फ्रांस का अंतरिक्ष में पहला सैन्य अभ्यास:जासूसी और एंटी सैटेलाइट हथियारों को तलाशने समेत 18 मिशनों को अंजाम दिया

पेरिस7 महीने पहले
  • फ्रांस का दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अंतरिक्ष शक्ति बनने का लक्ष्य
  • मकसद- फ्रांस की सैटेलाइट को दुश्मन देश नुकसान न पहुंचा पाए

आमतौर पर सेनाएं मैदानों और समुद्रों में युद्धाभ्यास करती हैं। लेकिन फ्रांस ने अंतरिक्ष में दुनिया का पहला सैन्य अभ्यास कर इतिहास रच दिया है। सोमवार से शुरू हुआ अभ्यास शुक्रवार को पूरा हुआ। इस अभ्यास को एस्टरएक्स-2021 नाम दिया गया, जो 1965 में छोड़ी गई फ्रांस की पहली सैटेलाइट के नाम पर है।

इसमें अभ्यास में जर्मनी और अमेरिका की सुरक्षा एजेंसियों ने हिस्सा लिया। दरअसल, फ्रांस अंतरिक्ष में अभ्यास कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी स्पेस पावर बनाना चाहता है। इसके तहत उसने स्पेस में जासूसी और एंटी सैटेलाइट्स का पता लगाया। अभ्यास के दौरान 18 अंतरिक्ष मिशन की टेस्टिंग की गई।

अभ्यास का मकसद अंतरिक्ष में मौजूद अपने उपकरणों पर किसी अन्य देश या स्पेस की घटनाओं से होने वाले खतरे की आशंका का पता लगाना था। फ्रांस के रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पैली ने कहा, ‘हमारे सहयोगी और विरोधी अंतरिक्ष का सैन्यीकरण कर रहे हैं। इसलिए फ्रांस ने रूस और अमेरिका के साथ अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए एंटी-सैटेलाइट लेजर हथियार और नई निगरानी क्षमताओं को विकसित करने की योजना बनाई है।’

37 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा अंतरिक्ष कार्यक्रम में निवेश करेगा फ्रांस
फ्रांस की स्पेस फोर्सेज कमांड, कमांडेंट डी एल’ईस्पेस (सीडीई) का गठन 2019 में किया गया था। 2025 तक इसमें 500 कर्मियों को अंतरिक्ष में तैनात किया जाएगा। फ्रांस 2025 तक अंतरिक्ष कार्यक्रम में 4.3 अरब यूरो (37,305 करोड़ रुपए) निवेश करेगा।

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