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तालिबानी हुकूमत का असर:अफगानिस्तान में CNN की रिपोर्टर हिजाब पहने नजर आईं, कहा- तालिबानियों का रवैया दोस्ताना

काबुल4 महीने पहले
तस्वीर CNN रिपोर्टर क्लैरिसा वार्ड की है, जो अभी काबुल में रिपोर्टिंग कर रही हैं।

अफगानिस्तान में सत्ता बदलते ही मीडिया को भी अपना कलेवर बदलना पड़ा है। अमेरिकी मीडिया हाउस CNN चीफ इंटरनेशनल रिपोर्टर क्लैरिसा वार्ड हिजाब में नजर आईं। रिपोर्टिंग के दौरान क्लैरिसा ने कहा कि एक तरफ तालिबानी 'अमेरिका का खात्मा हो' का नारा लगा रहे हैं और दूसरी तरफ उनका रवैया काफी दोस्तान दिखाई दे रहा है। ये पूरी तरह से अजीब है।

क्लैरिसा की हिजाब वाली तस्वीर और सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इसमें क्लैरिसा की पहले की रिपोर्ट के दौरान की फोटोज को भी शेयर किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि पहले वो हिजाब नहीं पहनती थीं और अब तालिबानी कब्जे के बाद उनका पहनावा बदल गया है।

क्लैरिसा ने पहनावे पर दी सफाई

हालांकि, क्लैरिसा ने वायरल हो रही तस्वीरों पर सफाई दी है। उन्होंने कहा- ये तस्वीरें गलत हैं। एक तस्वीर प्राइवेट कम्पाउंड की है (बिना हिजाब वाली)। दूसरी तस्वीरों में मैं तालिबानी कब्जे वाले काबुल की सड़कों पर हूं। पहले भी मैंने जब काबुल की सड़कों पर रिपोर्टिंग की तो हिजाब पहने रखा था। हालांकि, ये पूरी तरह कवर नहीं रहता था। बुर्का नहीं रहता था। थोड़ा बदलाव तो हुआ है, लेकिन पूरी तरह से नहीं।

क्लैरिसा ने बताया औरतों के लिए कितना बदल गया अफगानिस्तान
क्लैरिसा सोमवार को अफगान में अमेरिकी दूतावास के बाहर रिपोर्टिंग कर रही थीं। उन्होंने कहा कि दो दिन पहले के मुकाबले अब अफगानिस्तान की सड़कों पर महिलाएं बहुत कम नजर आ रही हैं। इसके अलावा एक और चीज गौर करने लायक है, वो ये कि अफगानिस्तान में तालिबानी हुकूमत कायम होने के बाद महिलाएं ज्यादा पारंपरिक और दकियानूसी परिधानों में नजर आ रही हैं।

24 घंटे में रिपोर्टिंग का रंगरूप ही बदल गया

क्लैरिसा की रिपोर्टिंग का जो वीडियो सामने आया है, उसमें वे सिर से पैर तक बुरके में नजर आ रही हैं। उनके पीछे तालिबानी लड़ाके दिखाई दे रहे हैं। कुछ जीप पर बैठकर नारेबाजी कर रहे हैं कि अमेरिका का खात्मा हो। इससे पहले भी क्लैरिसा अफगानिस्तान में रिपोर्टिंग करती हुए नजर आईं थीं, लेकिन तब उन्होंने इतनी ज्यादा ट्रेडिशनल ड्रेस नहीं पहनी थी। 15 अगस्त की ही एक रिपोर्ट में वे कुर्ते और दुपट्टे में नजर आई थीं, लेकिन 16 अगस्त को जब वो रिपोर्टिंग करती दिखाई दीं तो उन्होंने हिजाब पहन रखा था।

अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद ग्राउंड रिपोर्टिंग करती क्लैरिसा वार्ड।
अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद ग्राउंड रिपोर्टिंग करती क्लैरिसा वार्ड।

क्लैरिसा बोलीं- हक्के-बक्के हैं अफगानिस्तान में काम कर रहे रिपोर्टर
क्लैरिसा ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि तालिबानी कब्जे के बाद यहां काम कर रहे बहादुर जर्नलिस्ट हक्के-बक्के हैं। तालिबान के सत्ता हासिल करने से उन्हें धक्का लगा है। वो जानते हैं कि अब वो निशाने पर हैं, क्योंकि उन्होंने अशरफ गनी सरकार के वक्त खुलकर और साफगोई से रिपोर्टिंग की है। पहले वो तालिबान के खिलाफ बोलते रहे हैं और अब सबसे बड़ा टारगेट वही हैं।

तस्वीर 2006 में बेरूत में ली गई थी, तब क्लैरिसा लेबनान वॉर को कवर कर रही थीं।
तस्वीर 2006 में बेरूत में ली गई थी, तब क्लैरिसा लेबनान वॉर को कवर कर रही थीं।
2005 में इराक के मोसुल से रिपोर्टिंग करतीं क्लैरिसा वार्ड।
2005 में इराक के मोसुल से रिपोर्टिंग करतीं क्लैरिसा वार्ड।
सीरिया में सिविल वॉर के दौरान क्लैरिसा वार्ड।
सीरिया में सिविल वॉर के दौरान क्लैरिसा वार्ड।

पहले भी हिजाब में नजर आ चुकी हैं क्लैरिसा
ये पहली बार नहीं है जब क्लैरिसा वार्ड हिजाब में नजर आई हों। 2016 में सीरिया में कवरेज के दौरान भी वो कई मौकों पर हिजाब में नजर आई थीं। सीरिया की सिविल वॉर के दौरान उन्होंने अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि आप को ये बात स्वीकार करनी होगी कि आप हमेशा लोगों की जान नहीं बचा सकते हैं। क्लैरिसा 2006 में लेबनान युद्ध के दौरान बेरूत और 2005 में ईराक युद्ध के दौरान मोसुल से भी रिपोर्टिंग कर चुकी हैं।

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