इजरायल की बरशीबा यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का कमाल:चेहरा पहचानने वाली टेक्नोलॉजी को चकमा देने के लिए अब AI की मदद से होगा डिजिटल मेकअप

येरुशलम24 दिन पहले
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वैज्ञानिकों द्वारा विकसित तकनीक के जरिए AI डिजिटल मेकअप के बारे में बताता है। - Dainik Bhaskar
वैज्ञानिकों द्वारा विकसित तकनीक के जरिए AI डिजिटल मेकअप के बारे में बताता है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से चेहरा पहचानने (फेशियल रिक्गनिशन) की तकनीक विकसित हुई। लेकिन अब वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंजेलिजेंस यानी AI से ही ऐसी नई तकनीक विकसित की है जिससे कि फेशियल रिक्गनिशन सिस्टम को चकमा दिया जा सकता है।

इजरायल की बरशीबा यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित की गई ये तकनीक बेहद ही आसान तरीके से काम करती है। AI आपके चेहरे की तस्वीर को प्रोसेस कर बताता है कि कितना मेकअप करना है। चेहरे पर कितना मेकअप लगाना है। दरअसल, फेशियल रिक्गनिशन सिस्टम किसी भी व्यक्ति की फोटो को स्टोर करके रखता है।

उसी व्यक्ति का चेहरे फिर कैप्चर करने पर सिस्टम उसकी पहचान कर पूरा ब्योरा डेटा के साथ सामने रख देता है। वैज्ञानिकों द्वारा विकसित तकनीक के जरिए AI डिजिटल मेकअप के बारे में बताता है। इसे वैज्ञानिकों ने विपरीत मेकअप (एडवर्सियल मेकअप) का भी नाम दिया है। इसके जरिए गालों और चेहरे के अन्य हिस्सों में मेकअप लगाना होता है।

वैज्ञानिकों ने पाया कि आर्कफेस प्रोग्राम को एडवर्सियल मेकअप के जरिए लगभग 99 फीसदी मामलों में गच्चा दिया जा सकता है। आर्कफेस के जरिए एआई चेहरे के हीट मैप को भी मैच करता है। लेकिन एडवर्सियल मेकअप से ये हीट मैपिंग गड़बड़ा जाती है। डेटा वैज्ञानिक नितजन गुऐटा के अनुसार मेकअप का इस्तेमाल करने से पुरुषों और महिलाओं में लगभग समान नतीजे सामने आए हैं।

निजता की रक्षा के लिए बनाई गई ये तकनीक
दुनिया भर में चेहरा पहचानने वाली आर्कफेस तकनीक विवादों में रही है। निजता के अधिकार के समर्थकों के अनुसार इससे आम लोगों के जीवन में सरकारी एजेन्सियों का अनावश्यक अतिक्रमण होता है। आर्कफेस नस्लीय भेदभाव भी करती है।

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