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जिद में तहजीब भूले ट्रम्प:पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ने व्हाइट हाउस के अंतिम दिनों में 4 परंपराएं तोड़ीं, निभाई सिर्फ एक

वॉशिंगटनएक महीने पहले
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यह फोटो 10 नवंबर 2016 की है। तब डोनाल्ड ट्रम्प चुनाव जीते थे और तब के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उन्हें व्हाइट हाउस इनवाइट किया था। इस बार ट्रम्प हारे और बाइडेन जीते लेकिन, ट्रम्प ने बाइडेन को व्हाइट हाउस आने का न्योता नहीं दिया।

जो बाइडेन अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ले चुके हैं। डोनाल्ड ट्रम्प अब पूर्व राष्ट्रपति के तौर इतिहास में दर्ज हो चुके हैं। ट्रम्प 7 जनवरी के पहले यह मानने को तैयार ही नहीं थे कि वे चुनाव हार चुके हैं। चुनावी में धांधली के आरोपों पर अड़े रहे। उन्होंने बाइडेन को जीत की औपचारिक बधाई तक नहीं दी। 150 साल में वे पहले ऐसे राष्ट्रपति थे, जिन्होंने नए राष्ट्रपति की इनॉगरेशन सेरेमनी में शिरकत ही नहीं की।

usatoday की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प ने बतौर राष्ट्रपति अपने अंतिम दिनों में सिर्फ एक परंपरा का पालन किया, जबकि चार परंपराएं तोड़ीं। आइए इन पर एक नजर डालते हैं।

एक रस्मअदायगी, जो ट्रम्प कर गए
कार्यकाल खत्म होने के बाद और व्हाइट हाउस छोड़ने से पहले पूर्व राष्ट्रपति नए राष्ट्रपति के लिए एक नोट यानी चिट्ठी छोड़कर जाते हैं। ट्रम्प ने सिर्फ यही रस्मअदायगी की। उन्होंने ओवल ऑफिस में बाइडेन के लिए नोट यानी लेटर छोड़ा। अब बाइडेन यह बताने को तैयार नहीं हैं कि आखिर उस खत में लिखा क्या है। वे इसे प्राइवेट लेटर बता रहे हैं।

चार परंपराएं जो ट्रम्प ने तोड़ीं

1. बाइडेन को व्हाइट हाउस आने का न्योता नहीं दिया
परंपरा के मुताबिक, चुनाव नतीजे साफ होने के बाद वर्तमान राष्ट्रपति भावी राष्ट्रपति (प्रेसिडेंट इलेक्ट) को व्हाइट हाउस आने का न्योता देता है। ट्रम्प ने 7 जनवरी तक हार ही नहीं मानी थी। जब संसद में हिंसा हुई और ट्रम्प पर तोहमतों का गुबार फूटा तो हार कबूल कर ली, लेकिन बाइडेन को बधाई फिर भी नहीं दी। खास बात ये है कि चार साल पहले जब ट्रम्प चुनाव जीते थे बराक ओबामा ने उन्हें व्हाइट हाउस बुलाया था। इससे पहले जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने ओबामा को व्हाइट हाउस और ओवल ऑफिस दिखाया था।

2. फर्स्ट लेडीज का टी एंड टूर ट्रेडिशन
ट्रम्प जैसी बयानबाजी उनकी पत्नी मेलानिया ने तो नहीं की लेकिन, परंपरा तोड़ने में वे भी पीछे नहीं रहीं। करीब 100 साल बाद ऐसा हुआ जब फर्स्ट लेडी (इस बार मेलानिया ट्रम्प) ने फ्यूचर फर्स्ट लेडी (जिल बाइडेन) को व्हाइट हाउस नहीं बुलाया। परंपरा के मुताबिक, भावी प्रथम महिला को वर्तमान प्रथम महिला चाय पर बुलाती हैं। इसके बाद उन्हें व्हाइट हाउस की सैर कराती हैं। ये ट्रांसफर ऑफ पावर का हिस्सा है। बाइडेन की बेटी एश्ले ने मेलानिया की इस हरकत को दुखद करार दिया।

3. प्रेसिडेंट इलेक्ट को शपथ दिलाने नहीं ले गए ट्रम्प
इनॉगरेशन सेरेमनी से पहले व्हाइट हाउस के नॉर्थ पोर्टिको की सीढ़ियों पर प्रेसिडेंट (इस बार ट्रम्प) प्रेसिडेंट इलेक्ट को रिसीव करते हैं। इसके बाद एक साथ कैपिटल हिल पहुंचते हैं, जहां इनॉगरेशन सेरेमनी होती है। 2017 में ट्रम्प और मेलानिया को मिशेल और बराक ने रिसीव किया था। इस बार ट्रम्प खुद ही इनॉगरेशन सेरेमनी में शामिल नहीं हुए। व्हाइट हाउस चीफ टिमोथी हर्लेथ ने बाइडेन को बधाई दी। पद संभालने के बाद सर्जन जनरल के साथ ही टिमोथी की भी छुट्टी कर दी गई।

4. शपथ समारोह में शामिल न होना
152 साल बाद यह पहला मौका था, जब प्रेसिडेंट इलेक्ट की इनॉगरेशन सेरेमनी में प्रेसिडेंट शामिल नहीं हुआ। इसके पहले 1869 में एंड्रू जॉनसन एस. ग्रांट (18वें राष्ट्रपति) के शपथ ग्रहण समारोह से दूर रहे थे। जॉनसन तब व्हाइट हाउस में ही मौजूद थे। ट्रम्प एक कदम आगे निकल गए। उन्होंने फ्लोरिडा रवाना होने से पहले एंड्रू एयरबेस पर समर्थकों को संबोधित किया। यह विदाई भाषण से ज्यादा पॉलिटिकल स्पीच थी।

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