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चीन की चिंता:चीन की जनसंख्या दर शून्य के करीब, अगले 10 साल में भारत बनेगा चुनौती

4 महीने पहलेलेखक: डेनियल मॉस
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जनसंख्या के ताजा आंकड़े जारी, कुल आबादी 141 करोड़ के पार हुई। - Dainik Bhaskar
जनसंख्या के ताजा आंकड़े जारी, कुल आबादी 141 करोड़ के पार हुई।

चीन ने मंगलवार को अपनी जनगणना के 2020 के आंकड़े जारी किए। इसके अनुसार देश की आबादी अब बढ़कर 141 करोड़ हो गई है। पिछले 10 सालों में चीन की आबादी में 5.38 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। 2010 की तुलना में चीन की आबादी में करीब 7 करोड़ 20 लाख का इजाफा हुआ है।

चीन की राष्ट्रीय जनगणना की रिपोर्ट के मुताबिक चीन की आबादी में औसतन हर साल 0.53 प्रतिशत का ही इजाफा होता आया है। जबकि चीन पिछले कुछ साल से राष्ट्रीय जन्मदर बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, फिर भी सरकार असफल हो रही है।

2017 से लगातार चीन के राष्ट्रीय जन्मदर में कमी दर्ज की गई है। इस वजह से चीन में आबादी का एक बड़ा हिस्सा तेजी से बुढ़ापे की ओर जा रहा है, जिससे चीन की जनसंख्या में विविधता काफी तेजी से कम होती जा रही है जो चिंता की बात है।

इसे सही करने के लिए सरकार ने वन चाइल्ड पॉलिसी को भी हटा दिया है और लोगों को दो बच्चों को जन्म देने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है लेकिन अभी तक कामयाबी नहीं मिली है। चीन की सरकार ने जन्मदर बढ़ाने के लिए कई तरह के कार्यक्रम चलाए हैं, लेकिन सफलता नहीं मिल रही है।

चीन की नई आबादी का शादी से विश्वास उठ रहा है और उनकी बच्चे पैदा करने में भी दिलचस्पी कम हो रही है। इस वजह से 70 साल में पहली बार चीन की जनसंख्या जन्म दर घटकर 1953 के स्तर तक जा पहुंची है। इस वजह से भारत जनसंख्या के मामले में अगले दस साल में चीन को चुनौती दे सकता है।

दुनिया, चीन और अर्थशास्त्रियों की नजर में चीन की जनसंख्या दर का असर

दुनिया: 2026 वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में कुल वृद्धि का पांचवां हिस्सा योगदान देगा

दुनिया का आर्थिक उत्पादन पिछले कुछ दशकों में चीन द्वारा संचालित हो रहा है, खासकर 2007-2009 के वित्तीय संकट के बाद से। 2000 के बाद से इसका सकल घरेलू उत्पाद औसतन 8 फीसदी की वार्षिक दर से बढ़ा है। अप्रैल 2016 में आए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के पूर्वानुमानों के आधार पर ब्लूमबर्ग की गणना के अनुसार, चीन 2026 में वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में कुल वृद्धि का पांचवां हिस्सा योगदान देगा। भारत और जापान क्रमशः 3.4 फीसदी और 3.5 फीसदी योगदान देंगे। इसमें अमेरिका का योगदान 14 फीसदी रह सकता है।

चीन: कामगारों की कमी पूरी करने के लिए गांव से शहरों की ओर लोगों को भेजा जा रहा

बुजुर्गों की संख्या बढ़ने से फैक्ट्रियों में कामगारों की किल्लत होगी, इसे दूर करने के लिए चीन गांवों से शहरों की ओर लोगों को भेज रहा है। इसके लिए ऐसे लोग भेजे जाएंगे जो अभी खेतोंे में काम करते हैं। जनगणना के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक दशक में चीन के शहरों में पलायन कर आने वालों की आबादी में 23 करोड़ का इजाफा हुआ है। प्रतिशत के हिसाब से देखा जाए तो दस साल पहले शहरी आबादी 49.7 फीसदी थी, जो अब बढ़कर 63.9 फीसदी हो गई है। वहीं, 15.5 फीसदी लोगों ने किसी न किसी तरह की वोकेशनल ट्रेनिंग ली हुई है।

भारत: 2027 तक चीन को पीछे छोड़ सबसे ज्यादा आबादी वाला देश होने का अनुमान

अमेरिका को पीछे छोड़ने के सपने देख रहा चीन जनसंख्या में अप्रत्याशित कमी के संभावित परिणामों से भी चिंतित है। संयुक्त राष्ट्र की जून 2019 में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन में जहां आबादी में कमी आएगी, वहीं 2019 में 136 करोड़ की आबादी वाले भारत के 2027 तक दुनिया के सबसे ज्यादा आबादी वाले देश के तौर पर चीन से आगे निकल जाने का अनुमान है। चीन का सेन्ट्रल बैंक भी रिपोर्ट में कह चुका है कि चीन की बूढ़ी आबादी भारत की जवान जनसंख्या से मुकाबला करने में नाकामयाब हो जाएगी।

अर्थशास्त्री: 2025 से पहले ही चीन की आबादी में कमी आना शुरू हो सकती है

चीन के अर्थशास्त्री एरिक झू के अनुसार 2020 की जनगणना के आंकड़े कम प्रजनन क्षमता की ओर इशारा करते हैं। यूनाइटेड नेशन की वर्ल्ड पॉपुलेशन प्रॉस्पेक्ट्स (2019) में इसका उल्लेख है। इसके अनुसार 2025 से पहले ही चीन की आबादी में कमी आना शुरू हो सकती है।

आबादी का तेजी से धीमा होना विशेष रूप से कामकाजी उम्र का संकेत करता है। ऐसे में हमें नीतिगत पहल में अधिक तत्परता दिखानी होगी। जन्म दर को बढ़ावा देने के और प्रयास करने होंगे। इसके अलावा सेवानिवृत्ति की योजना को स्थगित करने जैसे उपाय भी करने होंगे।

बोझ: पुरुषों को 60, महिलाओं को 50 की उम्र में रिटायर करने का दबाव

चीन में सरकार पर 2025 तक पुरुषों को 60 और महिलाओं को 50 साल की उम्र में रिटायर करने का दबाव बढ़ रहा है। क्योंकि, बुजुर्गों की संख्या में इजाफे से चीन में पेंशन प्रणाली ध्वस्त होने की कगार पर है। अनुमान है कि 2036 तक यदि सरकार ने रिटायरमेंट नीति नहीं बदली तो हालात बेहद खराब हो जाएंगे।

ऐसे में यदि सरकार नीति न बदले तो नए लोगों को रोजगार देना सबसे बड़ी चुनौती बन जाएगा और यदि रिटायर करने की नई नीति बनाई जाती है तो पेंशन फंड के लिए पैसे जुटाना भी मशक्कत का काम है। साथ ही जैसे-जैसे बुजुर्गों की संख्या बढ़ रही है, उनके लिए हेल्थकेयर सिस्टम और उनकी देखभाल के लिए सिस्टम बनाना भी आवश्यक होता जा रहा है। वहीं, युवाओं की बात की जाए तो 10 साल पहले चीन में 14 साल तक के लोगों की संख्या 17 फीसदी थी, जो एक फीसदी बढ़कर 18 फीसदी हुई है।

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