नेपाल / पर्वतारोहियों की संख्या पर लगाम लगाने की तैयारी, इस साल 11 मौतें हुईं



शेरपा फुरबा तेनजिंग। शेरपा फुरबा तेनजिंग।
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शेरपा फुरबा तेनजिंग।शेरपा फुरबा तेनजिंग।

  • तिब्बत के रास्ते जाने वालाें की संख्या 300 तय मगर नेपाल से अनगिनत परमिट जारी किए जाते हैं
  • पर्वतारोहण में एक बार में साढ़े सात लाख रुपए का खर्च आता है

Jun 05, 2019, 10:22 PM IST

काठमांडू. माउंट एवरेस्ट पर पर्वतारोहियों की संख्या पर नेपाल जल्द ही लगाम लगा सकता है। चोटी पर बढ़ती भीड़ के कारण इस साल 11 लोगों की मौत हुई है। इसके लिए खराब मौसम और पर्वतारोहियों में अनुभव की कमी को भी जिम्मेदार माना गया है। इससे पहले 2014 में 17, 2015 में 19, 2016 में 7 और  2017-18 में 5-5 लोगों की जान गई थी।

 

पर्वतारोहण के इस सीजन की शुरुआत 14 मई से हुई थी। यह सीजन का आखिरी सप्ताह था। एक शेरपा ने बताया कि सीजन में भीड़ होती है। ऊंचाई पर हवा के बीच छोटी सी जगह में 20 लोगों को खड़ा रखना मुश्किल होता है। 

नेपाल को परमिट से मोटा मुनाफा होता है

  1. तिब्बत के रास्ते एवरेस्ट पर जाने वालों की संख्या 300 तय है। मगर नेपाल को लेकर कोई संख्या निश्चित नहीं है। इस बार वहां से 381 परमिट दिए गए थे। इनके साथ इतने ही शेरपा थे। प्रत्येक परमिट का साढ़े 7 लाख रुपए चार्ज था।

  2. नेपाल पर्यटन मंत्रालय के सचिव मोहन कृष्ण सपकोटा ने कहा, ‘‘हम संख्या कम करने, रस्सियां लगाने, ज्यादा ऑक्सीजन ले जाने पर ध्यान दे रहे हैं।’’चिली के पर्वतारोही जुआन पाब्लो मोहर ने कहा, ‘‘जिन लोगों को चढ़ाई के बारे में कुछ नहीं पता है, वे कभी एवरेस्ट पर न आएं।’’

  3. हिमालयन एक्सपीरियंस (हिमेक्स) के रसेल ब्राइस का कहना है कि दशकों से अधिकारियों का रुझान बेहद उदासीन रहा है।  2014 में भी सी बातें हुई थी, पर हुआ कुछ नहीं।

  4. शेरपा फुरबा तेनजिंग कहते हैं कि सस्ते सेवा प्रदाताओं के पर्वतारोही 8,848 मीटर की चोटी के शीर्ष पर मौतों का कारण बनते हैं।

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