कैसे मिला वैज्ञानिकों को ओमिक्रॉन:द. अफ्रीका में अचानक सिरदर्द और थकान की शिकायत वाले मरीजों की लहर आई, टेस्ट में असामान्य चीजें दिखीं

जोहान्सबर्ग2 महीने पहले
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कोरोना का नया वैरिएंट ओमिक्रॉन दुनियाभर की परेशानी का सबब बन गया है। आखिर ये वैरिएंट पकड़ में कैसे आया, किसने सबसे पहले इसे पहचाना। इस बारे में नई जानकारी सामने आई है।

दरअसल, नवंबर की शुरुआत में साउथ अफ्रीका के गाउटेंग प्रांत की लैब में कोविड टेस्ट के दौरान कुछ असामान्य चीजें दिखाई दीं। साइंटिस्ट वायरस के S- जीन को पकड़ नहीं पा रहे थे, जिनकी वजह से मानव कोशिकाओं में दाखिल होने वाले रोगाणु बनते और फैलते हैं।

तीसरी लहर थमने के बाद अचानक बढ़े मरीज
तीसरी लहर के बाद डॉक्टरों को मरीजों के व्यवहार में भी कुछ असामान्य चीजें नजर आई। अचानक गाउटेंग इलाके में सिरदर्द और थकान वाले मरीजों की बाढ़ आ गई। ये नए मामले डेल्टा वैरिएंट की वजह से आई तीसरी लहर के बाद भी आ रहे थे।

साउथ अफ्रीका की मेडिकल रिसर्च काउंसिल की प्रेसिडेंट ग्लेंडा ग्रे ने कहा कि- सैंपल में असामान्य चीजें सबसे पहले लैंसेट लैब की एक साइंटिस्ट ने देखी। उसने ही इस बारे में सभी को सूचना दी। वो नहीं जानते थे कि क्या गड़बड़ है। बाद में वायरोलॉजिस्ट को इसकी जानकारी दी गई और उन्होंने सैंपल की सीक्वेंसिंग शुरू की।

लगातार टेस्टिंग के बाद 22 नवंबर को पहचाना गया ओमिक्रॉन
4 नवंबर को लैंसेट की जूनियर साइंटिस्ट एलीशिया वर्मुलेन ने ओमिक्रॉन की शुरुआती जानकारी जुटाई। उन्हें सिंगल पॉजिटिव टेस्ट में कुछ गड़बड़ी दिखी और उसने यह जानकारी मैनेजर को दी। एक हफ्ते तक ऐसी ही असामान्य चीजें दिखाई देने पर लैंसेट की मॉलिक्यूलर पैथोलॉजी के चीफ एलीसन ग्लास को खबर किया गया। इसके बाद लैंसेट ने नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर कम्युनिकेबल डिजीज के साथ मिलकर कई टेस्ट किए। 22 नवंबर को लैंसेट इस नतीजे पर पहुंचा कि ये कोरोना का नया वैरिएंट है, जिसका नाम है - B.1.1.529 और S-जीन इसलिए पकड़ में नहीं आया, क्योंकि यह म्यूटेट हो गया था।

दक्षिण अफ्रीका इन दिनों कोरोना से बुरी तरह प्रभावित है, यहां टेस्टिंग की संख्या बढ़ा दी गई है।
दक्षिण अफ्रीका इन दिनों कोरोना से बुरी तरह प्रभावित है, यहां टेस्टिंग की संख्या बढ़ा दी गई है।

इस दौरान बोत्सवाना में भी यात्रियों के टेस्ट के दौरान साइंटिस्ट को वायरस के जीन में इसी तरह की असामान्य चीजें दिखाई दीं। साउथ अफ्रीका से हॉन्गकॉन्ग गए एक यात्री के टेस्ट सैंपल में भी वैज्ञानिकों को ऐसा ही कुछ दिखा। इसे ग्लोबल डेटा बेस पर अपलोड किया गया और वह लीक हो गया। 24 नवंबर को नए वैरिएंट के बारे में शुरुआती रिपोर्ट्स ब्रिटिश मीडिया में भी पब्लिश कर दी गईं।

इन मामलों के बाद ही 25 नवंबर को द. अफ्रीका में ओमिक्रॉन वैरिएंट के पाए जाने की घोषणा की गई। जल्द ही ये वैरिएंट घातक साबित होने लगा। नतीजतन दुनिया में डर फैल गया, मार्केट डूबने लगे और अमेरिका व ब्रिटेन जैसे देशों में साउथ अफ्रीका से आने वाली फ्लाइट्स बैन कर दीं। अब तक ये वैरिएंट 15 देशों में पाया जा चुका है।

पब्लिक अनाउंसमेंट
दक्षिण अफ्रीका हेल्थ डिपार्टमेंट के एक्टिंग डायरेक्टर जनरल निकोलस क्रिस्प को इस वैरिएंट के बारे में पहली बार जानकारी 24 नवंबर को दी गई। अगले ही दिन सरकार के अन्य प्रमुख अधिकारियों को यह जानकारी दी गई। इसके बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में दक्षिण अफ्रीका के 2 जीनोम सीक्वेंसिंग संस्थानों के हेड टूलियो डि ओलिवेरा ने नए वैरिएंट के बारे में आधिकारिक घोषणा की।

वैरिएंट को लेकर एक्सपर्ट की राय
साउथ अफ्रीका की मेडिकल रिसर्च काउंसिल की प्रेसिडेंट ग्लेंडा ग्रे कहती हैं कि नया वैरिएंट हल्के संक्रमण की वजह बन रहा है। लेकिन, अभी ज्यादातर केस युवाओं के सामने आए हैं। जब यह बुजुर्गों में फैलेगा तब ही बताया जा सकेगा कि इसका असर क्या होगा। आज हम जो कुछ भी इसके बारे में कहेंगे, वह कल झूठ भी साबित हो सकता है।

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