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राहत में भेदभाव :पाकिस्तान के सिंध में अल्पसंख्यक भूख से लड़ रहे, वीडियो जारी कर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांगी मदद

इस्लामाबाद3 वर्ष पहले
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पाकिस्तान के रावलपिंडी में काम और भोजन के लिए सड़कों पर बैठे मजदूर। कोरोनावायरस के चलते काम न मिलने से इनकी हालत बदतर हो गई है। - Dainik Bhaskar
पाकिस्तान के रावलपिंडी में काम और भोजन के लिए सड़कों पर बैठे मजदूर। कोरोनावायरस के चलते काम न मिलने से इनकी हालत बदतर हो गई है।
  • पाकिस्तान में कोरोनावायरस 7,993 मामले हैं, मरने वालों की संख्या 159 है
  • लोगों ने कहा- कोरोना के कारण भोजन की किल्लत, सरकार नहीं कर रही मदद

पाकिस्तान में अक्सर अल्पसंख्यकों के साथ दुर्व्यहार और प्रताड़ित करने के मामले आते रहे हैं। अब कोरोनावायरस महामारी के दौर में उन्हें खाना तक नहीं मुहैया कराया जा रहा। सिंध प्रांत में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और प्रभावशाली लोगों से अपील की है कि वे उन्हें भोजन मुहैया कराएं, क्योंकि सरकार उन लोगों पर कोई ध्यान नहीं दे रही।
सिंध के एक न्यूज पोर्टल ‘राइज न्यूज’ में एक वीडियो मैसेज अपलोड किया गया है। इस वीडियो में सिंध प्रांत के विंदो कुमार और टंडो एम खान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भोजन उपलब्ध कराने की मदद मांगी है। उन्होंने कहा कि कोरोनावायरस महामारी के चलते वे लोग काम नहीं कर पा रहे। अब तो खाना तक नहीं है। विंदो ने कहा कि यहां अल्पसंख्यक समुदाय के ज्यादातर लोग ठेका मजदूर, नाई और छोटे विक्रेता हैं। कोरोनावायरस महामारी के कारण काम बंद हो गया है और हम लोग बहुत चिंतित हैं। पाकिस्तान में अब तक कोरोना संक्रमण के 7,993 मामले आए हैं और मरने वालों की संख्या 159 है।
अमेरिकी रिपोर्ट में भी अल्पसंख्यकों से भेदभाव की बात सामने आई थी 
अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआईआरएफ) ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि कोरोना संकट के दौरान पाकिस्तान में गैर इस्लामिक लोगों को परेशान किया गया है। आयोग की कमिश्नर अनुरीमा भार्गव ने कहा था कि पाकिस्तान में हिंदुओं और ईसाइयों को जरूरी खाद्य सामग्री भी नहीं दी जा रही। ये समुदाय भूख से लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान सरकार अल्पसंख्यकों की मदद सुनिश्चित करे। किसी व्यक्ति के धार्मिक विश्वास के चलते उसे भूखा रखा जाए यह निंदनीय है।