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देरी से मां बनने पर समाजिक सोच का अनुभव:अमेरिकी महिला बोली - 30 की उम्र में ध्यान कॅरियर पर था, फिर कैंसर को हराया, 45 साल में मां बनी, अब लोग बेटी को मेरी पोती समझते हैं

2 महीने पहलेलेखक: सारा डाफर
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सारा अब उन तमाम महिलाओं से मिलने और उन्हें समझाने की कोशिश कर रही हैं, जो देर से मातृत्व सुख पाना चाहती हैं। - Dainik Bhaskar
सारा अब उन तमाम महिलाओं से मिलने और उन्हें समझाने की कोशिश कर रही हैं, जो देर से मातृत्व सुख पाना चाहती हैं।

‘एक दिन मैं अमेरिका के कनेक्टिकट एयरपोर्ट पर फ्लाइट का इंतजार कर रही थी। उस वक्त दो साल की बेटी क्लेर्क भी साथ थी। बेटी पानी पीने के लिए जिद कर रही थी, इसलिए बोतल खरीदने के लिए स्टोर पहुंची और बेटी को काउंटर पर बैठा दिया। इसी दौरान एक अजनबी महिला आई और मुस्कुराते हुए कहने लगी- लगता है आप इसकी दादी हैं। मेरे भी चार पोता-पोती हैं।

उनकी बात सुनकर मैंने भी हंसते हुए जवाब दिया- यह मेरी बेटी है पोती नहीं।’ जिंदगी में पहला मौका था, जब किसी ने मुझे मेरी बेटी की दादी समझा। ये वाकया साझा किया है 45 की उम्र में मातृत्व सुख हासिल करने वाली सारा डफर का। सारा कहती हैं दरअसल, यह समाज की वो सच्चाई है, जिससे आज एक बड़ा कामकाजी वर्ग जूझ रहा है। पेशे से संगीतकार सारा ने बताया, ‘30 साल तक मैं मां बनना नहीं चाहती थी।

तब मेरा ध्यान पढ़ाई और संगीत पर था। 35 साल में मुझे ब्रेस्ट कैंसर हुआ। लगने लगा कि जिंदा नहीं बचूंगी। मैंने इस बारे में किसी को नहीं बताया। इसके साथ मेरी मां बनने की मेरी इच्छा मर गई। इन हालातों ने डरा दिया। तनाव में आकर शराब पीने लगी। धीरे-धीरे लत पड़ गई। मैं अवसाद में थी। माता-पिता ने बहुत कोशिशें की। सबको यह लगता था कि पीने के चलते मेरी सेहत गिर रही है।

हालांकि कुछ समय बाद लगा कि जीना है, तो इलाज करना होगा। तब कीमोथैरेपी शुरू हुई। इलाज में एक ब्रेस्ट काट दिया गया। हालांकि इस दौरान मेरी शराब की लत भी छूट गई। भाग्यशाली थी कि नई जिंदगी के साथ मुझे अच्छा जीवनसाथी मिला। उसने उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि तुम्हें मां बनना चाहिए। मैं भी इस बारे में सोचने लगी।

जांच में पता चला कि उम्र 42 साल होने से प्रजनन क्षमता नहीं बची है। इसलिए डॉक्टर ने आईवीएफ ट्रीटमेंट का सुझाव दिया। मैं तैयार हो गई। एग डोनेशन के लिए एक युवती की मदद ली। इस अनुभव से सबक मिला है कि परिवार जरूरी है, हमें अहम फैसले लेने में मदद मिलती है। अब मैं सेहत और अच्छी जिंदगी पर ज्यादा देने लगी हूं।

देर से मातृत्व सुख चाहने वाली महिलाओं की काउंसिलिंग करती हूं

54 साल की सारा अब एक कॉलेज में प्रोफेसर हैं। खुद को वह ज्यादा संयमित और सहनशील मानती हैं। उन्होंने बताया कि अब उन तमाम महिलाओं से मिलने और उन्हें समझाने की कोशिश कर रही हूं, जो मेरी तरह देर से मातृत्व सुख पाना चाहती हैं। एक शिक्षक होने के नाते उन्हें समझाती हूं कि वे मातृत्व को महत्व दें।

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