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वीडियो गेम कंसोल की कमी से परेशान अमेरिका:अलर्ट मिलते ही उमड़ रहे ग्राहक, मेंबरशिप प्रोग्राम लेने पर भी मिलने की गारंटी नहीं

2 महीने पहलेलेखक: केलेन ब्राउनिंग, जूली क्रेस्वेल
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ग्राहकों की मजबूरी का फायदा बिचौलिए उठा रहे, खरीदी के टिप्स देकर लाखों कमा रहे। - Dainik Bhaskar
ग्राहकों की मजबूरी का फायदा बिचौलिए उठा रहे, खरीदी के टिप्स देकर लाखों कमा रहे।

पिछले हफ्ते जब अमेरिका के यू-ट्यूबर और कंटेंट क्रिएटर जैक रैंडेल ने यूजर्स को यू-ट्यूब पर उनकी लाइवस्ट्रीम देखने का आग्रह और कहा कि वे वॉलमार्ट की वेबसाइट रीफ्रेश करना शुरू करें। उनके कहने पर यूजर्स ने वीडियो गेम कंसोल की खरीदी के लिए रिटेलर की साइट पर लगभग टूट पड़े। एक घंटे से भी कम समय में सारे कंसोल बिक गए। कुछ ही मिनटों में रैंडेल की मोबाइल स्क्रीन पर भाग्यशाली खरीदारों ने स्क्रीनशॉट भेजे। कुछ यूजर्स ने उन्हें मदद करने के एवज में रैंडेल को पैसे भी भेजे। ये राशि करीब 1.50 लाख रुपए थी।

वीडियो गेम कंसोल को लेकर पूरे अमेरिका में इन दिनों अजीब सी बेसब्री देखने को मिल रही है। इसका फायदा रैंडेल जैसे लोग उठा रहे हैं और सिर्फ टिप्स देकर खासी कमाई कर रहे हैं। वहीं रिटेल दुकानों और शोरूम पर भी लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। कई बार तो लोगों में झगड़े तक हो जाते हैं। दरअसल कोरोना के कारण घरों में लंबा वक्त बिताने के लिए वीडियो गेम पिछले सालभर में बेहतर विकल्प के तौर पर उभरा है।

इसके अलावा क्रिसमस जैसे त्योहार पर आदर्श गिफ्ट भी माना जा रहा है। पर चिप की कमी के चलते इनकी इन्वेंट्री में खासी कमी है। यूजर्स 15-20 हजार रुपए खर्च करके कंपनियों के मेंबरशिप प्रोग्राम से जुड़े रहे हैं, फिर भी गारंटी नहीं कि उन्हें कंसोल मिल ही जाएंगे। इसलिए ग्राहक टिप्स देने वालों को फॉलो कर रहे हैं। लंबी कतारों व झगड़ों में उलझने के बजाय इन बिचौलियों की मदद ले रहे हैं।

विश्लेषकों का अनुमान है कि साल खत्म होते-होते सोनी करीब 1.9 करोड़, वहीं माइक्रोसॉफ्ट 1.2 करोड़ गेम कंसोल की बिक्री कर लेगी, क्योंकि इनके कंसोल की डिमांड ज्यादा है। इसलिए कुछ लोग इन्हें खरीदकर रख लेते हैं, कभी-कभी पर्चेज बॉट का इस्तेमाल करके आम लोगों की तुलना में जल्दी हासिल कर लेते हैं। फिर इन्हें ईबे या फेसबुक मार्केटप्लेस पर दो से तीन गुना दाम में बेच देते हैं। न्यूयॉर्क के मैट स्नाइडर बताते हैं कि रिटेल साइट्स को स्कैन करके फॉलोअर्स को अलर्ट करना पड़ता है, जरा भी देरी हुई तो निराशा ही हाथ लगती है।

यूजर्स से फीस ले रहे, कंपनी से कमीशन और स्ट्रीमिंग से कमाई अलग

मैट स्वाइडर ने इसके चलते टेक रडार की नौकरी छोड़ दी। वे अब तक 1.3 लाख लोगों को कंसोल व गैजेट्स खरीदने में मदद कर चुके हैं। वे बताते हैं, पिछले साल अंत तक उनके 21 हजार फॉलोअर थे, अब 10 लाख से ज्यादा हैं। वे अपने टेक न्यूजलैटर शॉर्टकट के जरिए यूजर्स से हर महीने 377 रुपए लेते हैं। उनकी भेजी हुई लिंक से खरीदारी पर भी कंपनी भी कमीशन देती है। इसके अलावा यू-ट्यूब पर लंबे समय तक लाइव स्ट्रीमिंग से भी खासी कमाई हो जाती है। कुछ छात्र भी इसके जरिए कमाई करके अपना खर्च निकाल रहे हैं।