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अमेरिका में चुनावी ट्रम्प कार्ड:ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन ने एच-1बी वीजा नियम बदले, पहले के मुकाबले अब ये वीजा एक तिहाई कम मिलेंगे

वॉशिंगटन16 दिन पहले
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डोनाल्ड ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन ने चुनाव से ठीक पहले एच-1बी वीजा नियम सख्त कर दिए हैं। भारत के आईटी प्रोफेशनल्स पर इसका असर पड़ना तय माना जा रहा है। (फाइल)
  • फैसले का भारतीयों पर ज्यादा असर होगा, क्योंकि 70% एच-1बी वीजा भारतीयों को मिलते हैं

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले ट्रम्प प्रशासन ने एच-1बी वीजा को लेकर सख्त कदम उठाया है। ट्रम्प प्रशासन ने एच-1बी वीजा में कटौती और वेतन आधारित प्रवेश नियमों को सख्त कर दिया है। इस फैसले का सबसे ज्यादा असर भारत के आईटी प्रोफेशनल्स पर पड़ेगा, क्योंकि हाल के सालों में एच-1बी वीजा की 70% तक की हिस्सेदारी भारतीयों की रही है।

डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्युरिटी (डीएचएस) के कार्यकारी उप सचिव केन कुकसिनेली ने कहा- ‘जिन लोगों ने एच-1बी वीजा के लिए आवेदन किया है, उनमें से एक तिहाई को नए नियमों के तहत वीजा नहीं मिल सकेगा।’ न्यूनतम वेतन आवश्यकताओं के लिए श्रम विभाग के संशोधन गुरुवार से प्रभावी होने के आसार हैं। डीएचएस का एच-1बी संशोधन भी 60 दिनों में लागू हो जाएगा।

अगर नौकरी छूट जाए तो 60 दिनों में नई तलाशनी होगी
अगर किसी एच-1बी वीजा होल्डर की कंपनी ने उसका कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर लिया है, तो नए नियमों के अनुसार वीजा स्टेटस बनाए रखने के लिए उसे 60 दिनों के अंदर नई नौकरी तलाशनी होगा। वरना उसे अपने देश लौटना पड़ेगा।

फैसले के मायने
भारतीय पेशेवरों के लिए मौके घटेंगे
पिछले साल एच1-बी वीजा के लिए 2.5 लाख आवेदन मिले थे, जिनमें से 1.84 लाख भारत से थे। यह संख्या 2016 के मुकाबले 25% कम है। अब अगर यह संख्या एक तिहाई तक घट जाती है तो ज्यादा नुकसान भी भारतीयों को ही होगा। ट्रम्प 2016 में राष्ट्रपति बने थे, तभी से वीजा नियमों के लगातार सख्ती बढ़ रही है।

नागरिकता पाना और कठिन होगा
अमेरिका अभी हर साल 85 हजार एच1-बी वीजा जारी करता है। इनमें से ज्यादतर 5 साल बाद अमेरिकी नागरिकता हासिल करने में कामयाब रहते हैं। अब अगर वीजा ही कम मिलेंगे तो नागरिकता पाने वालों की संख्या भी घटेगी। अभी नागरिकता के लिए 3.5 लाख भारतीयों के एप्लीकेशन पेंडिंग हैं।

भारतीय आईटी कंपनियां प्रभावित होंगी
अमेरिका में हर साल कुल एच-1बी वीजाधारकों में से 15% सिर्फ टीसीएस, इन्फोसिस और विप्रो में नौकरियां पाते हैं। श्रम नियमों में बदलाव से सैलरी बढ़ाना भी प्रस्तावित है। इसलिए इन कंपनियों के लिए एच1-बी वीजा के माध्यम से कस्टमर की साइट पर काम करवाना महंगा पड़ेगा। अमेरिका में काम कर रहीं 50 से ज्यादा भारतीय कंपनियां एच-1बी वीजा के तहत ही कर्मचारी रखती हैं।

लेकिन, ट्रम्प को फायदा मिल सकता है
यह फैसला ट्रम्प की चुनावी रणनीति का हिस्सा है। उनकी पार्टी कहती आई है कि एच-1बी वीजा के कारण 5 लाख अमेरिकियों की नौकरियां बाहरी लोगों को मिल गईं। सर्वे बता रहे हैं कि ट्रम्प अपने कोर वोटर्स पर पकड़ खो रहे हैं, इसलिए वे लगातार अमेरिकियों के हित पहले रखने की बात कह रहे हैं। वे मूल अमेरिकी वोटर्स का ध्रुवीकरण चाहते हैं।

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