उठ खड़ा हुआ है। शुरुआत अमेरिका के ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ अखबार की एक रिपोर्ट से हुई। इसमें कहा गया- वुहान लैब की तीन रिसर्चर नवंबर में 2019 में ही सर्दी-जुकाम या निमोनिया से परेशान थे। यही लक्षण कोरोना के भी होते हैं। इन्होंने अस्पताल से मदद मांगी थी।

इस रिपोर्ट पर अमेरिकी सरकार ने भी सख्त रुख अपनाया। अमेरिका ने चीन से कहा है कि कोरोनावायरस कैसे फैला, कहां से शुरू हुआ? इसकी पारदर्शी तरीके से नई जांच होनी चाहिए। इतना ही नहीं अमेरिका ने चीन के दुश्मन ताइवान को ऑब्जर्वर बनाने की मांग भी कर दी। दबाव बढ़ा तो चीन ने रिपोर्ट को खारिज करते हुए इसमे अमेरिका का नया झूठ करार दे दिया।

अमेरिका ने क्या और क्यों कहा
जनवरी में WHO की एक टीम वुहान के उस लैब की जांच करने गई थी, जिसके बारे में दावा किया जाता है कि कोरोनावायरस कथित तौर पर वहां से लीक हुआ। चीन बड़ी मुश्किल से इस लैब और कुछ सैम्पल्स की जांच के लिए तैयार हुआ था। टीम को जरूरी डाटा और कुछ अहम जगहों पर जाने की मंजूरी मुहैया नहीं कराई गई।

‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’की नई रिपोर्ट के बाद अमेरिकी इंटेलिजेंस एजेंसीज इस बात का पता लगाने में जुट गई हैं कि वुहान की लैब में नवंबर 2019 में क्या हुआ था। इसके एक महीने बाद ही चीन ने औपचारिक तौर पर कोविड-19 की जानकारी दुनिया को दी थी। अमेरिकी हेल्थ सेक्रेटरी जेवियर बेसेरा ने कहा- अब इसकी वैज्ञानिक और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने सीधे तौर पर चीन का नाम नहीं लिया।

वर्ल्ड हेल्थ असेंबली में अपने भाषण के दौरान बेसेरा ने कहा- दुनिया को कोविड की सचाई जानने की और कोशिश करनी चाहिए। इससे हम भविष्य में इस तरह की जैविक आपदाओं का मुकाबला कर सकेंगे। इसके लिए ग्लोबल को-ऑपरेशन की जरूरत है। ताइवान को भी WHO में शामिल करना चाहिए और उसे ऑब्जर्वर बनाना चाहिए।

WHO क्या कर रहा है
कोविड-19 की शुरुआत पर नए खुलासे के बाद WHO भी एक्टिव हो गया। पिछले साल तब के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने WHO को चीन की कठपुतली बताते हुए उसकी फंडिंग रोक दी थी। जो बाइडेन ने इसे फिर बहाल कर दिया है। WHO के प्रवक्ता ने कहा- हम इस रिपोर्ट की टेक्निकल लेवल पर जांच कर रहे हैं। हम अपनी सिफारिशें WHO चीफ को भेजेंगे।

टकराव बढ़ना तय
इस मुद्दे पर टकराव बढ़ना बिल्कुल तय लग रहा है। इसकी वजह हाल ही पब्लिश तीन रिपोर्ट्स हैं। पहली- वीकेंड ऑस्ट्रेलिया ने 15 दिन पहले जारी की थी। इसमें कहा गया था कि वुहान लैब से वायरस लीक होने की थ्योरी को खारिज नहीं किया जा सकता। कुछ सबूत इस तरफ इशारा करते हैं। दूसरी रिपोर्ट- यह भी ऑस्ट्रेलिया से जारी हुई थी। इसमें कहा गया था कि चीन 6 साल से सार्स वायरस की मदद से जैविक हथियार बनाने की कोशिश कर रहा था। तीसरी- वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट। इसमें कहा गया है कि नवंबर 2019 में ही वायरस एक्टिव हो गया था और इससे चीनी रिसर्चर बीमार हुए थे।

चीन भी सख्त
पश्चिमी देशों और खासकर अमेरिका की तरफ से कोविड-19 की जांच के बढ़ते दबाव के बाद चीन ने भी जवाब दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता चाओ लिजियान ने कहा- इसी साल WHO एक्सपर्ट्स ने वुहान लैब का दौरा किया था। उन्होंने पूरी जांच की थी। उन्हें इस तरह के कोई सबूत नहीं मिले थे। हम साफ कर देना चाहते हैं कि इस तरह की रिपोर्ट्स झूठी हैं। WHO ने भी कहा था कि लैब से वायरस लीक होने की संभावना भी गलत है। वुहान लैब का कोई रिसर्चर कभी बीमार नहीं हुआ।

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