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द इकाेनाॅमिस्ट से:लैब में बने संक्रामक बीमारी के ‘हथियार’ से निपटने के लिए यूएन जैसा नया संगठन बनाएं देश: बिल गेट्स

6 महीने पहले
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बिल गेट्स ने कहा- मैं उम्मीद करता हूं कि अमीर देश गरीब देशों को इन तैयारियों में शामिल करेंगे, खासकर मूलभूत हेल्थकेयर सिस्टम स्थापित करने के लिए मदद देकर। -फाइल फोटो
  • माइक्रोसाॅफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स ने अगली महामारी से लड़ने का दिया मंत्र
  • उन्होंने कहा- मुझे भरोसा है कि मानवता इस महामारी को हरा देगी

माइक्रोसॉफ्ट के सह संस्थापक बिल गेट्स का कहना है कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र जैसे संगठन बनाए गए। कोविड-19 के बाद नेताओं को अगली महामारी रोकने के लिए नए संस्थान बनाने चाहिए। ये हमें इसके लिए भी तैयार करेंगे कि अगर कोई लैब में संक्रामक बीमारी को तैयार कर हथियार की तरह उसका इस्तेमाल करता है, तो उससे कैसे निपटना है। ‘द इकाेनाॅमिस्ट’ से अनुबंध के तहत पेश है उनके विचार... 
कोरोना वैक्सीन लगाए बिना जिंदगी सामान्य ढर्रे पर नहीं लौटेगी

गेट्स ने कहा, जब इतिहासकार कोविड-19 महामारी पर किताब लिखेंगे तो जो हम अब तक जीते रहे हैं, वह एक तिहाई के आसपास ही होगा। कहानी का बड़ा हिस्सा उस पर होगा, जो आगे होना है। यूरोप के अधिकांश हिस्से, पूर्वी एशिया और उत्तरी अमेरिका में इस महामारी का चरम संभवत: इस महीने के आखिर तक बीत जाएगा। कई लोगों को उम्मीद है कि कुछ हफ्तों में चीजें वैसी ही हो जाएंगी, जैसी दिसंबर में थीं। दुर्भाग्य से, ऐसा नहीं होगा। मुझे भरोसा है कि मानवता इस महामारी को हरा देगी, लेकिन यह तभी होगा, जब अधिकतर जनसंख्या को वैक्सीन लगा दी जाएगी। तब तक जिंदगी सामान्य ढर्रे पर नहीं लौट सकेगी।

खेल लगभग खाली स्टेडियम में ही होंगे

गेट्स के मुताबिक, भले ही सरकार घर पर ही रहने के आदेश को वापस ले ले और व्यापार अपने दरवाजे खोल दे, लेकिन लोग सामान्य तौर पर खुद को बीमारी की चपेट में आने से बचाने की कोशिश करेंगे ही। हवाईअड्‌डों पर भारी भीड़ नहीं होगी। खेल लगभग खाली स्टेडियमों में ही होंगे। दुनिया की अर्थव्यवस्था दबी ही रहेगी, क्याेंकि मांग कम रहेगी और लोग अधिक कंजूसी से खर्च करेंगे। जैसे ही विकसित देशों में महामारी धीमी हाेगी, वे विकासशील देशों की तरह गति बढ़ाएंगे। हालांकि, उनका अनुभव सबसे खराब होगा। गरीब देशों में जहां बहुत ही कम काम दूर बैठकर हो सकते हैं, वहां सामाजिक दूरी के उपाय भी काम नहीं कर पाएंगे।

सुरक्षित तभी होंगे जब प्रभावी समाधान होगा

गेट्स मानते हैं कि वायरस का संक्रमण तेजी से बढ़ेगा और स्वास्थ्य तंत्र संक्रमितों की देखभाल नहीं कर सकेगा। न्यूयॉर्क जैसे कोविड-19 से सर्वाधिक प्रभावित शहरों का डेटा दिखाता है कि मैनहट्‌टन के एक अकेले अस्पताल में ही अधिकतर अफ्रीकी देशों की तुलना में ज्यादा इंटेंसिव केयर बेड उपलब्ध हैं। दसियों लाख लोग मर सकते हैं। अमीर देश इसमें मदद कर सकते हैं। उन्हें सुनिश्चित करना होगा कि अतिआवश्यक सप्लाई सिर्फ बड़ी बोली लगाने वाले को ही न दी जाए। लेकिन, अमीर व गरीब देशों के लोग समान रूप से तभी सुरक्षित होंगे, जब हमारे पास इस बीमारी का प्रभावी मेडिकल समाधान यानी वैक्सीन उपलब्ध होगी।

