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ऊर्जा संकट:यूरोप में बिजली 250%, गैस 400% महंगी हुई; दुनिया के कई देशों में हालात बिगड़ रहे

9 दिन पहले
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लेबनान में 24 घंटे बाद बिजली लौटी, सेना उतरी। - Dainik Bhaskar
लेबनान में 24 घंटे बाद बिजली लौटी, सेना उतरी।

दुनिया भर में ऊर्जा का संकट गहरा गया है। अंधेरे में डूबने के हालत पैदा हो रहे हैं। कुछ देशों में बिजली कट हो चुकी है तो कई देशों में कोयले की किल्लत के कारण बिजली कट होने वाली है। कोयला नहीं है, नेचुरल गैस और तेल के दाम आसमान छू रहे हैं। यूरोप में इस वर्ष की शुरुआत से अब तक नेचुरल गैस के दाम 400% जबकि बिजली के 250% बढ़ चुके हैं।

चीन की फैक्ट्रियों में 18 फीसदी तक उत्पादन कम हो चुका है। बड़ा सवाल है कि दुनिया को आखिर ऊर्जा का संकट क्यों झेलना पड़ रहा है, ये कब तक रहने वाला है? विशेषज्ञों के अनुसार, कोरोना काल के बाद सामान्य हालात लौटने पर उत्पादन क्षेत्र में अचानक बढ़ी मांग इसका बड़ा कारण है। अब आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में पूरी दुनिया में बिजली का संकट गहरा सकता है।

ऊर्जा संकट के असर से सर्दियों में होगी मुश्किल

  • दुनिया के विभिन्न देशों के लिए सर्दियों में दिक्कत हो सकती है। ठंडे देशों में सर्दियों के दौरान घरों और अन्य स्थानों को गर्म रखने के लिए ईंधन की बहुत अधिक खपत होती है। लेकिन आने वाले समय में ऊर्जा आपूर्ति सुचारू होने की संभावना नजर नहीं आने के कारण सर्दी में लोगों को मुश्किलें होंगी।
  • उत्पादन क्षमता पर भी विपरीत असर पड़ने की आशंका है। काेयले की कमी के कारण चीन और दक्षिण पूर्वी देशों में फैक्ट्रियों में उत्पादन में कमी दर्ज की जाने लगी है। ऊर्जा के स्रोतों में आई कमी के कारण परोक्ष रूप से रोजगार के अवसरों पर भी असर पड़ने की आशंका है। फैक्ट्रियों में उत्पादन घटने से छंटनी होने की आशंका बढ़ गई है।

कई देशों में उत्पादन में कमी, रोजगार पर संकट

चीन: कई प्रांतों में घंटों तक बिजली कटौती की जा रही है। कोयले का उत्खनन 65 फीसदी तक कम कर दिया है। चीन की कई फैक्ट्रियों में उत्पादन शून्य हो गया है। कई फैक्ट्रियां बंद।

लेबनान: बिजली स्टेशन अल ज़हरानी और दीर अम्मार बंद। रविवार को सेना ने इमरजेंसी ईंधन सप्लाई शुरू की। सरकार ने ईंधन आयात के लिए 740 करोड़ रुपए जारी किए।

अमेरिका: शुक्रवार को एक गैलन गैसोलिन की कीमत 3.25 डॉलर, जबकि अप्रैल में यही कीमत 1.27 प्रति गैलन थी। यूनिवर्सिटी ऑफ केलिफोर्निया के प्रो. स्टीवन डेविस ने कहा, सर्दियों में परंपरागत ईंधन की खपत 1 फीसदी बढ़ जाएगी।

ब्रिटेन: गैस के दाम भी पिछले एक दशक के दौरान सबसे ज्यादा हैं। ब्रिटेन के पास उत्तरी सागर में गैस के बड़े भंडार हैं। लेकिन वहां से गैस निकालने का काम रोक दिया था।

द.पू.एशिया: सितंबर के बाद से यहां नेचुरल गैस के दामों में 85 फीसदी तक की वृद्धि हो चुकी है। ये गत 13 वर्षों में सबसे अधिक है। फैक्ट्रियों के उत्पादन में 16% तक की कमी।

खुल रही इकोनॉमी, मांग बढ़ी तो किल्लत पैदा हुई

ये संकट ऊर्जा की बढ़ती मांग की वजह से हो रहा है। इकोनॉमी के ओपन अप के दौर में ऊर्जा की बढ़ती मांग ने रीस्टॉकिंग की प्रक्रिया को बाधित कर दिया है। प्राकृतिक गैस के लिए चीन की बढ़ती मांग ने भी किल्लत को और बढ़ा दिया है।

विश्लेषक ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि को ‘ग्रीनफ्लेशन’ करार देते हैं। यूके बिजली की एक चौथाई जरूरतों को पवन ऊर्जा से पूरा कर रहा है। अमेरिकी और ईयू तेल कंपनियों ने 2015 और 2021 के निवेश को आधे से अधिक कम कर दिया है।

आगे क्या- ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने में मूल्य नियंत्रण चुनौती

  • ऊर्जा आपूर्ति कुछ और समय बाधित रह सकती है। उत्पादकों को ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाने में मूल्य नियंत्रण सबसे बड़ी चुनौती हो सकती है।
  • जलवायु परिवर्तन पर 31 अक्टूबर को ग्लासगो में कॉप-26 बैठक होगी। कोयले के उत्खनन पर अहम फैसले किए जाने की संभावना है।
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