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कई देशों में डिजिटल करेंसी की दस्तक:अमेरिका, इंग्लैंड और यूरोपीय यूनियन में लॉन्च पर विचार, ई-मनी और नकद लेनदेन में लगातार गिरावट ने नई करेंसी का रास्ता आसान बनाया

3 महीने पहले
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कई देशों ने डिजिटल करेंसी लॉन्च करने की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार शुरू कर दिया है। - Dainik Bhaskar
कई देशों ने डिजिटल करेंसी लॉन्च करने की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार शुरू कर दिया है।

तकनीकी बदलाव फाइनेंस के क्षेत्र को बहुत अधिक प्रभावित कर रहे हैं। किसी समय बिटकॉइन को अराजकतावादियों की सनक समझा जाता था। लेकिन, कई फंड मैनेजर शेयर बाजार में इसका मूल्य एक खरब डॉलर एसेट क्लास में मानते हैं। अमेरिकी शेयर बाजार वॉल स्ट्रीट में दिनभर डिजिटल करेंसी में दांव लगाने वाले लोगों की भीड़ रहती है। इस बीच कई देशों ने डिजिटल करेंसी लॉन्च करने की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार शुरू कर दिया है। बहामा डिजिटल करेंसी लॉन्च करने वाला पहला देश है। कुछ देशों के सेंट्रल बैंक इस विषय पर रिसर्च कर रहे हैं। अमेरिका, इंग्लैंड, यूरोपियन यूनियन के देशों में नई करेंसी के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन हो रहा है। चीन ने प्रयोग के बतौर ई-युआन शुरू किया है।

गवर्नेंट कॉइंस पैसे के नया अवतार होंगे। वे फाइनेंस से जुड़ा कामकाज बेहतर बनाएंगे। लेकिन, पैसे की ताकत व्यक्तियों के हाथ से राज्य (सरकार) के पास चली जाएगी। वे दूसरे देशों में पेमेंट का नया रास्ता खोलेंगे। डॉलर का विकल्प भी खड़ा कर सकते हैं।

छोटे देशों को आशंका है कि लोग स्थानीय करेंसी का उपयोग करने की बजाय विदेशी ई-करेंसी का सहारा लेंगे। नगद लेनदेन में कमी से डिजिटल करेंसी का रास्ता आसान हो रहा है। विश्व में तीन अरब से अधिक कस्टमर ई-वॉलेट और पेमेंट एप्स का इस्तेमाल करते हैं।

सरकारी डिजिटल करेंसी से कुछ फायदे सामने नजर आते हैं। मौजूदा व्यवस्था में बैंकों के धराशाई होने से जमाकर्ताओं का नुकसान होता है। इधर, बिटकॉइन को बड़े पैमाने पर स्वीकार नहीं किया गया है। क्रेडिट कार्ड खर्चीले हैं। दूसरी ओर सरकार की गारंटी के कारण सरकारी ई-करेंसी की विश्वसनीयता अधिक रहेगी। उनका इस्तेमाल सस्ता होगा। गवर्नमेंट कॉइंस वैश्विक फाइनेंशियल इंडस्ट्री के संचालन का खर्च कम करेंगे।

यह विश्व में प्रति व्यक्ति 350 डॉलर सालाना है। नई करेंसी के आने से उन 1.7 अरब लोगों के लिए पैसे का लेनदेन आसान होगा जिनके बैंक खाते नहीं हैं। सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) नगद का डिजिटल रूप होगी। सीबीडीसी सेंट्रल बैंक में जमा पैसे के बराबर होगी।

चीन में पांच लाख से अधिक लोगों ने ट्रायल पर चल रहा मोबाइल एप डाउनलोड किया है। वे इसके माध्यम से सरकार से मिला डिजिटल कैश ई-युआन खर्च करते हैं। यूरोपियन यूनियन के अधिकारी चाहते हैं कि 2025 तक डिजिटल करेंसी यूरो लॉन्च कर दी जाए।

19 अप्रैल को बैंक ऑफ इंग्लैंड और ब्रिटिश कोषालय ने डिजिटल करेंसी के आइडिया पर विचार करने के लिए टास्कफोर्स बनाई है। अमेरिका में सेंट्रल बैंक-फेडरल रिजर्व भी इस पर गौर कर रहा है। इंटरनेशनल सैटलमेंट्स बैंक के एक सर्वे में पाया गया कि अधिकतर सेंट्रल बैंक सीबीडीसी पर रिसर्च कर रहे हैं या परीक्षण कर रहे हैं। अगले तीन साल में दुनिया की बीस प्रतिशत आबादी वाले देशों में डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल हो सकता है।
कुछ समय पहले तक चंद अर्थशास्त्री डिजिटल करेंसी को दिलचस्प लेकिन अव्यावहारिक आइडिया बताते थे। फ्रांस के रिजर्व बैंक-बैंक्वे डी फ्रांस के पूर्व डिप्टी गवर्नर जीन पियरे लेंडाउ कहते हैं, हमने केवल दो साल में डिजिटल मनी के बारे में लोगों और सरकारी अधिकारियों के सोच-विचार में नाटकीय परिवर्तन देखा है। दूसरा प्रमुख कारण नगद के उपयोग में गिरावट है।
बहामा ने लॉन्च की पहली सरकारी डिजिटल करेंसी
बहामा के 700 द्वीपों के समुद्र तटों पर गोलाकर सफेद सीपियां इकट्ठी होती हैं। ये पांच पंखुड़ियों के फूल जैसी लगती हैं। इनमें छोटे समुद्री जीव- सी अर्चिन्स पलते हैं। ये चांदी के डॉलर जैसे दिखाई पड़ते हैं इसलिए इन्हें सैंड डॉलर्स कहा गया है। किवदंती है कि यह जलपरियों या लंबे समय पहले खत्म हो चुके अटलांटिस शहर के सिक्के हैं। बहामा के सेंट्रल बैंक ने सैंड डॉलर को अपना लोगो बनाया है। अक्टूबर 2020 में जब बहामा ने विश्व की पहली सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) लॉन्च की तो एप पर वैसा ही फूल बनाया गया। इसका नाम सैंड डॉलर रखा है।
अधिकतर पैसा बैंकों में जमा है

डिजिटल करेंसी से परंपरागत बैंकों के अस्तित्व के लिए खतरा पैदा हो जाएगा। इस समय अधिकतर पैसा बैंकों के मार्फत आता है। अमेरिका में प्राइवेट बैंकों में 90% पैसा जमा है। यूरोपियन यूनियन के देशों में 91 %, जापान में 93 % और ब्रिटेन में 97 % पैसा बैंकों में है।

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