दुनियाभर में उपलब्ध संस्थानों में वैक्सीन बन रही होंगी

उन्होंने कहा, अगले एक साल तक मेडिकल शोधकर्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण लोगों मेें शामिल होंगे। मुझे उम्मीद है कि 2021 के मध्य के बाद दुनियाभर में उपलब्ध संस्थानों में वैक्सीन बन रही होंगी। अगर ऐसा होता है तो यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी- जब मानव पहली बार इतनी तेजी से एक नई बीमारी को पहचानने और फिर उसके खिलाफ प्रतिरक्षण का काम करेगा। वैक्सीन पर प्रगति के अलावा इस महामारी से दो अन्य बड़ी मेडिकल उपलब्धियां भी हासिल होंगी। एक जांच के क्षेत्र में होगी। अगली बार जब कोई नया वायरस उभरेगा तो लोग संभवत: उसकी घर पर वैसे ही जांच कर सकेंगे, जैसे वे प्रेगनेंसी की जांच करते हैं। बस उन्हें अपनी नाक के भीतर से स्वैब लेना होगा। 

रिसर्चर अब एंटीवायरल की बड़ी लाइब्रेरियां विकसित करेंगे
गेट्स का मानना है कि रिसर्चर अब एंटीवायरल की बड़ी और विविधता वाली लाइब्रेरियां विकसित करेंगे, ताकि किसी भी नए वायरस के आने पर वे इन्हें तेजी से स्कैन करने और प्रभावी इलाज तलाशने में सक्षम हों। वैज्ञानिकों का लंबे समय से मानना है कि एमआरएनए वैक्सीन हमें कैंसर की एक संभावित वैक्सीन की ओर ले जा सकती है। लेकिन, कोविड-19 तक इस पर व्यापक अनुसंधान नहीं हुआ है कि वे किस तरह से इसे लोगों को वहन करने योग्य कीमत पर उपलब्ध करा सकते हैं। दूसरे विश्व युद्ध के बाद दुनिया के नेताओं ने भविष्य में संघर्षों को रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र जैसे संगठन बनाए।

नेताओं को अगली महामारी रोकने के लिए संस्थान बनाने चाहिए

गेट्स ने कहा, कोविड-19 के बाद नेताओं को अगली महामारी रोकने के लिए संस्थान बनाने चाहिए। यह राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और वैश्विक संगठनों का मिश्रण होना चाहिए। आज के युद्ध अभ्यासों की तरह ये संगठन नियमित तौर पर ‘जीवाणु अभ्यास’ भी करेंगे। इससे जब कभी किसी चमगादड़ या पक्षी से मनुष्यों पर कोई नया वायरस कूदेगा तो हम तैयार रहेंगे। ये संगठन हमें इस बात के लिए भी तैयार करेंगे कि अगर कोई अपनी लैब में किसी संक्रामक बीमारी को तैयार करके हथियार की तरह उसका इस्तेमाल करता है, तो उससे कैसे निपटना है। महामारी के लिए अभ्यास करने से दुनिया खुद की जैव आतंकवाद जैसी किसी कार्रवाई से भी रक्षा करने में सक्षम होगी। 

महामारी ने हमें दिखाया है कि वायरस सीमा कानूनों का पालन नहीं करते
मैं उम्मीद करता हूं कि अमीर देश गरीब देशों को इन तैयारियों में शामिल करेंगे, खासकर मूलभूत हेल्थकेयर सिस्टम स्थापित करने के लिए मदद देकर। यहां तक कि बहुत ही खुदगर्ज व्यक्ति या अलग-थलग सरकारों को भी इस पर सहमत होना चाहिए। इस महामारी ने हमें दिखा दिया है कि वायरस सीमा कानूनों का पालन नहीं करते हैं और हम सब माइक्रोस्कोपिक जीवाणुओं के एक नेटवर्क से आपस में जुड़े हुए हैं। इतिहास हमेशा एक तय ढर्रे पर नहीं चलता। लोग तय करते हैं कि कौन सी दिशा लेनी है और वे गलत मोड़ भी ले सकते हैं। 2021 के बाद के साल बहुत कुछ 1945 के बाद के सालों जैसे ही होंगे। लेकिन आज की सबसे ज्यादा समानता 10 नवंबर 1942 से हो सकती है। ब्रिटेन ने युद्ध में पहली जमीनी लड़ाई जीती थी और विंस्टन चर्चिल के एक भाषण में घोषणा की- ‘यह अंत नहीं है। यह अंत की शुरुआत भी नहीं है। लेकिन यह संभवत: शुरुआत का अंत है।

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