• Hindi News
  • International
  • Established in 1904, the New York based Explorers Club is an elite group of explorers and scientists that's been involve

एक्सप्लोरर क्लब / खतरों से जूझना रोज का शगल, पायलट ने बनाया सबसे ऊंचे स्थान पर कार से जाने का रिकॉर्ड



एक्सप्लोरर क्लब के सदस्य। एक्सप्लोरर क्लब के सदस्य।
X
एक्सप्लोरर क्लब के सदस्य।एक्सप्लोरर क्लब के सदस्य।

  • 1904 में बना था एक्सप्लोरर क्लब, 2016 में एक्सप्लोरर क्लब के हाॅन्गकाॅन्ग चैप्टर का गठन
  • 34 साल के मैट प्रायर पायलट थे, मंगोलिया के सबसे ऊंचे स्थान पर कार से जाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराया
  • सभी सदस्य महीने में एक बार मीटिंग करके बनाते हैं साहसिक मिशन की योजना

Dainik Bhaskar

Apr 14, 2019, 06:50 AM IST

वॉशिंगटन. दुनिया में साहसिक कामों को अंजाम देने वालों की कमी नहीं। 115 साल पुराने एक्सप्लोरर क्लब के सदस्य मरुस्थल, बर्फीले पहाड़ों पर खोजी अभियान करते हैं। क्लब के एक सदस्य मैट प्रायर (34) पायलट रह चुके हैं। वह मंगोलिया में दुनिया के सबसे ऊंचे स्थान पर कार से जाने का रिकॉर्ड बना चुके हैं। प्रायर का नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल हो चुका है। उनके मुताबिक- खतरों से जूझना हमारा रोज का शगल है।

गोबी के रेगिस्तान से हुई थी एडवेंचर की शुरुआत

  1. गोबी का रेगिस्तान एशिया का सबसे बड़ा मरुस्थल है। इसका 30% हिस्सा मंगोलिया में है तो उत्तरी चीन का बड़ा भू-भाग भी इसमें शामिल है। इस दुर्गम इलाके में अमेरिका के पर्यावरणविद रॉय चैपमैन एंड्रयूज ने करीब 115 साल पहले पहली बार डायनासोर के अंडे तलाश किए थे। इसके बाद ही यहां खुदाई करके जीवाश्मों की तलाश शुरू की गई। चैपमैन ने ही 1904 में एक्सप्लोरर क्लब बनाया था। 

  2. हाॅन्गकाॅन्ग चैप्टर ऑफ एक्सप्लोरर क्लब ने नए आयाम स्थापित किए

    एक्सप्लोरर क्लब अपना काम कर रहा था, लेकिन हॉन्गकॉन्ग चैप्टर ऑफ एक्सप्लोरर क्लब ने इस दिशा में नए आयाम स्थापित किए। क्लब ने नासा की तकनीक का इस्तेमाल करके मरुस्थल में एक रास्ता तलाश किया। 35 सदस्यीय टीम ने 20 दिनों तक चले अभियान में डायनासोर की कई प्रजातियों का पता लगाया। यही नहीं 250 जगहों पर खुदाई करके विलुप्त हो चुके जानवर के जीवाश्म तलाश किए।  

  3. हाॅन्गकाॅन्ग चैप्टर ऑफ एक्सप्लोरर क्लब के डायरेक्टर मैट प्रायर ने बताया कि अगले साल इंडोनेशिया में पानी के नीचे की सभ्यता की तलाश के साथ थाईलैंड की गुफाओं पर अध्ययन किया जाएगा। उनका कहना है कि खोज करना मानव का स्वभाव है और यही विकास का भी आधार है। 

  4. प्रायर ने 2015 में रॉयल एयरफोर्स छोड़कर एक्सप्लोरर क्लब की सदस्यता ग्रहण की थी। भूटान मामलों के एक्सपर्ट मिखाइल बार्थ की सलाह पर उन्होंने 2016 में एक्सप्लोरर क्लब हाॅन्गकाॅन्ग चैप्टर का गठन किया। फिलहाल इसकी 32 अंतरराष्ट्रीय शाखाएं हैं। खतरों से जूझना क्लब के मेंबर्स का शगल है। इसके तहत ही गोबी रेगिस्तान में मिशन शुरू किया गया।  

  5. प्रायर का कहना है कि यह कोई ट्रैवलिंग क्लब नहीं है। दुनियाभर में इसके 3500 से ज्यादा मेंबर्स हैं। हाॅन्गकाॅन्ग में ही इससे 70 लोग जुड़े हैं। क्लब की मेंबरशिप लेना इतना आसान नहीं है। जो बतौर मेंबर इससे नहीं जुड़ पाते वो फ्रैंड्स के तौर पर इससे संबद्ध हो सकते हैं।

  6. क्लब के सदस्यों में अंतरिक्ष यात्रियों के साथ समुद्र और मरुस्थल को आखिरी छोर तक खंगालने वाले साहसी लोग शामिल हैं। ट्रैकिंग विशेषज्ञ एड्रियान बॉटोम्ले, अल्ट्रा मैराथनर डेविड गेथिंग, कनाडा के पूर्व राजनयिक टेड लिपमैन और लॉरेल कोर शामिल हैं। चैप्टर के सभी सदस्य महीने में एक बार मीटिंग करके साहसिक मिशन की योजना बनाते हैं। 

  7. क्लब की सालाना फीस 23 हजार से लेकर 94 हजार रुपए तक है। छोटे मिशन का खर्च मेंबर्स खुद उठाते हैं, लेकिन बड़े प्रोजेक्ट के लिए स्पॉन्सरशिप का सहारा लिया जाता है। 2019 में क्लब की योजना विश्व का भ्रमण करके विज्ञान और खोज पर काम करने की है। 

  8. प्रायर का कहना है कि क्लब के सभी सदस्य गोबी के रेगिस्तान या फिर डायनासोर के जीवाश्म जैसी खोज पर काम नहीं कर सकते। उनका कहना है कि मेंबर्स को अपनी क्षमता के हिसाब से काम करना चाहिए। वो ऐसे जटिल व गूढ़ विषयों पर काम करके उनके जवाब तलाशने का काम कर सकते हैं, जो पृथ्वी, पर्यावरण और सभ्यता के लिए लाभकारी हों। 

COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना