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कितना महंगा होगा कच्चा तेल:साल के अंत तक कीमतों में बढ़त का अनुमान, डिमांड में अनिश्चितता की वजह से सप्लाई हो रही प्रभावित

2 महीने पहले
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कच्चे तेल की सप्लाई में कमी और बढ़ती डिमांड की वजह से कच्चे तेल की कीमतें पिछले तीन साल में सबसे ज्यादा बढ़ी हैं। दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। सोमवार को बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 80 डॉलर प्रति बैरल थी। अक्टूबर 2018 के बाद यह कीमत सबसे ज्यादा है। जानकारों ने अनुमान लगाया था कि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोत्तरी होगी। लेकिन यह इजाफा उनके अनुमान से ज्यादा है।

सोमवार को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.73% की बढ़त के साथ 79.44 डॉलर प्रति बैरल थी। ब्रेंट क्रूड की कीमतों में यह बढ़त पिछले तीन हफ्तों से जारी है। जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सस क्रूड की कीमत 2.04% की बढ़त के साथ 75.49 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। टेक्सस क्रूड की कीमतों में यह बढ़त जुलाई के मुकाबले सबसे ज्यादा है।

तेल की कीमतों का अनुमान लगाने वाली संस्था गोल्डमैन सैक्श ने बताया है कि साल के अंत तक तेल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 90 डॉलर प्रति बैरल तक हो सकती है। यह इनके पिछले अनुमान से ज्यादा है।

क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?
अटलांटिक काउंसिल्स ग्लोबल एनर्जी सेंटर के डिप्टी डॉयरेक्टर रीड ब्लेकमोर ने बताया कि, इस समय हम बाजार में जो उथल- पुथल देख रहें हैं, उसके तीन प्रमुख कारण हैं। पिछले एक साल में कोविड-19 के कारण लंबे समय तक डिमांड में अनिश्चितता का प्रभाव सप्लाई मैनेजमेंट पर पड़ा है। दुनियाभर में कई देशों ने कार्बन एमिशन रोकने के लिए अपनी पॉलिसी में बदलाव किए हैं। ग्लोबल एनर्जी ट्रांजिशन के बीच बाजार की स्थिरता के लिए पर्याप्त निवेश और तेल-गैस सप्लाई का विकास जरूरी है।

पिछले साल अप्रैल में कोरोना महामारी के कारण दुनियाभर में इकोनॉमिक गतिविधियां ठप्प पड़ गई थी। इस वजह से कच्चे तेल की मांग में गिरावट आई थी। लेकिन इस साल वैक्सीनेशन की दर बढ़ने और कोरोना गाइडलाइंस में छूट मिलने के बाद दुनियाभर में कच्चे तेल की मांग बढ़ी है।

हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़त का एकमात्र कारण इकोनॉमिक रिकवरी ही नहीं है। पिछले महीने इडा तूफान की वजह से अमेरिका में तेल की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई। कोरोना की पहली लहर के बाद कीमतों में गिरावट आई थी। इसके बाद ओपेक प्लस, रूस और सऊदी अरब के तेल संगठनों ने सप्लाई में कमी कर दी थी।

अगले साल तक कम होगी कीमत
अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार कोविड-19 महामारी से पहले 2019 में दुनियाभर में तेल की खपत ​​​​​ 99.7 मिलियन बैरल प्रति दिन (bpd) थी। IEA ने ग्लोबल इकोनॉमी में सुधार होने के बाद अगले साल तक कच्चे तेल की मांग पहले जैसी होने का अनुमान जताया है। मांग में सुधार होने के बाद ही कच्चे तेल की कीमतें पटरी पर लौटेगी।

यूरोपीय बाजारों में चल रही नेचुरल गैस सप्लाई की कमी और इडा तूफान की वजह से अमेरिकी तेल उत्पादन धीमा हुआ है। इस कारण फिलहाल कीमतों में बढ़ोत्तरी जारी रहने की संभावना है।

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