रूस के विदेश मंत्री से मिले एस जयशंकर:बोले- यूक्रेन युद्ध हमारे लिए बड़ा मुद्दा, बातचीत के रास्ते पर लौटें दोनों देश

मॉस्को3 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

यूक्रेन युद्ध के बाद पहली बार रूस की यात्रा पर गए भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि यूक्रेन युद्ध भारत के लिए एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। भारत जोर देकर इस बात को दोहराता है कि दोनों देशों को बातचीत के रास्ते पर लौटना चाहिए। यहां उन्होंने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव मुलाकात की।

बाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जयशंकर ने कहा कि हमारी बैठक हमारे संबंधों का आकलन करने और वैश्विक परिस्थितियों पर एक दूसरे के नजरिए को समझने के लिए है। हमारी बातचीत में समग्र वैश्विक स्थिति और विशिष्ट क्षेत्रीय चिंताओं पर ध्यान दिया जाएगा। मालूम हो कि कुछ महीनों में, कई पश्चिमी देशों के भारी दबाव के बावजूद भारत ने रूस से सस्ते दाम पर कच्चे तेल का आयात बढ़ाया है।

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने आज रूस के मॉस्को में मुलाकात की।
भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने आज रूस के मॉस्को में मुलाकात की।

भारतीय विदेश मंत्री ने कहा, ‘जहां तक द्विपक्षीय संबंधों की बात है, हमारा उद्देश्य एक समकालीन, संतुलित, परस्पर लाभकारी और दीर्घकालिक साझेदारी के निर्माण का है।’ जयशंकर ने कहा कि यूक्रेन युद्ध उनके लिए शीर्ष मुद्दा है। उन्होंने कहा, ‘कोविड, व्यापार संबंधी मुश्किलों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। लेकिन अब हम यूक्रेन युद्ध के परिणामों को इस मामले में शीर्ष पर देख रहे हैं।’

कच्चा तेल, कोरोबार समेत कई मुद्दों पर बातचीत

रूसी समकक्ष के साथ बैठक में जयशंकर ने कच्चा तेल, कारोबार समेत कई मुद्दों पर बातचीत की। जयशंकर ने आगे कहा, ‘आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन के हमेशा बने रहने वाले मुद्दे भी हैं जिनका प्रगति तथा समृद्धि पर नकारात्मक असर होता है। भारत, रूस तेजी से बहुध्रुवीय और पुन: संतुलित होती दुनिया में एक दूसरे के साथ साझेदारी कर रहे हैं। हम दो ऐसी सरकारें हैं जिनके बीच अत्यंत स्थायी और समय की कसौटी पर खरे संबंध रहे हैं।

हमने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के टारगेट्स को लेकर भी बात की।अफगानिस्तान सहित अनेक क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा हुई। हमने चर्चा की कि अफगानिस्तान के लोगों के लिए अपना समर्थन कैसे जारी रखें। जयशंकर की रूस यात्रा को जंग खत्म कराने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। फरवरी में यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद से जयशंकर और लावरोव चार बार मिल चुके हैं। हालांकि रूस में ये पहली मुलाकात है।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने डिप्टी PM डेनिस मांटूरोव से प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत की। जयशंकर ने ट्वीट कर बताया कि इस दौरान व्यापार, निवेश, ऊर्जा, उर्वरक, फार्मा, कृषि और शिपिंग में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर बात की गई।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने डिप्टी PM डेनिस मांटूरोव से प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत की। जयशंकर ने ट्वीट कर बताया कि इस दौरान व्यापार, निवेश, ऊर्जा, उर्वरक, फार्मा, कृषि और शिपिंग में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर बात की गई।

आज का युग युद्ध का नहीं : PM मोदी
सितंबर 2022 में उज्बेकिस्तान के समरकंद में हुई SCO की मीटिंग से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन से मुलाकात की थी। दोनों के बीच हुई करीब 50 मिनट बातचीत में PM मोदी ने कहा था- आज का युग जंग का नहीं है। हमने फोन पर कई बार इस बारे में बात भी की है कि लोकतंत्र कूटनीति और संवाद से चलता है।

पुतिन ने मोदी से कहा- यूक्रेन पर आपकी चिंताओं से वाकिफ
मुलाकात के दौरान पुतिन ने मोदी से कहा था- मैं यूक्रेन से जंग पर आपकी स्थिति और आपकी चिंताओं से वाकिफ हूं। हम चाहते हैं कि यह सब जल्द से जल्द खत्म हो। हम आपको वहां क्या हो रहा है, इसकी जानकारी देते रहेंगे।

शांति के समर्थन में भारत
24 फरवरी को शुरू हुई रूस-यूक्रेन जंग के बाद से प्रधानमंत्री मोदी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से कई बार फोन पर बात कर चुके हैं। अक्टूबर में पीएम मोदी ने राष्ट्रपति जेलेंस्की से बातचीत की थी। इस दौरान उन्होंने कहा था- कोई सैन्य समाधान नहीं हो सकता। भारत शांति के किसी भी प्रयास में योगदान देने को तैयार है।

जंग खत्म हो, यही हमारा मकसद
जून 2022 में एस.जयशंकर ने यूरोप के स्लोवाकिया विजिट के दौरान कहा था- रूस-यूक्रेन युद्ध में हम पहले दिन से कह रहे हैं कि युद्ध विराम हो। दोनों देशों को बातचीत के जरिए शांति के रास्ते पर आना चाहिए। युद्ध कोई विकल्प नहीं है।