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डेल्टा 60% ज्यादा संक्रामक:ब्रिटेन सहित कई देशों में वैक्सीन की तीसरी डोज के विकल्प पर भी विचार, जहां वैक्सीनेशन कम, वहां यह अधिक घातक

एक वर्ष पहले
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एस्ट्राजेनेका सहित मौजूदा वैक्सीन वायरस के सभी वैरिएंट्स के खिलाफ असरकारक। - Dainik Bhaskar
एस्ट्राजेनेका सहित मौजूदा वैक्सीन वायरस के सभी वैरिएंट्स के खिलाफ असरकारक।

जब लोग सोचते हैं कि वायरस को हरा दिया गया है तब कोई नया वैरिएंट तूफान मचाते हुए आता है। यह पिछले स्वरूपों से अधिक संक्रामक होता है। चिंताजनक यह है कि गरीब देशों में 1% से कम आबादी को ही वैक्सीन लगी है। वैरिएंट्स की गंभीरता को देखते हुए ब्रिटेन सहित कई देशों में वैक्सीन की तीसरी डोज के विकल्प पर विचार किया जा रहा है। अब कोविड-19 के बाद की जिंदगी की झलक उभरने लगी है।

दो बातें स्पष्ट हैं- 1. महामारी का अंतिम दौर लंबा और दर्दनाक होगा। 2. कोविड-19 एकदम बदली हुई दुनिया छोड़कर जाएगा। कई देशों में वैक्सीनेशन की कमी से वायरस के नए वैरिएंट्स का कहर जारी है। सबसे पहले भारत में मिला डेल्टा वैरिएंट वुहान, चीन से आए वायरस से दो से तीन गुना अधिक संक्रामक है। जिन इलाकों में 30% लोगों को वैक्सीन लग चुकी है वहां भी इससे संक्रमण तेजी से फैला है।

डेल्टा ने दुनियाभर में चिंता फैला रखी है। भारत में जिन सैम्पलों की जांच हुई उनमें डेल्टा वैरिएंट 97% पाया गया। यह ब्रिटेन में 91% और रूस में 89% है। वैसे, वायरस के सभी वैरिएंट के खिलाफ सभी किस्म की वैक्सीन असरकारक हैं। वे बीमारी की गंभीरता और मौत के खतरे को कम करती हैं। चूंकि डेल्टा वैरिएंट तेजी से फैलता है इसलिए यह प्रतिरोध की क्षमता को पीछे छोड़ देता है। दूसरी ओर जिन लोगों की पहुंच वैक्सीन और नए इलाज तक है, उनके लिए कोविड-19 तेजी से ऐसी बीमारी बन रही है जो घातक नहीं है। डेल्टा वैरिएंट से बुरी तरह प्रभावित ब्रिटेन में संक्रमित लोगों की मृत्यु दर 0.1% है।

ब्रिटिश वैज्ञानिकों का अनुमान है, सावधानी न बरतने वाली वैक्सीन विहीन आबादी में डेल्टा आठ लोगों के बीच संक्रमण फैलाता है। डेल्टा से संक्रमित लोगों में वायरस की मात्रा भी अधिक पाई गई है। लिहाजा, संक्रमित लोगों से अधिक लोगों के बीमार पड़ने का खतरा रहता है। वैक्सीनेशन से संक्रमण की गति धीमी पड़ती है लेकिन वह पूरी तरह रुकता नहीं है।

अलबत्ता, उनसे संक्रमण फैलना बहुत अधिक मुश्किल हो जाता है। ब्रिटिश अध्ययनों में पाया गया कि अल्फा के मुकाबले डेल्टा 60% अधिक संक्रामक है। डेल्टा के अधिक संक्रामक होने और प्रतिबंध शिथिल करने से ब्रिटेन में फिर से संक्रमण बढ़ना शुरू हो गया है लेकिन व्यापक वैक्सीनेशन के कारण मौतों की संख्या नहीं बढ़ी है। बीमारी के लक्षणों की ट्रैंकिंग करने वाले ब्रिटिश एप जो से पता लगा है कि डेल्टा से सामान्य सर्दी, जुकाम जैसे लक्षण उभरते हैं। ये अन्य वैरिएंट से अलग हैं। इनमें सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण बहुत कम उभरते हैं।

वैक्सीन लगवाने वाले लोग डेल्टा से संक्रमित हो जाएं तो वे ज्यादा छींकते हैं। इससे बीमारी तेजी से फैलती है। इस पृष्ठभूमि में वैक्सीनों का महत्व बढ़ जाता है। वर्तमान वैक्सीनों के सभी वैरिएंट के खिलाफ प्रभावी होने के कारण वायरस के अलग-अलग वैरिएंट के लिए अलग वैक्सीन की जरूरत नहीं पड़ेगी। आसान विकल्प किसी अन्य वैक्सीन की तीसरी डोज हो सकती है।

महामारी में लोग अधिक धार्मिक और पारिवारिक हुए

लोग जीवन के मकसद की तलाश नए सिरे से कर रहे हैं। सर्वे एजेंसी प्यू को इटली, नीदरलैंड्स में पांच में से एक व्यक्ति ने कहा कि महामारी ने उनके देश को अधिक धार्मिक बना दिया है। स्पेन,कनाडा में पांच में से दो लोगों ने कहा कि पारिवारिक रिश्ते मजबूत हुए हैंं। ब्रिटेन में युवतियों ने किताबें पढ़ने में 50% अधिक समय बिताया। उपन्यास लिखने वाले लोगों की संख्या बढ़ गई।

  • लोग अब काम में महामारी से पहले की सख्ती और कठिन स्थितियों से बचना चाहेंगे। सर्वे के अनुसार तीन में से एक अमेरिकी सप्ताह में पांच दिन घर से काम करना चाहता है।
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