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भास्कर एक्सप्लेनर:दुनिया भर में फिर उठी कोरोना की उत्पत्ति की जांच की मांग; जानिए, क्यों जोर पकड़ रही है वायरस के वुहान की लैब से लीक होने की थ्योरी

लंदन5 महीने पहले
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कोरोनावायरस के सबसे ज्यादा चर्चा वुहान की लैब से लीक होने को लेकर हुई। अब अमेरिका, ब्रिटेन समेत दुनिया भर से दोबारा जांच की मांग उठी है। - Dainik Bhaskar
कोरोनावायरस के सबसे ज्यादा चर्चा वुहान की लैब से लीक होने को लेकर हुई। अब अमेरिका, ब्रिटेन समेत दुनिया भर से दोबारा जांच की मांग उठी है।

कोरोनावायरस से दुनिया भर में 17 करोड़ से ज्यादा लोग संक्रमित हुए, जबकि 35 लाख से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। लेकिन चीन के वुहान में इसका पता चलने और दुनिया भर में फैलने के डेढ़ साल बाद भी यह सवाल अनसुलझा है कि आखिर वायरस आया कहां से? सबसे ज्यादा चर्चा वुहान की लैब से लीक होने को लेकर हुई।

अब अमेरिका, ब्रिटेन समेत दुनिया भर से दोबारा जांच की मांग उठी है। इसमें लैब लीक थ्योरी फिर से जिंदा हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने तो खुफिया एजेंसियों से 90 दिन में इस पर रिपोर्ट मांगी है। वहीं चीन ने लैब थ्योरी को फिर नकार दिया है। ऐसे में जानना जरूरी है कि यह थ्योरी क्या है और फिर से क्यों जोर पकड़ रही है।

वुहान लैब लीक थ्योरी क्या है?
इसमें शक जताया जा रहा है कि कोरोनावायरस चीन के वुहान की एक प्रयोगशाला से किसी गलती की वजह से निकला है। वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी दुनिया के चुनिंदा जैविक रिसर्च सेंटर में शामिल है, जहां इंसानों को संक्रमित करने वाले खतरनाक वायरस पर रिसर्च होती है। यह लैब पशु या वेट मार्केट के पास ही है। इसी मार्केट में संक्रमण का दुनिया का पहला क्लस्टर मिला था।

लैब थ्योरी फिर क्यों उभर आई?
इसके कई कारण हैं- पहला- व्हाइट हाउस को दी गई खुफिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नवंबर 2019 में वुहान लैब के 3 कर्मचारियों को अस्पताल में भर्ती किया गया था, जिनमें कोरोना के लक्षण थे। दूसरा- राष्ट्रपति बाइडेन ने खुफिया एजेंसियों को जांच कर 90 दिन में रिपोर्ट मांगी है कि वायरस चीन की लैब से निकला या नहीं। तीसरा- जो विशेषज्ञ लैब लीक थ्योरी पर संदेह जता रहे थे, वे भी अब खुल कर बोलने लगे हैं।

व्हाइट हाउस के प्रमुख स्वास्थ्य सलाहकार एंथोनी फाउची ने भी कहा है कि वायरस के लैब से लीक होने की आशंका है। इसकी दोबारा जांच होनी चाहिए। चौथा- 18 वैज्ञानिकों ने साइंस पत्रिका को लिखे पत्र में कहा कि वायरस के वुहान लैब से लीक होने के पहलू को खारिज नहीं किया जा सकता। वायरस के मूल का पता लगाने के लिए अब तक हुई कोई भी जांच भरोसेमंद नहीं है।

पांचवां- ब्रिटेन की खुफिया एजेंसियों का भी मानना है कि वायरस वुहान लैब से ही लीक हुआ है। ब्रिटेन के वैक्सीन मंत्री नदीम जहावी ने कहा, ‘हम सभी को सबूत जुटाने हैं और फिर कार्रवाई करनी है। यह बेहद जरूरी है कि डब्ल्यूएचओ को बिना दबाव के जांच की इजाजत दी जाए। यह न सिर्फ मौजूदा, बल्कि भविष्य की महामारी के लिए दुनिया को तैयार करने के लिए भी जरूरी है।’

वायरस का स्रोत जानना क्यों जरूरी?
दोबारा ऐसी तबाही न हो, इसलिए जरूरी है। पशुओं से संक्रमण की थ्योरी सही साबित हुई, तो खेती और पशुपालन पर असर पड़ेगा। फ्रोजन फूड या लैब लीक थ्योरी सही निकली, तो रिसर्च और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर पड़ेगा। चीन के प्रति नजरिया भी बदलेगा।

इस बारे में विशेषज्ञ क्या सोचते हैं?
चीन के दौरे पर गई डब्ल्यूएचओ टीम के सदस्य प्रोफेसर डेल फिशर ने कहा, “लैब लीक थ्योरी से इनकार नहीं किया गया था, लेकिन इसे साबित करने के लिए सबूत बहुत कम थे। लेकिन मेरे दिमाग में लैब तो है ही। यह खत्म नहीं हुई, इस पर और रिसर्च की जरूरत है।’ वहीं चीन में काम कर चुके राजनयिक चार्ल्स पार्टन कहते हैं, “अगर वायरस प्रयोगशाला से निकला होगा तो हमें भविष्य की ओर देखते हुए चीन से सहयोग प्राप्त करने की कोशिश करनी चाहिए।’ वहीं वारविक मेडिकल स्कूल के वायरोलॉजिस्ट प्रो. लॉरेंस यंग कहते हैं, “यह बहुत जरूरी है कि वुहान लैब के सभी दस्तावेजों तक डब्ल्यूएचओ की आसान और बिना शर्त पहुंच हो।’

भारत का इस पर क्या रुख है?
अमेरिका और ब्रिटेन के बाद भारत ने भी राय जाहिर की। भारत ने कहा, ‘कोविड-19 की उत्पत्ति से जुड़ी जांच महत्वपूर्ण कदम है। इसमें अगले चरण की जांच की जरूरत है, ताकि किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सके। इसके लिए डब्ल्यूएचओ को सभी से मदद मिलनी चाहिए।’

चीन का इस पर क्या कहना है?
चीन ने इसे बदनाम करने का अभियान बताया है। वह दूसरी थ्योरी पर जोर दे रहा है। उसका कहना है कि वायरस किसी दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश से फ्रोजन फूड के जरिए आया होगा। उसने चमगादड़ों पर हुई ताजा रिसर्च का हवाला भी दिया है। चीन का आरोप है कि अमेरिका और पश्चिमी मीडिया अफवाह फैला रहा है।

तो क्या शुरुआती जांच में कुछ भी पता नहीं चल पाया था?
डब्ल्यूएचओ की टीम जनवरी-फरवरी में 4 हफ्ते वुहान में जांच करती रही। उनके साथ चीनी रिसर्चर भी थे। इसकी रिपोर्ट में कहा गया था कि वायरस शायद चमगादड़ों और दूसरे जानवरों से इंसानों में फैला है। लेकिन रिपोर्ट के पारदर्शी होने पर सवाल उठे।