अमेरिका / ट्रम्प ने कहा- अफगान युद्ध एक सप्ताह में जीत सकता हूं मगर एक करोड़ लोगों की हत्या नहीं करना चाहता



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  • 1990 के दशक में अफगानिस्तान में तालिबान को बढ़ावा देने में पाकिस्तान की महत्वपूर्ण भूमिका
  • बीते 18 साल से चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए यूएस और तालिबान की बातचीत जारी
  • सितम्बर में अफगानिस्तान में राष्ट्रपति चुनाव को लेकर अमेरिका तालिबान पर दबाव बना रहा

Dainik Bhaskar

Jul 23, 2019, 04:28 PM IST

वाशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि मैं अफगानिस्तान में जारी युद्ध को एक सप्ताह में खत्म कर सकता हूं मगर ऐसे में यह देश पृथ्वी के नक्शे से खत्म हो जाएगा। यही कारण है कि मैं बातचीत को अधिक तवज्जो देता हूं। ट्रम्प ने अफगानिस्तान में शांति स्थापित करने को लेकर पाकिस्तान की सराहना भी की। अमेरिका पिछले 18 साल से चल रहे संघर्ष को समाप्त करने को लेकर तालिबान से बातचीत कर रहा है। 

 

इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ ओवल ऑफिस में ट्रम्प की बातचीत हुई। उन्होंने कहा- यदि हम अफगानिस्तान में युद्ध चाहते तो इसे एक हफ्ते में जीत सकते हैं। लेकिन, मैं एक करोड़ लोगों की हत्या नहीं करता चाहता। हमने पिछले दो हफ्तों में काफी प्रगति की है। पाकिस्तान ने इसमें हमारी काफी मदद की।  

 

2001 में अमेरिका ने तालिबान को सत्ता से बाहर किया

अफगानिस्तान में 1990 के दशक के दौरान तालिबान को बढ़ावा देने में पाकिस्तान की अहम भूमिका रही है। वर्तमान में यह संगठन राष्ट्रपति अशरफ गनी की सरकार में राजनीतिक समझौते की दिशा में कार्य कर रहा है। 2001 में अमेरिकी सेनाओं ने तालिबान को सत्ता से बाहर कर दिया था मगर इसने धीरे-धीरे अफगानिस्तान में अपनी स्थिति मजबूत कर ली। 

 

इसके बाद होगी अमेरिकी सेना की वापसी

इस साल सितम्बर में अफगानिस्तान में राष्ट्रपति का चुनाव होना है। अमेरिका, तालिबान पर राजनीतिक समझौते करने के लिए दबाव बना रहा है। इससे अफगानिस्तान में लंबे समय से रह रहे अमेरिकी सेना की वापसी का रास्ता साफ हो सकेगा। साथ ही यहां लंबे समय से चल रहा युद्ध भी समाप्त हो सकेगा। 

 

इस्लामाबाद संबंध सुधारने को लेकर प्रतिबद्ध

न्यू अमेरिका थिंक टैंक की सीनियर फेलो और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की पूर्व अधिकारी शमिला चौधरी ने कहा- इमरान खान का यह अमेरिकी दौरा तालिबान के साथ सकारात्मक बातचीत का नतीजा है। 2011 में अमेरिकी कार्रवाई में आतंकी ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान में मारे जाने के बाद दोनों देशों के संबंध खराब हो गए थे। लेकिन इस्लामाबाद अब संबंध सुधारने को लेकर प्रतिबद्ध है।

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