चीन की सुप्रीम कोर्ट की बड़ी चेतावनी:जरूरत से ज्यादा लिया जा रहा काम, लोगों का गुस्सा बढ़ा तो 996 का फॉर्मूला अवैध

बीजिंग3 महीने पहलेलेखक: जेपिंग हुआन
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सुप्रीम कोर्ट और मानव संसाधन विभाग ने ऐसे 10 मामलों की केस स्टडी को आधार बनाया, जिसमें काम के दौरान कर्मचारी की मौत हुई और कंपनी को मुआवजे की रकम चुकानी पड़ी। फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
सुप्रीम कोर्ट और मानव संसाधन विभाग ने ऐसे 10 मामलों की केस स्टडी को आधार बनाया, जिसमें काम के दौरान कर्मचारी की मौत हुई और कंपनी को मुआवजे की रकम चुकानी पड़ी। फाइल फोटो
  • 996 फॉर्मूला- यानी हफ्ते के 6 दिन सुबह 9 से रात 9 बजे तक लगातार काम

चीन की सुप्रीम पीपुल्स कोर्ट और सरकार ने देश के सभी बड़े निगमों में जरूरत से ज्यादा काम करवाने पर अब तक की सबसे बड़ी चेतावनी जारी है। यहां निजी कंपनियों में कर्मचारियों से जरूरत से ज्यादा काम लिया जा रहा है जिसके कारण कोर्ट में प्रताड़ना के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट और मानव संसाधन विभाग ने ऐसे 10 मामलों की केस स्टडी को आधार बनाया, जिसमें काम के दौरान कर्मचारी की मौत हुई और कंपनी को मुआवजे की रकम चुकानी पड़ी। इसलिए कोर्ट ने भी काम के अत्यधिक दबाव को अवैध मानते हुए कंपनियों को इस पर विचार करने को कहा है।

नौजवानों को बीमार कर रहा 996 का फॉर्मूला
दरअसल, चीन में उत्पादकता बढ़ाने में निजी और तकनीकी क्षेत्र की कंपनियों का बड़ा हाथ है। लेकिन अब इसी इंडस्ट्री का 996 फॉर्मूला देश के कामकाजी नौजवानों को बीमार और परेशान कर रहा है। हालांकि, अलीबाबा जैसी कई कंपनियां अब भी 996 की वकालत करती है। 996 फॉर्मूले का मतलब है हफ्ते के छह दिन सुबह नौ से रात नौ बजे तक काम करो, वह भी बिना किसी ओवरटाइम वेतन के।

हुआवे और अलीबाबा जैसी कंपनियों के कर्मचारी परेशान
चीन की हुआवे और अलीबाबा जैसी बड़ी टेक कंपनियां देश को तेजी से बदलने के चक्कर में दिनरात अपने कर्मचारियों को काम के दबाव में रखा। 996 का फार्मूला लागूकर ये कंपनियां दुनिया के प्रतिष्ठित ब्रांड तो बन गईं लेकिन कामगारों की ओर किसी का ध्यान नहीं गया।

इस सूची में 139 कंपनियां हैं। जिनके खिलाफ यहां के लोग सोशल मीडिया पर अपना गुस्सा जाहिर रहे हैं। लगातार काम की वजह से अपनी सेहत बिगाड़ने के बाद लोग इन कंपनियों के खिलाफ केस दर्ज करवा रहे हैं।

लगातार 110 घंटे ऑफिस में रहने पर मानसिक बीमार
चीन के वीडियो गेम डिजाइनर ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि उसने कई बार लगातार 110 घंटे ऑफिस में ही बिताए। कड़ी मेहनत के चलते उसे 31 साल की उम्र में उसे मानसिक बीमारी हो गई है, उसने माना कि यह सब लगातार काम करने की वजह से ही हुआ है।

वहीं नौकरियां देने वाली कंपनियां जॉब कॉन्ट्रैक्ट में काम के ऐसे घंटों का उल्लेख नहीं करतीं लेकिन परफॉर्मेंस को लेकर बड़े लक्ष्य कर्मचारियों को ज्यादा से ज्यादा काम करने के लिए मजबूर करते हैं।

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